टीएमसी का भाजपा पर तीखा हमला: ईंधन की कीमतें, डिटेंशन सेंटर और भ्रष्टाचार पर सांसदों ने घेरा
टीएमसी सांसद बाबुल सुप्रियो ने भाजपा पर ईंधन की कीमतों को लेकर 'डबल इंजन' के वादे तोड़ने का आरोप लगाया। काकोली घोष दस्तीदार ने भी अपनी बात रखी।
News Tv India हिंदी Official | Verified Expert • 27 Mar, 2026Editor
May 25, 2026 • 9:02 PM | कोलकाता
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टीएमसी का भाजपा पर तीखा हमला: ईंधन की कीमतें, डिटेंशन सेंटर और भ्रष्टाचार पर सांसदों ने घेरा
टीएमसी सांसद बाबुल सुप्रियो ने भाजपा पर ईंधन की कीमतों को लेकर 'डबल इंजन' के वादे तोड़ने का आरोप लगाया। काकोली घोष दस्तीदार ने भी अपनी बात रखी।
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टीएमसी सांसद बाबुल सुप्रियो ने भाजपा पर पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों को लेकर 'कथनी और करनी में अंतर' का आरोप लगाया।
सुप्रियो ने 'डिटेंशन सेंटर' को लेकर भी भाजपा सरकार पर निशाना साधा और मतदाता सूची से हटाए गए 27 लाख लोगों पर सवाल उठाए।
टीएमसी सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने पार्टी में अपनी 40 साल की यात्रा, केंद्रीय सुरक्षा और पश्चिम बंगाल में कथित भ्रष्टाचार पर अपनी राय व्यक्त की।
टीएमसी सांसद बाबुल सुप्रियो का भाजपा पर तीखा हमला: 'कथनी और करनी में अंतर'
कोलकाता : तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद बाबुल सुप्रियो ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की कथनी और करनी के बीच बड़े अंतर को लेकर तीखा हमला बोला है। उन्होंने विशेष रूप से पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों को लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साधा। सुप्रियो ने याद दिलाया कि 'डबल इंजन सरकार' ने वादा किया था कि ईंधन की कीमतें कम की जाएंगी, लेकिन ऐसा हुआ नहीं।
कोलकाता में आईएएनएस से बातचीत के दौरान बाबुल सुप्रियो ने कहा कि जब सुवेंदु अधिकारी विपक्ष में थे, तब उन्होंने भी डबल इंजन सरकार बनने पर पेट्रोल की कीमतें घटने की बात कही थी। हालांकि, स्थिति अब उलट है, दिल्ली और बंगाल में पेट्रोल की कीमतों में 11 रुपये से अधिक का अंतर देखा जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि चुनाव के बाद ऐसा क्यों हो रहा है, जब एलपीजी, डीजल और पेट्रोल के दाम बढ़ रहे हैं, जबकि कच्चे तेल की कीमतें कम हुई हैं।
सुप्रियो ने लोगों की ओर से सरकार से अपने वादों से न मुकरने का आग्रह किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि पेट्रोल-डीजल के दामों को लेकर सरकार को कुछ ठोस कदम उठाने चाहिए।
बाबुल सुप्रियो ने मतदाता सूची और 'डिटेंशन सेंटर' के मुद्दे पर भी भाजपा को घेरा। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि यह कोई 'होल्डिंग सेंटर' नहीं, बल्कि 'डिटेंशन सेंटर' है, सरकार ने बस इसका नाम बदल दिया है।
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उन्होंने सरकार से सवाल किया कि मतदाता सूची से हटाए गए 27 लाख लोगों में से बांग्लादेशियों और रोहिंग्याओं के नाम बताए जाएं। सुप्रियो ने पूछा कि क्या इन लोगों को भी डिटेंशन सेंटर में डाल दिया जाएगा।
काकोली घोष दस्तीदार ने पार्टी में अपनी लंबी यात्रा और चुनौतियां बताईं
दूसरी ओर, टीएमसी सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने आईएएनएस से बात करते हुए पार्टी के प्रति अपनी दशकों पुरानी प्रतिबद्धता को उजागर किया। उन्होंने बताया कि वह 40 साल से इस पार्टी से जुड़ी हुई हैं, यहां तक कि तब भी जब पार्टी सत्ता में नहीं थी और लोगों को सड़कों पर पीटा जाता था।
घोष दस्तीदार ने कहा कि उन्होंने बहुत बुरा दौर देखने के बाद पार्टी में काम करना शुरू किया और लगभग 20 साल बाद पार्टी सत्ता में आई। उन्होंने उन लोगों पर कटाक्ष किया जो 'अच्छे समय में' पार्टी में शामिल हुए हैं, यह कहते हुए कि वे कुछ हासिल करने के लिए आए हैं और उन्होंने पार्टी को एक अच्छी जगह पर पहुंचाने के लिए कड़ी मेहनत नहीं की है। उन्होंने अपनी मेहनत और पार्टी को इस मुकाम तक लाने में अपनी भूमिका पर जोर दिया।
सुरक्षा और भ्रष्टाचार पर काकोली घोष दस्तीदार के विचार
केंद्र द्वारा सुरक्षा दिए जाने के मुद्दे पर सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने कहा कि देश के हर नागरिक को सुरक्षित रखना सरकार का काम है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सभी आम लोग समान हैं, कोई किसी से ऊपर या नीचे नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर किसी नागरिक को लगता है कि वह सुरक्षित नहीं है या उसके घर पर हमला होता है और उसकी जमीन छीनने की धमकी दी जाती है, तो उसे सुरक्षा देना देश का कर्तव्य बन जाता है। इसीलिए उन्हें सुरक्षा दी गई है।
आरजीकर मामले पर उन्होंने बताया कि इस मामले को फिर से खोल दिया गया है और सुवेंदु अधिकारी इस मामले को देख रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि वह किसी भी विचाराधीन मामले पर टिप्पणी नहीं करना चाहतीं।
पश्चिम बंगाल में भ्रष्टाचार के मुद्दे पर घोष दस्तीदार ने स्वीकार किया कि पंचायत स्तर पर या पार्षद स्तर पर कुछ गड़बड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा न होता तो मतदाता इतने नाराज क्यों होते।
चुनावी नतीजों और सहनशीलता पर सांसद काकोली घोष दस्तीदार
टीएमसी सांसद ने सहनशीलता के महत्व पर भी बात की। उन्होंने कहा कि सहनशीलता इंसान को ऊंचाइयों पर ले जाती है। जितना अधिक कोई सहन करता है, उतनी ही ऊंचाइयों पर पहुंचता है। उनका मानना है कि यदि किसी का मकसद लोगों, देश या किसी खास परियोजना के लिए काम करना है, तो उसे अपने आस-पास हो रही नकारात्मक बातों को भूल जाना चाहिए।
हाल ही में आए चुनावी नतीजों पर उन्होंने उस एजेंसी को जिम्मेदार ठहराया, जिसके काम करने का तरीका गलत था। उन्होंने दुख व्यक्त किया कि हजार बार कोशिश करने के बाद भी उनके इलाके की 7 में से 5 सीटें वे हार गए। इसी कारण उन्होंने जिला पदाधिकारी पद से इस्तीफा दे दिया।