पीएम मोदी की यूरोप यात्रा: फ्रांस, स्लोवाकिया और जी-7 शिखर सम्मेलन में भारत की रणनीतिक भूमिका
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फ्रांस और स्लोवाकिया की बहुप्रतीक्षित यात्रा पर रवाना होंगे, जहां रक्षा सहयोग, नवाचार और वैश्विक साझेदारी पर चर्चा होगी।
News Tv India हिंदी Official | Verified Expert • 27 Mar, 2026Editor
Jun 13, 2026 • 11:53 AM | नई दिल्ली
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पीएम मोदी की यूरोप यात्रा: फ्रांस, स्लोवाकिया और जी-7 शिखर सम्मेलन में भारत की रणनीतिक भूमिका
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फ्रांस और स्लोवाकिया की बहुप्रतीक्षित यात्रा पर रवाना होंगे, जहां रक्षा सहयोग, नवाचार और वैश्विक साझेदारी पर चर्चा होगी।
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नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को फ्रांस और स्लोवाकिया की दो देशों की महत्वपूर्ण यात्रा पर रवाना होंगे। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य भारत की रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करना और वैश्विक मंच पर देश की बढ़ती भूमिका को स्थापित करना है। इस दौरान फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ होने वाली वार्ता में रक्षा सहयोग प्रमुख विषय रहने की संभावना है, जो भारत की सैन्य क्षमताओं को सुदृढ़ करने के प्रयासों के बीच अत्यंत महत्वपूर्ण है।
भारत लगातार महत्वपूर्ण समुद्री क्षेत्रों में बढ़ती रणनीतिक प्रतिस्पर्धा का सामना कर रहा है। ऐसे में अपनी सैन्य क्षमताओं को मजबूत करना देश की शीर्ष प्राथमिकताओं में से एक है। इसी पृष्ठभूमि में, दोनों नेताओं के बीच रक्षा साझेदारी को और सुदृढ़ करने पर विशेष चर्चा होने की उम्मीद है। यह वार्ता न केवल द्विपक्षीय संबंधों को गहरा करेगी, बल्कि क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा में भारत के योगदान को भी बल प्रदान करेगी।
फ्रांस के साथ मजबूत होते संबंध: रक्षा और नवाचार पर जोर
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के निमंत्रण पर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 13-14 जून को फ्रांस के नीस शहर की आधिकारिक यात्रा करेंगे। यह यात्रा दोनों देशों के बीच लंबे समय से चली आ रही रणनीतिक साझेदारी को एक नई दिशा देगी। इसके बाद वे 16-19 जून के दौरान एवियां और पेरिस जाएंगे, जहां कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में उनकी भागीदारी सुनिश्चित है।
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14 जून को नीस में प्रधानमंत्री मोदी राष्ट्रपति मैक्रों के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। इस उच्च-स्तरीय बैठक में दोनों नेता भारत-फ्रांस संबंधों के सभी पहलुओं की व्यापक समीक्षा करेंगे। इसमें व्यापार, निवेश, संस्कृति और लोगों से लोगों के बीच संपर्क जैसे विषय शामिल होंगे।
विदेश मंत्रालय (एमईए) के अनुसार, दोनों नेता संयुक्त रूप से ‘भारत इनोवेट्स’ कार्यक्रम का उद्घाटन भी करेंगे। यह एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसमें भारत, फ्रांस और अन्य कई देशों के प्रमुख स्टार्टअप्स तथा वेंचर कैपिटल फंड भाग लेंगे। यह कार्यक्रम नवाचार और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देने के लिए एक मंच प्रदान करेगा। विदेश मंत्रालय ने इस संदर्भ में कहा है कि “भारत-फ्रांस नवाचार वर्ष के दौरान आयोजित किया जा रहा यह प्रमुख कार्यक्रम दोनों देशों के बीच मौजूद सशक्त नवाचार साझेदारी को और मजबूत करेगा।”
