'नक्सलवाद से विकासवाद' तक का सफर: पीएम मोदी ने 'बस्तर पंडुम' को सराहा, बोले— "बदल गई है बस्तर की पहचान"
छत्तीसगढ़ के बस्तर में 7-9 फरवरी तक 'बस्तर पंडुम' का आयोजन हुआ। पीएम मोदी और अमित शाह ने इसे बस्तर की नई पहचान और नक्सलवाद की समाप्ति का प्रतीक बताया।
नई दिल्ली : छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र की पहचान अब धीरे-धीरे एक नए रूप में उभर रही है। जिस बस्तर को लंबे समय तक माओवाद, हिंसा और पिछड़ेपन से जोड़कर देखा जाता था, वही बस्तर अब अपनी समृद्ध जनजातीय संस्कृति, परंपराओं और आत्मविश्वास के लिए देशभर में चर्चा का विषय बन रहा है। इसी बदलाव की एक बड़ी मिसाल है 'बस्तर पंडुम', जिसका आयोजन 7 से 9 फरवरी के बीच बड़े उत्साह और गरिमा के साथ किया गया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस आयोजन को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "7 से 9 फरवरी के बीच छत्तीसगढ़ में 'बस्तर पंडुम' का विशेष आयोजन किया गया। इस उत्सव के दौरान बस्तर की समृद्ध संस्कृति, परंपरा और जनजातीय विरासत का भव्य रूप दिखा। इस प्रयास से जुड़े अपने सभी परिवारजनों को मेरी हार्दिक बधाई। ऐसे आयोजन हमारी सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने और स्थानीय समुदायों को सशक्त बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं।"