हाई ब्लड प्रेशर के खिलाफ भगवंत मान सरकार का महाअभियान: 1 करोड़ लोगों की हुई स्क्रीनिंग, 24 लाख का मुफ्त इलाज जारी
जब दुनिया विश्व हाइपरटेंशन दिवस मना रही है, तब पंजाब सरकार की मुख्यमंत्री सेहत योजना हाइपरटेंशन और इससे जुड़ी बीमारियों से जूझ रहे मरीज़ों को सस्ती और समय पर स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध करवाकर बड़ी राहत प्रदान कर रही है।हाइपरटेंशन, जिसे आमतौर पर हाई ब्लड प्रेशर कहा जाता है, को डॉक्टर अक्सर ‘साइलेंट किलर’ कहते हैं।
News Tv India हिंदी Official | Verified Expert • 27 Mar, 2026Editor
May 18, 2026 • 7:19 AM | Chandigarh
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हाई ब्लड प्रेशर के खिलाफ भगवंत मान सरकार का महाअभियान: 1 करोड़ लोगों की हुई स्क्रीनिंग, 24 लाख का मुफ्त इलाज जारी
जब दुनिया विश्व हाइपरटेंशन दिवस मना रही है, तब पंजाब सरकार की मुख्यमंत्री सेहत योजना हाइपरटेंशन और इससे जुड़ी बीमारियों से जूझ रहे मरीज़ों को सस्ती और समय पर स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध करवाकर बड़ी राहत प्रदान कर रही है।हाइपरटेंशन, जिसे आमतौर पर हाई ब्लड प्रेशर कहा जाता है, को डॉक्टर अक्सर ‘साइलेंट किलर’ कहते हैं।
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हाई ब्लड प्रेशर के खिलाफ भगवंत मान सरकार का महाअभियान: 1 करोड़ लोगों की हुई स्क्रीनिंग, 24 लाख का मुफ्त इलाज जारी
Punjab News:जब दुनिया विश्व हाइपरटेंशन दिवस मना रही है, तब पंजाब सरकार की मुख्यमंत्री सेहत योजना हाइपरटेंशन और इससे जुड़ी बीमारियों से जूझ रहे मरीज़ों को सस्ती और समय पर स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध करवाकर बड़ी राहत प्रदान कर रही है।हाइपरटेंशन, जिसे आमतौर पर हाई ब्लड प्रेशर कहा जाता है, को डॉक्टर अक्सर ‘साइलेंट किलर’ कहते हैं। यह बिना किसी स्पष्ट चेतावनी के स्ट्रोक, हार्ट फेल्योर या किडनी रोग जैसी गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है। यह बीमारी लगभग हर आयु वर्ग में देखी जा रही है।
आम आदमी क्लीनिक प्रारंभिक स्क्रीनिंग सुनिश्चित कर रहे हैं
सभी आयु वर्गों में बढ़ रहे हाइपरटेंशन के मामलों को ध्यान में रखते हुए पंजाब सरकार रोकथाम, शीघ्र पहचान और उपचार पर विशेष ध्यान दे रही है। जहाँ ‘सीएम दी योगशाला’ स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा दे रही है, वहीं आम आदमी क्लीनिक प्रारंभिक स्क्रीनिंग सुनिश्चित कर रहे हैं (1 करोड़ लोगों की जाँच, 24 लाख उपचाराधीन), और मुख्यमंत्री सेहत योजना कैशलेस उपचार उपलब्ध करवाकर स्ट्रोक और हृदय रोग जैसी गंभीर जटिलताओं से बचाव में मदद कर रही है।विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार भारत में उच्च रक्तचाप का बोझ तेज़ी से बढ़ रहा है, जिसके प्रमुख कारण ग़लत खानपान, तनाव, तंबाकू सेवन, शारीरिक गतिविधि की कमी और अनियमित जीवनशैली हैं।डॉक्टरों का कहना है कि कई मरीज़ों को इस बीमारी का पता तब चलता है जब गंभीर जटिलताएँ उत्पन्न हो चुकी होती हैं। इस बढ़ते स्वास्थ्य संकट के बीच पंजाब की मुख्यमंत्री सेहत योजना एक मजबूत सुरक्षा कवच के रूप में उभरी है। यह योजना हज़ारों मरीज़ों को महँगे इलाज के डर के बिना हाइपरटेंशन और इससे संबंधित बीमारियों का उपचार उपलब्ध करवा रही है।
भगवंत मान सरकार ने पंजाब भर में स्क्रीनिंग, शीघ्र पहचान और उपचार प्रणाली को मज़बूत किया है
इस विश्व हाइपरटेंशन दिवस पर मुख्यमंत्री सेहत योजना की सबसे बड़ी उपलब्धि केवल निपटाए गए मामलों की संख्या नहीं, बल्कि उच्च रक्तचाप की रोकथाम और समय पर पहचान पर दिया गया विशेष ज़ोर भी है।भगवंत मान सरकार ने पंजाब भर में स्क्रीनिंग, शीघ्र पहचान और उपचार प्रणाली को मज़बूत किया है। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा, “990 आम आदमी क्लीनिकों सहित सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर 30 वर्ष से अधिक आयु के लोगों की हाइपरटेंशन के लिए नियमित जाँच की जा रही है और उन्हें समय पर उपचार से जोड़ा जा रहा है।”