अपनी फ्रांस यात्रा के बाद, प्रधानमंत्री मोदी 14 से 16 जून तक अपने स्लोवाकियाई समकक्ष रॉबर्ट फिको के निमंत्रण पर स्लोवाकिया की राजकीय यात्रा करेंगे। यह यात्रा ऐतिहासिक महत्व रखती है, क्योंकि 1993 में स्वतंत्रता प्राप्त करने के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यह स्लोवाकिया की पहली यात्रा होगी। यह दौरा दोनों देशों के बीच संबंधों में एक नए अध्याय की शुरुआत करेगा।
इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और रॉबर्ट फिको के बीच गहन वार्ता होगी। इसमें सहयोग के नए क्षेत्रों की संभावनाओं पर चर्चा की जाएगी, जिससे द्विपक्षीय संबंध और मजबूत हो सकें। प्रधानमंत्री मोदी स्लोवाकिया के राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रिनी से भी मुलाकात करेंगे, जिससे उच्च-स्तरीय राजनीतिक संवाद को बढ़ावा मिलेगा।
विदेश मंत्रालय ने इस यात्रा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा, “यह यात्रा व्यापार, निवेश, ऑटोमोबाइल और रेलवे विनिर्माण सहित विभिन्न क्षेत्रों में स्लोवाकिया के साथ भारत के द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता को पुनः रेखांकित करेगी।” यह दौरा पूर्वी यूरोप में भारत की पहुंच और आर्थिक साझेदारी को विस्तार देने का एक महत्वपूर्ण अवसर है।
जी-7 शिखर सम्मेलन में भारत की वैश्विक आवाज
अपनी यूरोप यात्रा के तीसरे चरण में, प्रधानमंत्री मोदी 16-17 जून को एवियां में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए पुनः फ्रांस लौटेंगे। यह वैश्विक मंच भारत को दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के नेताओं के साथ सीधे संवाद करने का अवसर प्रदान करेगा। सम्मेलन के दौरान वे जी-7 देशों के नेताओं के अलावा आमंत्रित साझेदार देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के नेताओं के साथ विभिन्न वैश्विक मुद्दों पर विचार-विमर्श करेंगे।
इन चर्चाओं में जलवायु परिवर्तन, वैश्विक स्वास्थ्य, आर्थिक स्थिरता और भू-राजनीतिक चुनौतियाँ शामिल होने की संभावना है। जी-7 में भारत की उपस्थिति वैश्विक दक्षिण की एक प्रमुख आवाज और वैश्विक चुनौतियों के समाधान में एक महत्वपूर्ण भागीदार के रूप में भारत की बढ़ती भूमिका को दर्शाती है।
पेरिस में तकनीक और भारतीय समुदाय से संवाद
18 जून को प्रधानमंत्री मोदी अपनी यात्रा के अंतिम चरण के लिए पेरिस जाएंगे। यहां वे कई द्विपक्षीय बैठकों में भाग लेंगे और यूरोप के सबसे बड़े प्रौद्योगिकी एवं स्टार्टअप कार्यक्रम विवाटेक शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे। यह कार्यक्रम भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम और प्रौद्योगिकी क्षेत्र के लिए नए अवसर खोलेगा।
पेरिस में भारतीय समुदाय के सदस्यों को संबोधित करने की भी उनकी संभावना है। ऐसे संवाद प्रवासी भारतीयों के साथ संबंधों को मजबूत करने और उन्हें देश के विकास में भागीदार बनाने के लिए महत्वपूर्ण होते हैं।
विदेश मंत्रालय ने अपनी टिप्पणी में कहा, “प्रधानमंत्री की आगामी यूरोप यात्रा फ्रांस, स्लोवाकिया और जी-7 देशों के साथ भारत की साझेदारी को और गहरा करेगी। जी-7 में प्रधानमंत्री की उपस्थिति वैश्विक दक्षिण की एक प्रमुख आवाज और वैश्विक चुनौतियों के समाधान में एक महत्वपूर्ण भागीदार के रूप में भारत की बढ़ती भूमिका को दर्शाती है।” यह यात्रा भारत की वैश्विक कूटनीति में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगी।