लुधियाना: निजी स्कूलों की मनमानी पर शिक्षा विभाग सख्त, 1 अप्रैल से पहले नया सत्र शुरू करने पर रोक

लुधियाना शिक्षा विभाग ने निजी स्कूलों को 1 अप्रैल से पहले सत्र शुरू करने से मना किया है और किताबों-वर्दी की मनमानी पर रोक लगाई है।

Mar 8, 2026 - 07:23
लुधियाना: निजी स्कूलों की मनमानी पर शिक्षा विभाग सख्त, 1 अप्रैल से पहले नया सत्र शुरू करने पर रोक
लुधियाना: निजी स्कूलों की मनमानी पर शिक्षा विभाग सख्त, 1 अप्रैल से पहले नया सत्र शुरू करने पर रोक

लुधियाना: नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ ही निजी स्कूलों की मनमानी और अभिभावकों के आर्थिक शोषण की खबरें फिर से गरम हैं। इस बार लुधियाना जिला शिक्षा विभाग ने कड़ा रुख अपनाते हुए निजी स्कूलों को स्पष्ट चेतावनी जारी की है। विभाग ने आदेश दिया है कि कोई भी निजी स्कूल 1 अप्रैल से पहले नया सत्र (New Session) शुरू नहीं करेगा।

मार्च में पढ़ाई शुरू करने पर पाबंदी

अक्सर देखा जाता है कि कई निजी स्कूल मार्च के महीने में ही पुरानी कक्षाएं खत्म कर बच्चों को अगली क्लास की पढ़ाई के लिए बुलाना शुरू कर देते हैं। इस साल सीबीएसई (CBSE) और जिला शिक्षा विभाग ने इसे गंभीरता से लिया है। जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) डिंपल मदान ने लिखित आदेश जारी कर कहा है कि चाहे स्कूल किसी भी बोर्ड से जुड़ा हो, उसे सरकारी नियमों का पालन करना होगा। अब विद्यार्थियों को केवल 1 अप्रैल से ही स्कूल बुलाया जा सकेगा।

किताबों और वर्दी के 'कमीशन खेल' पर नकेल

शिक्षा विभाग ने स्कूलों और पब्लिशर्स के बीच चलने वाले कमीशन के खेल को रोकने के लिए सख्त निर्देश दिए हैं। विभाग ने सभी स्कूलों को केवल 3 दिन का समय दिया है ताकि वे अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर किताबों और वर्दी की पूरी सूची अपलोड करें।

  • पारदर्शिता: वेबसाइट पर किताब का नाम, लेखक और प्रकाशक का विवरण देना अनिवार्य होगा।

  • खरीद की आजादी: अभिभावक अपनी मर्जी और बजट के अनुसार खुले बाजार से किताबें खरीदने के लिए स्वतंत्र होंगे। स्कूल किसी खास दुकान से सामान लेने के लिए दबाव नहीं बना सकेंगे।

  • वर्दी की मोनोपॉली: स्कूल हर साल वर्दी का डिजाइन या लोगो बदलकर अभिभावकों पर नए सेट खरीदने का दबाव नहीं डाल पाएंगे।

गैर-जरूरी किताबों का बढ़ता बोझ

अभिभावकों की एक बड़ी शिकायत यह भी है कि स्कूल मुख्य विषयों के अलावा ऐसी कई महंगी किताबें अनिवार्य कर देते हैं जिनका सिलेबस से सीधा संबंध नहीं होता। छठी कक्षा के बच्चों के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, फाइनेंशियल लिटरेसी और मार्केटिंग जैसी भारी-भरकम किताबें लगाई जा रही हैं। आरोप है कि इन किताबों की बिक्री होने के बाद पूरे साल इनसे कोई ठोस पढ़ाई नहीं करवाई जाती, जिससे केवल अभिभावकों की जेब पर बोझ बढ़ता है।

स्कूल परिसर में बिक्री पर रहेगी नजर

शिक्षा विभाग को शिकायतें मिली हैं कि कई स्कूल परिसर के भीतर ही काउंटर लगाकर ऊंची कीमतों पर किताबें और वर्दी बेच रहे हैं। डी.ई.ओ. ने साफ किया है कि स्कूल के अंदर ऐसी व्यावसायिक गतिविधियां बर्दाश्त नहीं की जाएंगी। नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

अभिभावकों का कहना है कि विभाग के ये आदेश कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि जमीन पर भी लागू हों ताकि उन्हें निजी स्कूलों की लूट से राहत मिल सके।

News Tv India हिंदी News Tv India डेस्क प्रतिष्ठित पत्रकारों की पहचान है। इससे कई पत्रकार देश-दुनिया, खेल और मनोरंजन जगत की खबरें साझा करते हैं।