उन्होंने बताया कि 30 वर्ष से अधिक आयु के 1 करोड़ से ज़्यादा लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है और 24 लाख लोगों को उपचार के दायरे में लाया गया है। मासिक फॉलोअप, मुफ़्त दवाइयाँ और समय पर रेफरल के माध्यम से निरंतर देखभाल सुनिश्चित की जा रही है, जिससे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएँ मज़बूत हुई हैं।
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इसके साथ ही पंजाब सरकार की महत्त्वपूर्ण पहल ‘सीएम दी योगशाला’, जिसके तहत 10,600 से अधिक योग-कक्षाएँ और लगभग 3 लाख प्रतिभागी जुड़े हुए हैं; योग, तनाव प्रबंधन और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा दे रही है, ताकि हाइपरटेंशन और अन्य जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों पर नियंत्रण पाया जा सके।अनियंत्रित रक्तचाप के चलते होने वाले स्ट्रोक, हृदय संबंधी गंभीर आपात स्थितियों और किडनी से जुड़ी बीमारियों के उपचार एवं अस्पताल में भर्ती होने का ख़र्च इस योजना के तहत वहन किया जा रहा है, जिससे मानसिक तनाव से गुज़र रहे परिवारों को राहत मिल रही है।पंजाब में अधिकांश मरीज़ अभी भी मध्यम आयु वर्ग और बुज़ुर्ग आबादी से संबंधित हैं, जिनमें 40 से 80 वर्ष आयु वर्ग सबसे अधिक प्रभावित है। राज्य स्वास्थ्य एजेंसी के आंकड़ों के अनुसार, गुरदासपुर में 94 वर्ष तक की आयु वाले मरीज़ दर्ज किए गए, जबकि एस.ए.एस.नगर में 98 वर्ष आयु तक के मरीज़ दर्ज किए गए, जिससे स्पष्ट होता है कि यह रोग बुज़ुर्गों में व्यापक रूप से फैला हुआ है।
पटियाला,एस.ए.एस.नगर ,होशियारपुर, जालंधर और फरीदकोट जैसे जिलों में पुरुषों और महिलाओं दोनों में बड़ी संख्या में मामले दर्ज किए गए। वहीं अमृतसर और लुधियाना के अस्पताल रिकॉर्ड में 50 से 77 वर्ष आयु वर्ग की महिलाओं में मामलों की संख्या अपेक्षाकृत अधिक पाई गई है।डॉ. सौरभ शर्मा, जो कि सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं राजिंद्रा अस्पताल में कार्डियोलॉजी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष हैं, कहते हैं कि उच्च रक्तचाप अब केवल बुज़ुर्गों तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने कहा,“आधुनिक जीवनशैली हर आयु वर्ग के लिए नई स्वास्थ्य चुनौतियाँ लेकर आई है। हालाँकि अधिकांश मामले 40 से 90 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों में देखे जाते हैं, लेकिन अब किशोरों और 20 से 30 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं में भी हाइपरटेंशन के मामले सामने आ रहे हैं।”
मुख्यमंत्री सेहत योजना जैसी योजनाएँ इसलिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण हैं क्योंकि वे मरीज़ों को आर्थिक डर के कारण इलाज टालने से रोकती हैं
डॉ. शर्मा ने कहा,“तनाव, खराब खान-पान, व्यायाम की कमी और अनियमित दिनचर्या जैसे जीवनशैली संबंधी कारक उच्च रक्तचाप के प्रमुख कारण हैं, हालाँकि कुछ चिकित्सीय स्थितियाँ भी इसका कारण बन सकती हैं।” उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अब यह जटिलताएँ पहले की तुलना में कम उम्र में सामने आने लगी हैं।अब केवल हाई ब्लड प्रेशर ही नहीं, बल्कि उससे जुड़ी जटिलताएँ जैसे स्ट्रोक,हार्ट फेलियर और किडनी रोग भी पहले की तुलना में जल्दी सामने आ रहे हैं।डॉ. शर्मा के अनुसार, मुख्यमंत्री सेहत योजना जैसी योजनाएँ इसलिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण हैं क्योंकि वे मरीज़ों को आर्थिक डर के कारण इलाज टालने से रोकती हैं। उन्होंने कहा,“उच्च रक्तचाप आपातकालीन स्थिति (हाइपरटेंसिव इमरजेंसी) में इलाज में देरी कई बार जीवन और मृत्यु के बीच का अंतर साबित होती है।”
स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता केवल इलाज उपलब्ध करवाना नहीं, बल्कि इलाज समय पर सुनिश्चित करना है। पहले कई परिवार आर्थिक डर के कारण मरीज़ को अस्पताल में भर्ती करवाने में देरी कर देते थे, जो कई बार घातक साबित होती थी। अब सेहत योजना के तहत मरीज़ समय रहते चिकित्सा सहायता लेने लगे हैं, जिससे उनके स्वस्थ होने की संभावनाएँ बढ़ रही हैं। मध्यम वर्गीय परिवारों, पेंशनभोगियों और सरकारी कर्मचारियों के लिए यह योजना भारी चिकित्सा खर्चों के ख़िलाफ एक सुरक्षा कवच बनकर उभरी है।