क्या इसके पीछे कोई वैज्ञानिक कारण है या सिर्फ पुरानी परंपरा? आइए जानते हैं।
केरोसिन एक रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पाद है। यह उस कच्चे तेल (Crude Oil) से बनता है जो धरती की सतह के हजारों फीट नीचे पाया जाता है।
चूंकि यह तेल चट्टानों, मिट्टी और जैविक अवशेषों के बीच से 'माइनिंग' करके निकाला जाता है, इसलिए आम भाषा में इसे 'मिट्टी के नीचे से निकलने वाला तेल' या 'मिट्टी का तेल' कहा जाने लगा।
पुराने समय में जब 'पेट्रोलियम' जैसे तकनीकी शब्द मशहूर नहीं थे, तब लोग चीजों का नाम उनके स्रोत (Source) के आधार पर रखते थे। कुओं और जमीन की खुदाई से निकलने के कारण यह नाम पक्का हो गया।
तकनीकी रूप से इसे कच्चे तेल के प्रभाजी आसवन (Fractional Distillation) द्वारा अलग किया जाता है। मिट्टी से निकलने के बाद इसे फैक्ट्रियों में शुद्ध किया जाता है।
बिजली आने से पहले केरोसिन ही रोशनी का सबसे बड़ा जरिया था। आज भी स्टोव और सफाई जैसे कई कामों में इसका इस्तेमाल बखूबी किया जाता है।