बार-बार UPI सर्विस डाउन होने से डिजिटल भुगतान पर असर, मार्च 2025 में रिकॉर्ड ट्रांजेक्शन के बावजूद चिंता बढ़ी
भारत में डिजिटल भुगतान का सबसे लोकप्रिय माध्यम यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) हाल ही में तकनीकी समस्याओं से जूझ रहा है। पिछले 20 दिनों में तीन बार—26 मार्च, 2 अप्रैल और 12 अप्रैल को—UPI सेवाएं बाधित हुईं, जिससे लाखों उपयोगकर्ताओं को ट्रांजेक्शन करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।

भारत में डिजिटल भुगतान का सबसे लोकप्रिय माध्यम यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) हाल ही में तकनीकी समस्याओं से जूझ रहा है। पिछले 20 दिनों में तीन बार—26 मार्च, 2 अप्रैल और 12 अप्रैल को—UPI सेवाएं बाधित हुईं, जिससे लाखों उपयोगकर्ताओं को ट्रांजेक्शन करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।
UPI डाउनटाइम: बढ़ती निर्भरता के बीच तकनीकी चुनौतियाँ
नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने इन व्यवधानों को 'इंटरमिटेंट टेक्निकल इशू' बताया है। इन समस्याओं के कारण उपयोगकर्ताओं को गूगल पे, फोन पे और पेटीएम जैसे प्लेटफॉर्म्स पर ट्रांजेक्शन करने में दिक्कतें आईं। DownDetector के अनुसार, 12 अप्रैल को लगभग 90 मिनट तक UPI सेवा बाधित रही, जिससे 80% उपयोगकर्ताओं को ट्रांजेक्शन और 17% को फंड ट्रांसफर में समस्या हुई।
NPCI is currently facing intermittent technical issues, leading to partial UPI transaction declines. We are working to resolve the issue, and will keep you updated.
We regret the inconvenience caused. — NPCI (@NPCI_NPCI) April 12, 2025
मार्च 2025: रिकॉर्ड ट्रांजेक्शन के बावजूद चिंता
मार्च 2025 में UPI ने 24.77 लाख करोड़ रुपये के ट्रांजेक्शन के साथ नया रिकॉर्ड बनाया, जो फरवरी की तुलना में 12.79% अधिक है। इस अवधि में दैनिक औसत ट्रांजेक्शन 590 मिलियन रहे, जिनकी औसत दैनिक राशि 79,910 करोड़ रुपये थी।
हालांकि, 12 अप्रैल को सेवा बाधित होने के कारण ट्रांजेक्शन की संख्या 62 करोड़ से घटकर 55 करोड़ रह गई, और ट्रांजेक्शन मूल्य में 20% की कमी आई।
UPI डाउनटाइम का इतिहास
UPI सेवा की शुरुआत 2016 में हुई थी, और तब से अब तक कई बार सेवाएं बाधित हुई हैं। मार्च 2020 से मार्च 2025 तक UPI सेवा कम से कम 17 बार डाउन हो चुकी है, जिसमें जुलाई 2024 में सबसे लंबा डाउनटाइम (207 मिनट) दर्ज किया गया।
भविष्य की दिशा: तकनीकी सुधार और उपयोगकर्ता विश्वास
UPI की बढ़ती लोकप्रियता के साथ, सेवाओं की स्थिरता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करना आवश्यक है। NPCI और संबंधित बैंकों को तकनीकी बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और उपयोगकर्ताओं को निर्बाध सेवा प्रदान करने के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।