"वंदे मातरम राष्ट्रीय गीत है, ट्रेन नहीं": प्रियंका चतुर्वेदी का भाजपा पर तंज; राष्ट्रीय गीत की गाइडलाइंस को बताया 'चुनावी स्टंट'

शिवसेना (UBT) नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने 'वंदे मातरम' गाइडलाइंस को चुनावी स्टंट बताया और भाजपा नेताओं को राष्ट्रीय गीत व ट्रेन के बीच अंतर समझने की सलाह दी।

Feb 15, 2026 - 20:46
"वंदे मातरम राष्ट्रीय गीत है, ट्रेन नहीं": प्रियंका चतुर्वेदी का भाजपा पर तंज; राष्ट्रीय गीत की गाइडलाइंस को बताया 'चुनावी स्टंट'
"वंदे मातरम राष्ट्रीय गीत है, ट्रेन नहीं": प्रियंका चतुर्वेदी का भाजपा पर तंज; राष्ट्रीय गीत की गाइडलाइंस को बताया 'चुनावी स्टंट'

कोलकाता : ‘वंदे मातरम’ राष्ट्रीय गीत पर आई केंद्र सरकार की गाइडलाइंस को लेकर शिवसेना (यूबीटी) नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है।

उन्‍होंने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में कहा कि वह इसे एक चुनावी स्टंट के तौर पर देखती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल चुनाव से ठीक पहले संसद में एक चर्चा के दौरान ‘वंदे मातरम’ जैसे नारों पर रोक लगाने संबंधी नोटिफिकेशन जारी किया गया था, जिसका उन्होंने विरोध किया था।

प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि नोटिफिकेशन में ‘वंदे मातरम’ जैसे नारे नहीं लगाने की बात कही गई थी, जिसे लेकर उन्होंने कड़ा ऐतराज जताया। उनके विरोध के बाद एक स्पष्टीकरण जारी किया गया और यह स्पष्ट किया गया कि ऐसे नारे लगाए जा सकते हैं, जिसके बाद रोक हटा ली गई। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कई भाजपा प्रवक्ताओं को ‘वंदे मातरम’ और ‘वंदे भारत’ में अंतर तक नहीं पता। उन्होंने कहा कि भाजपा कार्यकर्ताओं और नेताओं को यह समझना चाहिए कि वंदे मातरम देश का राष्ट्रीय गीत है, जबकि वंदे भारत एक्सप्रेस एक रेल सेवा है।

विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यह भारत के चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है और आयोग को अपना कर्तव्य निभाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सभी राजनीतिक दल इस बात से सहमत हैं कि एसआईआर की प्रक्रिया लागू की जानी चाहिए, लेकिन जिस तरह से भारतीय जनता पार्टी इस मुद्दे का राजनीतिकरण कर रही है, वह दुर्भाग्यपूर्ण है।

चतुर्वेदी ने आरोप लगाया कि भाजपा अपने राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए चुनाव आयोग के माध्यम से प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों में विपक्ष मजबूत है, वहां मतदाताओं को चुप कराने, उनके वोट को अमान्य घोषित करने और असहमति को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि ऐसा रुख पहले बिहार में देखा गया और अब पश्चिम बंगाल में भी नजर आ रहा है।

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