“24 घंटे में दूसरी मुलाकात: दिल्ली में सोनिया गांधी से मिलीं ममता बनर्जी, बंगाल में हार के बीच विपक्षी एकजुटता की चर्चाएं तेज”
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10 June 2026
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24 घंटे में दूसरी मुलाकात: दिल्ली में सोनिया गांधी से मिलीं ममता बनर्जी, बंगाल में हार के बीच विपक्षी एकजुटता की चर्चाएं तेज
नई दिल्ली : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हालिया नतीजों के बाद तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की प्रमुख और पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इन दिनों राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में हैं। इस दौरे के दौरान, मंगलवार को उन्होंने कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी से उनके आवास, 10 जनपथ पर मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच करीब एक घंटे तक चली इस बातचीत ने राजनीतिक गलियारों में अटकलों का बाजार गर्म कर दिया है।
यह मुलाकात विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह 24 घंटे के भीतर ममता बनर्जी और सोनिया गांधी के बीच दूसरी बार हुई है। इससे पहले, सोमवार को 'इंडिया' गठबंधन की बैठक में भी दोनों नेताओं ने एक-दूसरे से मुलाकात की थी, जहाँ उनके बीच गर्मजोशी भरे पल भी देखे गए थे।
राजनीतिक संकट के बीच अहम मुलाकात
ममता बनर्जी का यह दिल्ली दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब टीएमसी एक महत्वपूर्ण राजनीतिक चुनौती का सामना कर रही है। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद पार्टी के भीतर असंतोष की खबरें सामने आ रही हैं। कुछ विधायकों के असंतोष के साथ-साथ, हाल ही में कुछ सांसदों द्वारा राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) को समर्थन देने की घोषणा ने पार्टी नेतृत्व की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
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दिल्ली पहुंचने पर, ममता बनर्जी ने सबसे पहले आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से मुलाकात की थी। इसके बाद सोनिया गांधी के साथ उनकी मुलाकात को देश की विपक्षी राजनीति के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण घटना माना जा रहा है।
💡 क्या आप जानते हैं? ममता बनर्जी ने 1998 में कांग्रेस से अलग होकर तृणमूल कांग्रेस की स्थापना की थी, और 2011 में कांग्रेस के साथ मिलकर उन्होंने पश्चिम बंगाल में वाम मोर्चा की सरकार को हराया था।
विपक्षी एकता पर जोर
सूत्रों के अनुसार, 'इंडिया' गठबंधन की हालिया बैठक के दौरान, ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाए थे। उन्होंने अन्य विपक्षी दलों से एकजुट रहने की पुरजोर अपील की थी और कहा था कि आने वाले समय में लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए विपक्षी एकता अत्यंत आवश्यक है।
टीएमसी और कांग्रेस के बीच ऐतिहासिक संबंध हमेशा उतार-चढ़ाव भरे रहे हैं। 1998 में ममता बनर्जी द्वारा कांग्रेस से अलग होकर तृणमूल कांग्रेस की स्थापना के बाद, दोनों दलों ने 2011 में मिलकर वाम मोर्चा को सत्ता से बेदखल किया था। हालांकि, बाद में उनके रिश्तों में खटास आ गई और कांग्रेस के कई नेता व विधायक टीएमसी में शामिल हो गए।
वर्तमान परिदृश्य में, पश्चिम बंगाल में टीएमसी की स्थिति को देखते हुए, कांग्रेस को राज्य में अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन को फिर से हासिल करने का एक अवसर दिखाई दे रहा है।