एनसीबी महानिदेशक अनुराग गर्ग की अमृतसर सरपंचों के साथ बैठक; नशे के खिलाफ सामूहिक जंग का आह्वान
नई दिल्ली : नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) के महानिदेशक अनुराग गर्ग ने पंजाब के अमृतसर जिले के सीमावर्ती गांवों के सरपंचों से बातचीत की और नशा तस्करी व मादक पदार्थों के दुरुपयोग के खिलाफ अभियान को मजबूत करने के लिए उनका सक्रिय सहयोग मांगा।
बातचीत के दौरान अनुराग गर्ग ने कहा कि नशे की समस्या से निपटने के लिए पूरे समाज को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने कहा कि स्थानीय लोग तस्करी रोकने और युवाओं को नशे से बचाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
उन्होंने गांव के बुजुर्गों और समुदाय के नेताओं से अपील की कि वे युवाओं को नशे से दूर रखें और उन्हें खेलकूद व अन्य सकारात्मक गतिविधियों में भाग लेने के लिए प्रेरित करें। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जागरूकता, रोकथाम और पुनर्वास से जुड़ी सामुदायिक पहल में एनसीबी पूरा सहयोग देगा।
ग्रामीणों से मुलाकात के दौरान गर्ग ने सरपंचों से कहा कि वे ड्रग्स तस्करी की सूचना देने और पुनर्वास से जुड़ी मदद के लिए ‘मानस’ हेल्पलाइन (1933) का प्रचार-प्रसार करें और इसका उपयोग बढ़ाएं।
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यह पहल एनसीबी की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत सीमावर्ती इलाकों में जमीनी स्तर पर सहयोग मजबूत किया जा रहा है। ये इलाके सीमा पार से होने वाली ड्रग्स तस्करी के लिहाज से संवेदनशील माने जाते हैं।
इससे पहले गर्ग ने नई दिल्ली में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में हिस्सा लिया, जहां उन्होंने ड्रग्स तस्करी पर लगाम लगाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित नई तकनीकों की समीक्षा की। अधिकारियों ने उन्हें आधुनिक तकनीकी उपकरणों के बारे में जानकारी दी, जो तस्करी नेटवर्क की पहचान और निगरानी में मदद कर सकते हैं।
एक अलग संदेश में गर्ग ने कहा कि एनसीबी देश में नशा तस्करी और मादक पदार्थों के दुरुपयोग को खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि एजेंसी खुफिया जानकारी जुटाने, कार्रवाई करने, पुनर्वास में सहयोग देने और जागरूकता फैलाने जैसे कई स्तरों पर काम करती है।
उन्होंने कहा कि एनसीबी केंद्र और राज्य एजेंसियों के बीच समन्वय मजबूत करने के साथ अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ भी सहयोग कर रही है, ताकि भारत की सीमाएं अवैध ड्रग्स तस्करी से सुरक्षित रहें।
गर्ग ने कहा कि हाल के वर्षों में एनसीबी ने सख्त कार्रवाई, बेहतर तालमेल और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से ड्रग्स से जुड़े अपराधों पर काफी हद तक अंकुश लगाया है। इस लड़ाई की सफलता कानून प्रवर्तन एजेंसियों, समाज और आम जनता की सामूहिक जिम्मेदारी पर निर्भर करती है।