ईरान परमाणु कार्यक्रम: अमेरिका की शर्त – पहले होर्मुज स्ट्रेट खोलो, फिर होगी 'गंभीर बातचीत'
अमेरिका ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर 'बहुत गंभीर बातचीत' के लिए होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने की शर्त रखी है। विदेश मंत्री रुबियो ने नई दिल्ली में यह बात कही।
News Tv India हिंदी Official | Verified Expert • 27 Mar, 2026Editor
May 25, 2026 • 10:48 AM | वाशिंगटन
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ईरान परमाणु कार्यक्रम: अमेरिका की शर्त – पहले होर्मुज स्ट्रेट खोलो, फिर होगी 'गंभीर बातचीत'
अमेरिका ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर 'बहुत गंभीर बातचीत' के लिए होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने की शर्त रखी है। विदेश मंत्री रुबियो ने नई दिल्ली में यह बात कही।
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ईरान परमाणु कार्यक्रम: अमेरिका की शर्त – पहले होर्मुज स्ट्रेट खोलो, फिर होगी 'गंभीर बातचीत'
Key Highlights
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने ईरान से होर्मुज स्ट्रेट को तुरंत खोलने की मांग की है।
स्ट्रेट खुलने के बाद ही अमेरिका ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर 'गंभीर बातचीत' के लिए तैयार होगा।
वार्ता दो महीने में विफल रहने पर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के पास सभी विकल्प खुले रहेंगे।
वाशिंगटन : अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि यदि ईरान होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोल देता है, तो अमेरिका उसके परमाणु कार्यक्रम पर 'बहुत गंभीर बातचीत' करने के लिए तैयार है। यह बयान नई दिल्ली की यात्रा के दौरान एक अखबार को दिए गए इंटरव्यू में सामने आया, जिसे न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के हवाले से सिन्हुआ न्यूज एजेंसी ने प्रसारित किया है।
रुबियो के इन बयानों से संकेत मिलता है कि वाशिंगटन चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ सकता है। वह एक ऐसे अंतरिम समझौते को स्वीकार करने पर विचार कर सकता है, जिसमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम का मुद्दा तुरंत पूरी तरह से हल न हो।
परमाणु समझौते की शर्तें और समय-सीमा
रुबियो ने कहा कि 72 घंटों के भीतर किसी कागज पर जल्दी-जल्दी परमाणु समझौता नहीं किया जा सकता। उन्होंने बातचीत के लिए कुछ प्रमुख शर्तें रखीं:
इसके बाद, तय नियमों के तहत यूरेनियम संवर्धन, अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम और ईरान के इस वादे पर गंभीर बातचीत होगी कि वह कभी परमाणु हथियार नहीं बनाएगा।
विदेश मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि इन तकनीकी मामलों को सुलझाने में वर्षों नहीं लगने चाहिए, लेकिन थोड़ा समय जरूर लगेगा। उन्होंने एक समय-सीमा का भी संकेत दिया। यदि बातचीत अगले दो महीनों में किसी नतीजे तक नहीं पहुंची, तो अमेरिका फिर से ईरान पर हमले की धमकी दे सकता है। रुबियो ने कहा, “आखिरकार, इस प्रक्रिया से वही नतीजा निकलना चाहिए जो हम चाहते हैं। अगर ऐसा नहीं होता, तो राष्ट्रपति के पास 60 दिनों बाद भी वही सभी विकल्प होंगे जो आज उनके पास हैं।”
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💡 Did You Know? होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग में से एक है, जिससे वैश्विक तेल व्यापार का लगभग एक-पांचवां हिस्सा गुजरता है। इस पर ईरान का नियंत्रण विवाद का एक प्रमुख बिंदु रहा है।
डोनाल्ड ट्रंप का स्पष्ट रुख और आलोचकों की चिंताएं
अब तक न तो अमेरिका और न ही ईरान ने सार्वजनिक रूप से इस संभावित समझौते की पूरी जानकारी दी है। कई आलोचकों का मानना है कि ऐसा चरणबद्ध समझौता आगे की बातचीत में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पकड़ कमजोर कर सकता है।
रुबियो ने इस बात पर फिर जोर दिया कि ट्रंप का साफ मानना है कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार नहीं रख सकता। उन्होंने कहा कि ईरान के मुद्दे पर शायद आज बाद में कुछ और खबर सामने आएगी, जिसकी घोषणा राष्ट्रपति खुद करेंगे। रुबियो ने महत्वपूर्ण प्रगति का संकेत दिया, हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अभी अंतिम समझौता नहीं हुआ है। उन्होंने दोहराया, “आखिरकार हमारा लक्ष्य यही है कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार हासिल न कर सके। राष्ट्रपति ने यह बात बिल्कुल साफ कर दी है कि जब तक डोनाल्ड ट्रंप राष्ट्रपति हैं, ईरान परमाणु हथियार नहीं रख पाएगा।”
होर्मुज स्ट्रेट पर अमेरिका और सहयोगियों का प्रस्ताव
अमेरिकी विदेश मंत्री ने यह भी बताया कि अमेरिका और खाड़ी क्षेत्र के उसके सहयोगी ऐसे प्रस्ताव पर काम कर रहे हैं, जिससे होर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह खुला रहे और वहां किसी तरह का टोल न लिया जाए। हालांकि, इसके लिए यह जरूरी होगा कि ईरान इस प्रस्ताव को पूरी तरह स्वीकार करे और लागू भी करे। यह घटनाक्रम क्षेत्र में तनाव कम करने और एक स्थायी समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।