“US Iran Conflict: होर्मुज में जहाजों पर फायरिंग के बाद अमेरिका का ईरान पर नया हमला, 24 घंटे में तीसरी स्ट्राइक”
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13 July 2026
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US Iran Conflict: होर्मुज में जहाजों पर फायरिंग के बाद अमेरिका का ईरान पर नया हमला, 24 घंटे में तीसरी स्ट्राइक
अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। होर्मुज स्ट्रेट में कमर्शियल जहाजों पर ईरानी बलों की कथित फायरिंग के बाद अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ नए सैन्य हमले शुरू किए हैं।
अमेरिका का कहना है कि इस कार्रवाई का मकसद ईरान की उन सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना है, जिनका इस्तेमाल रणनीतिक समुद्री मार्ग से गुजरने वाले नागरिक नाविकों और कमर्शियल जहाजों को निशाना बनाने में किया जा सकता है।
ताजा घटनाक्रम ने अमेरिका और ईरान के बीच पहले से नाजुक संघर्ष विराम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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अमेरिकी सेना के मुताबिक कमांडर इन चीफ के निर्देश पर ईरानी बलों को जवाबदेह ठहराने के लिए यह कार्रवाई की गई है।
24 घंटे में ईरानी ठिकानों पर तीसरी अमेरिकी स्ट्राइक
अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 24 घंटे के भीतर ईरानी ठिकानों पर यह तीसरी अमेरिकी स्ट्राइक थी।
ताजा हमलों का फोकस होर्मुज स्ट्रेट के आसपास और ईरान के तटीय क्षेत्रों में मौजूद सैन्य ठिकानों पर रहा। रिपोर्ट्स में ईरानी मिसाइल और एयर डिफेंस सिस्टम के साथ IRGC की छोटी नौकाओं को निशाना बनाए जाने की बात कही गई है।
अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि यह कार्रवाई कमर्शियल शिपिंग की सुरक्षा से जुड़ी है।
Strait of Hormuz में कमर्शियल जहाजों पर फायरिंग का दावा
CENTCOM के प्रवक्ता कैप्टन टिम हॉकिन्स के अनुसार, लगभग इसी दौरान ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC ने समुद्री मार्ग से गुजर रहे नागरिक जहाजों पर फायरिंग की।
अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिकी एयरक्राफ्ट ने एक ईरानी क्रूज मिसाइल और एक वन-वे अटैक ड्रोन को भी मार गिराया।
हॉकिन्स ने कहा कि अमेरिका ईरान को इन कार्रवाइयों के लिए जवाबदेह ठहरा रहा है।
ईरान के चार इलाकों में धमाकों की खबर
ईरान के सरकारी मीडिया ने दक्षिणी होर्मोजगान प्रांत के जस्क, केशम, बंदर अब्बास और सिरिक में धमाकों की जानकारी दी है।
शुरुआती रिपोर्ट्स में नागरिक मौतों या घरों और दुकानों को बड़े नुकसान की पुष्टि नहीं हुई थी। हालांकि सैन्य कार्रवाई के वास्तविक प्रभाव का आकलन अभी जारी है।
ईरान की ओर से अमेरिकी हमलों की निंदा की गई है।
3 रातों में 300 से ज्यादा सैन्य ठिकानों पर हमले का दावा
अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का दायरा लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है। CENTCOM से जुड़े अपडेट के मुताबिक अमेरिकी बलों ने एक चरण में करीब 140 ईरानी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया।
तीन रातों के दौरान 300 से ज्यादा ठिकानों पर हमले किए जाने का दावा सामने आया है। इन कार्रवाइयों का उद्देश्य ईरान की मिसाइल, ड्रोन और समुद्री हमले की क्षमता को कमजोर करना बताया गया है।
हालांकि सैन्य नुकसान को लेकर अमेरिका और ईरान की ओर से अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं।
कुवैत में भी हमले, ऑयल प्लेटफॉर्म पर ड्रोन स्ट्राइक
तनाव केवल ईरान और होर्मुज स्ट्रेट तक सीमित नहीं रहा। कुवैत ने अपने तीन उत्तरी बॉर्डर पोस्ट को नुकसान पहुंचने की जानकारी दी है।
एक ड्रोन ने कुवैत ऑयल कंपनी के ऑफशोर ड्रिलिंग प्लेटफॉर्म को भी निशाना बनाया, जिसमें एक कर्मचारी के घायल होने की खबर है।
ईरान ने दावा किया कि उसने कुवैत में अमेरिकी हाई मोबिलिटी आर्टिलरी रॉकेट सिस्टम यानी HIMARS लॉन्चर को निशाना बनाया।
CENTCOM ने अमेरिकी सैनिकों के मारे जाने की ईरानी रिपोर्टों को खारिज किया है। अमेरिकी सेना का कहना है कि क्षेत्र में किसी अमेरिकी सेवा सदस्य के मारे जाने या घायल होने की रिपोर्ट नहीं है।
UN की चेतावनी- ‘ये सभी हमले बंद होने चाहिए’
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने अमेरिका और ईरान के बीच दोबारा तेज हुई सैन्य कार्रवाई पर गहरी चिंता जताई है।
संयुक्त राष्ट्र की ओर से जारी बयान में होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों पर हमले, ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई और खाड़ी देशों पर हमलों का जिक्र किया गया।
गुटेरेस ने साफ कहा, “ये सभी हमले बंद होने चाहिए।”
उन्होंने चेतावनी दी कि बड़े पैमाने पर संघर्ष दोबारा शुरू होने से पूरे क्षेत्र, अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर परिणाम हो सकते हैं।
US Iran Conflict से दुनिया की चिंता क्यों बढ़ी?
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री ऊर्जा मार्गों में शामिल है। यहां सैन्य तनाव बढ़ने का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय तेल आपूर्ति और शिपिंग पर पड़ सकता है।
अमेरिका और ईरान के बीच ताजा हमलों के बाद तेल बाजार में भी चिंता बढ़ी है और कीमतों में तेजी दर्ज की गई।
अगर होर्मुज क्षेत्र में कमर्शियल जहाजों पर हमले जारी रहते हैं तो वैश्विक सप्लाई चेन और ऊर्जा बाजार पर दबाव और बढ़ सकता है।