पीएम मोदी और राष्ट्रपति लूला के बीच फोन पर चर्चा, 'ग्लोबल साउथ' को मजबूत करने पर बनी सहमति; लूला ने ट्रंप की कार्यशैली पर उठाए सवाल
प्रधानमंत्री मोदी ने ब्राजील के राष्ट्रपति लूला दा सिल्वा से व्यापार, रक्षा और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में सहयोग पर बात की। इस दौरान राष्ट्रपति लूला ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 'सोशल मीडिया डिप्लोमेसी' पर तीखा कटाक्ष भी किया।
दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा से टेलीफोन पर बात की। दोनों नेताओं ने भारत-ब्राजील रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने और आने वाले वर्ष में इसे और ऊंचाइयों तक ले जाने की प्रतिबद्धता दोहराई।
पिछले साल ब्रासीलिया और दक्षिण अफ्रीका में हुई बैठकों को याद करते हुए दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय सहयोग के विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण प्रगति पर संतोष व्यक्त किया, जिसमें व्यापार और निवेश, प्रौद्योगिकी, रक्षा, ऊर्जा, स्वास्थ्य, कृषि और जनसम्पर्क शामिल हैं।
दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचार साझा किए और साझा चुनौतियों के समाधान में बेहतर बहुपक्षीय व्यवस्था के महत्व को रेखांकित किया।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वह राष्ट्रपति लूला का भारत में जल्द स्वागत करने के लिए उत्सुक हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट कर ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा से टेलीफोन पर हुई बातचीत की जानकारी दी।
पीएम मोदी ने कहा कि राष्ट्रपति लूला से बात करके खुशी हुई। हमने भारत-ब्राजील रणनीतिक साझेदारी में मजबूती और गतिशीलता की समीक्षा की, जो आने वाले वर्ष में नई ऊंचाइयों तक पहुंचने की तैयारी में है। उन्होंने आगे कहा कि हमारा घनिष्ठ सहयोग ग्लोबल साउथ के साझा हितों को आगे बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण है। मैं उनका जल्द ही भारत में स्वागत करने के लिए उत्सुक हूं।
इससे पहले ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा ने सोशल मीडिया के माध्यम से दुनिया पर राज करने के प्रयास के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आलोचना की। शिन्हुआ समाचार एजेंसी के अनुसार, उन्होंने एक कार्यक्रम में कहा कि क्या आपने गौर किया है कि ट्रंप ट्विटर (एक्स) के जरिए दुनिया पर राज करना चाहते हैं?
उन्होंने आगे कहा कि वह हर दिन कुछ अलग-अलग कहते हैं। यह संभव नहीं है। क्या आपको लगता है कि अगर हम लोगों की आंखों में आंखें डालकर बात न करें तो उनके साथ सम्मानपूर्वक व्यवहार करना संभव है? क्या उनके इंसान की बजाय वस्तु समझना संभव है?