Hormuz Strait Crisis: समझौते के कुछ घंटों बाद ही भड़का ईरान, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज फिर बंद, दुनिया की बढ़ी चिंता
अमेरिका-ईरान समझौते के कुछ घंटों बाद ही नया विवाद खड़ा हो गया। ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को फिर बंद करने का फैसला किया है। जानिए लेबनान विवाद, ट्रंप-नेतन्याहू मतभेद और वैश्विक तेल बाजार पर इसका असर।
BaluSingh Rajpurohit Official | Verified Expert • 27 Mar, 2026Editor
Jun 20, 2026 • 7:23 AM | नई दिल्ली Last Edited By:News Tv India हिंदी
(23 days ago)
N
News TV India
BREAKING
BaluSingh Rajpurohit
23 days ago
Hormuz Strait Crisis: समझौते के कुछ घंटों बाद ही भड़का ईरान, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज फिर बंद, दुनिया की बढ़ी चिंता
अमेरिका-ईरान समझौते के कुछ घंटों बाद ही नया विवाद खड़ा हो गया। ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को फिर बंद करने का फैसला किया है। जानिए लेबनान विवाद, ट्रंप-नेतन्याहू मतभेद और वैश्विक तेल बाजार पर इसका असर।
“Hormuz Strait Crisis: समझौते के कुछ घंटों बाद ही भड़का ईरान, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज फिर बंद, दुनिया की बढ़ी चिंता”
News TV India
https://www.newstvindia.in/s/9713b6
Date
20 June 2026
QR Code
https://www.newstvindia.in/s/9713b6
Hormuz Strait Crisis: समझौते के कुछ घंटों बाद ही भड़का ईरान, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज फिर बंद, दुनिया की बढ़ी चिंता
नई दिल्ली डेस्क: पश्चिम एशिया में शांति की उम्मीदों को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है। अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम और समझौते की घोषणा के कुछ ही घंटों बाद नया विवाद सामने आ गया। ईरान ने आरोप लगाया है कि समझौते की कई अहम शर्तों का पालन नहीं किया जा रहा है। इसी नाराजगी के बीच तेहरान ने दुनिया के सबसे अहम समुद्री तेल मार्गों में शामिल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को दोबारा बंद करने का फैसला किया है। इस कदम ने वैश्विक ऊर्जा बाजारों और अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई चिंता पैदा कर दी है।
समझौते के बाद क्यों भड़का ईरान?
अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते को क्षेत्र में तनाव कम करने की दिशा में एक अहम पहल माना जा रहा था। हालांकि, ईरान का कहना है कि समझौते में शामिल कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर अभी तक कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है। तेहरान का आरोप है कि लेबनान से इजरायली सेना की वापसी, नौसैनिक नाकेबंदी समाप्त करने और फारस की खाड़ी में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति कम करने जैसी शर्तों को लागू नहीं किया गया।
इसी वजह से इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने सख्त चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि जब तक समझौते की शर्तों को पूरी तरह लागू नहीं किया जाता, तब तक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को बंद रखा जाएगा। ईरान इस फैसले को अपनी सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों से जोड़कर देख रहा है।
क्या आप WhatsApp पर न्यूज़ अपडेट पाना चाहते हैं?
WhatsApp पर ताज़ा और भरोसेमंद न्यूज़ अपडेट तुरंत पाएं। अभी जुड़ें और हर खबर सबसे पहले पढ़ें।
लेबनान में जारी सैन्य अभियान बना विवाद की बड़ी वजह
मौजूदा तनाव की सबसे बड़ी वजह लेबनान में जारी सैन्य गतिविधियां हैं। इजरायल ने साफ कर दिया है कि वह दक्षिणी लेबनान में अपना अभियान फिलहाल बंद नहीं करेगा। इजरायली नेतृत्व का मानना है कि सीमा क्षेत्र में सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सैन्य मौजूदगी जरूरी है।
हाल के दिनों में दोनों पक्षों के बीच हुए हमलों और जवाबी कार्रवाई में कई लोगों की जान गई है और भारी नुकसान भी हुआ है। इन घटनाओं के बाद युद्धविराम की विश्वसनीयता पर सवाल उठने लगे हैं। ईरान का मानना है कि लेबनान में जारी सैन्य कार्रवाई समझौते की भावना के खिलाफ है और इससे पूरे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ सकती है।
इस पूरे घटनाक्रम का असर अमेरिका और इजरायल के रिश्तों पर भी दिखाई देने लगा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने सार्वजनिक रूप से संकेत दिए हैं कि क्षेत्र में तनाव कम करने के लिए सैन्य अभियानों को सीमित किया जाना चाहिए। वहीं, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (Benjamin Netanyahu) अपने सुरक्षा दृष्टिकोण पर कायम हैं।
दोनों नेताओं के बयानों में दिखाई दे रहे अंतर ने यह संकेत दिया है कि पश्चिम एशिया की स्थिति को लेकर रणनीतिक मतभेद उभर रहे हैं। अमेरिकी प्रशासन के कुछ अधिकारियों का भी मानना है कि केवल सैन्य कार्रवाई से समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकाला जा सकता और कूटनीतिक प्रयासों को प्राथमिकता देना जरूरी है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने से बढ़ी वैश्विक चिंता
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में गिना जाता है। वैश्विक तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। ऐसे में इसके बंद होने की खबर से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में चिंता बढ़ गई है।
भारत समेत कई ऐसे देश, जो बड़े पैमाने पर ऊर्जा आयात पर निर्भर हैं, इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है, जिसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय कीमतों पर देखने को मिल सकता है।
कूटनीतिक समाधान की कोशिशें तेज
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच दुनिया की बड़ी शक्तियां स्थिति को सामान्य करने के प्रयासों में जुट गई हैं। कई देशों की कोशिश है कि हाल ही में हुए समझौते को बचाया जाए और क्षेत्र को एक बड़े संघर्ष की ओर बढ़ने से रोका जा सके।
हालांकि मौजूदा हालात यह संकेत दे रहे हैं कि यदि समझौते की शर्तों को लेकर सभी पक्षों के बीच सहमति नहीं बनती, तो पश्चिम एशिया में तनाव और गहरा सकता है। इसका असर केवल क्षेत्रीय राजनीति तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाजारों पर भी पड़ सकता है।