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RCB की ऐतिहासिक जीत बना मातम: चिन्नास्वामी स्टेडियम के बाहर भगदड़ में 11 की मौत, 33 घायल
रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) की 18 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद मिली पहली IPL ट्रॉफी की जीत का जश्न, एक दिल दहला देने वाले हादसे में बदल गया। बेंगलुरु के एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम और विधान सौधा के आसपास लाखों की भीड़ जुटने से भारी भगदड़ मच गई, जिसमें कम से कम 11 लोगों की मौत हो गई और 33 से अधिक लोग घायल हो गए।
News Tv India हिंदी Official | Verified Expert • 27 Mar, 2026Editor
Jun 5, 2025 • 6:57 AM
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RCB की ऐतिहासिक जीत बना मातम: चिन्नास्वामी स्टेडियम के बाहर भगदड़ में 11 की मौत, 33 घायल
रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) की 18 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद मिली पहली IPL ट्रॉफी की जीत का जश्न, एक दिल दहला देने वाले हादसे में बदल गया। बेंगलुरु के एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम और विधान सौधा के आसपास लाखों की भीड़ जुटने से भारी भगदड़ मच गई, जिसमें कम से कम 11 लोगों की मौत हो गई और 33 से अधिक लोग घायल हो गए।
Full Story: https://www.newstvindia.in/rcb-s-historic-win-leaves-11-dead-33-injured-in-stampede-outside-chinnaswamy-stadium
RCB की ऐतिहासिक जीत बना मातम: चिन्नास्वामी स्टेडियम के बाहर भगदड़ में 11 की मौत, 33 घायल
बेंगलुरु : रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) की 18 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद मिली पहली IPL ट्रॉफी की जीत का जश्न, एक दिल दहला देने वाले हादसे में बदल गया। बेंगलुरु के एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम और विधान सौधा के आसपास लाखों की भीड़ जुटने से भारी भगदड़ मच गई, जिसमें कम से कम 11 लोगों की मौत हो गई और 33 से अधिक लोग घायल हो गए।
यह हादसा उस वक्त हुआ जब प्रशंसक विराट कोहली और RCB की टीम को जीत का जश्न मनाते देखने के लिए उमड़ पड़े। पुलिस और प्रशासन ने करीब 2-3 लाख लोगों की भीड़ का अनुमान लगाया था, लेकिन ज़मीन पर 6 लाख से ज्यादा लोग पहुंचे, जिससे हालात बेकाबू हो गए।
कैसे और कहां से शुरू हुई भगदड़?
RCB ने 3 जून को नरेंद्र मोदी स्टेडियम, अहमदाबाद में पंजाब किंग्स को हराकर अपनी पहली IPL ट्रॉफी जीती थी। टीम की इस ऐतिहासिक जीत के बाद शहर भर में उत्साह चरम पर था। RCB ने एक ओपन-बस परेड और चिन्नास्वामी स्टेडियम में शाम 5 बजे एक भव्य जश्न की योजना बनाई थी। परेड को ट्रैफिक और सुरक्षा कारणों से पहले ही रद्द कर दिया गया था, लेकिन प्रशंसकों को समारोह की जानकारी मिल चुकी थी।
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कर्नाटक पुलिस ने पहले ही परेड को रद्द करते समय सार्वजनिक रूप से चेताया था कि इतनी बड़ी भीड़ को संभालना कठिन होगा। फिर भी स्टेडियम समारोह की इजाज़त दी गई। न पुलिस बल पर्याप्त था, न बैरिकेडिंग।
बारिश ने स्थिति और बिगाड़ दी। नम्मा मेट्रो ने कब्बन पार्क और डॉ. बी.आर. अंबेडकर स्टेशनों पर ट्रेनों को रोकना बंद कर दिया, जिससे हजारों लोग पैदल स्टेडियम की ओर बढ़े। पुलिस की मौजूदगी होते हुए भी भीड़ को नियंत्रित नहीं किया जा सका।
डिप्टी सीएम डी.के. शिवकुमार ने खुद माना, “हमने भीड़ को बहुत कम आंका था। यह हमारी जिम्मेदारी थी, और हम क्षमा चाहते हैं।”
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज़
घटना के तुरंत बाद यह मामला राजनीतिक रंग भी लेने लगा। बीजेपी ने कांग्रेस सरकार पर लापरवाही का आरोप लगाया। कर्नाटक बीजेपी अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र ने कहा, "सरकार ने बिना किसी योजना के इस आयोजन को मंजूरी दी। यह पूरी तरह प्रशासन की असफलता है।"
पूर्व मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई और केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने इस त्रासदी की उच्च स्तरीय जांच की मांग की। वहीं कांग्रेस ने इसे एक ‘दुर्भाग्यपूर्ण और अप्रत्याशित’ घटना बताया।
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा, "मैं इस पर राजनीति नहीं करना चाहता। हमने सभी जरूरी इंतज़ाम किए थे, लेकिन भीड़ उम्मीद से कई गुना ज़्यादा थी।"
सरकारी घोषणाएं और राहत कार्य
सरकार ने हादसे के तुरंत बाद राहत कार्य शुरू कर दिए। घायलों को बॉवरिंग, मणिपाल और वैदेही अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जिनमें से कई को गंभीर चोटें आई हैं। कुछ मरीजों को निमहंस में स्थानांतरित किया गया है।
मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजनों को ₹10 लाख मुआवजा और घायलों के मुफ्त इलाज की घोषणा की। KSCA ने भी ₹5 लाख की आर्थिक सहायता देने का ऐलान किया। स्टेडियम में चल रहा कार्यक्रम तुरंत रोक दिया गया और RCB ने प्रशंसकों से शांति बनाए रखने की अपील की।
BCCI और RCB दोनों ने हादसे पर गहरा दुख जताया और प्रशासन से भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए पुख्ता प्रबंधन सुनिश्चित करने को कहा।
सोशल मीडिया पर आक्रोश और सवाल
सोशल मीडिया पर प्रशंसकों ने RCB प्रबंधन, KSCA और प्रशासन पर कड़ी आलोचना की। एक यूजर ने ट्वीट किया, “1 परेड, 0 सुरक्षा और 11 शव। यह लापरवाही नहीं तो और क्या है?”
कई लोगों ने यह भी कहा कि प्रशंसकों को टिकट, समारोह स्थल और समय को लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई थी। इसके अलावा पर्याप्त पुलिस तैनाती और निकासी मार्गों का भी अभाव था।
आगे क्या?
सरकार ने इस घटना की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए हैं। पुलिस हादसे के सटीक कारणों की जांच कर रही है। साथ ही भीड़ नियंत्रण व्यवस्था, मेट्रो संचालन और आयोजकों की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं।
यह हादसा न केवल एक जश्न को मातम में बदल गया, बल्कि यह चेतावनी भी है कि सार्वजनिक आयोजनों में सुरक्षा और प्रबंधन की कितनी अहम भूमिका होती है।
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