"आदिवासी ही हमारे धर्म का मूल हैं", रांची में मोहन भागवत का बड़ा बयान; बोले- उपनिषद और आदिवासियों के विचार एक ही हैं
रांची पहुंचे आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि सनातन धर्म की उत्पत्ति जंगलों और कृषि पद्धतियों से हुई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन्हें आज आदिवासी कहा जाता है, वे ही वेदों और हिंदू धर्म के असली आधार हैं।
रांची : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत शनिवार को झारखंड की राजधानी रांची पहुंचे, जहां उन्होंने आदिवासी समुदाय के लोगों के साथ सीधी बातचीत की। यह कार्यक्रम कार्निवल बैंक्वेट हॉल में आयोजित किया गया। इस दौरान उन्होंने कहा कि जिन्हें आज आदिवासी कहा जाता है, वही हमारे धर्म के मूल हैं।
मोहन भागवत ने कहा कि विविधता में विद्यमान एकता हमारे पूर्वजों में निहित है। पूजा के अनगिनत रूप हो सकते हैं, और प्रत्येक आदर के योग्य है। सभी प्रकार की पूजा को स्वीकार करें और उनका सम्मान करें, यह मानते हुए कि वे सभी वैध हैं। अपनी पद्धति से पूजा करें। दूसरों की पूजा के तरीकों का भी सम्मान करें, उन्हें स्वीकार करें, और सद्भाव में एक साथ आगे बढ़ें। यही हमारे देश का स्वाभाविक सार है। आपको यह जानना चाहिए कि धर्म का सार प्रकृति के साथ जुड़ा हुआ है।