राज्यसभा का सत्र खत्म: 37 घंटे 49 मिनट चली कार्यवाही, सभापति बोले- व्यवधान से महत्वपूर्ण चर्चा का मौका गंवाया
Rajya Sabha Session : राज्यसभा के 271वें सत्र के समापन पर सभापति ने लगातार व्यवधान पर चिंता जताई। सदन 37 घंटे 49 मिनट चला और 39.17% समय ही वास्तविक काम हो सका।
BaluSingh Rajpurohit Official | Verified Expert • 27 Mar, 2026Editor
Aug 14, 2026 • 7:43 AM | नई दिल्ली Last Edited By:News Tv India हिंदी
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BaluSingh Rajpurohit
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राज्यसभा का सत्र खत्म: 37 घंटे 49 मिनट चली कार्यवाही, सभापति बोले- व्यवधान से महत्वपूर्ण चर्चा का मौका गंवाया
Rajya Sabha Session : राज्यसभा के 271वें सत्र के समापन पर सभापति ने लगातार व्यवधान पर चिंता जताई। सदन 37 घंटे 49 मिनट चला और 39.17% समय ही वास्तविक काम हो सका।
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14 August 2026
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Rajya Sabha Session : राज्यसभा का 271वां सत्र समाप्त हो गया। सत्र के समापन पर सभापति ने सदन की कार्यवाही में लगातार हुए व्यवधान पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि बार-बार कार्यवाही बाधित होने से राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर सार्थक चर्चा और बहस का अवसर नहीं मिल सका।
सभापति के अनुसार, सदन कुल 37 घंटे 49 मिनट ही चल पाया और इसमें सिर्फ 39.17 प्रतिशत समय वास्तविक कार्य में इस्तेमाल हुआ।
12 विधेयकों पर हुआ विचार
सभापति ने कहा कि व्यवधान के बावजूद राज्यसभा ने अपने मुख्य विधायी दायित्वों का निर्वहन किया। सदन में 12 विधेयकों पर विचार किया गया और उन्हें पारित या वापस भेजा गया।
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उन्होंने कहा कि यदि सभी सदस्य मिलकर सहभागिता करते, अपने सुझाव देते और सार्थक विचार-विमर्श करते तो सत्र की स्थिति अलग हो सकती थी।
285 तारांकित प्रश्नों में सिर्फ 16 उठ सके
सभापति ने सत्र के दौरान उपलब्ध संसदीय अवसरों का भी उल्लेख किया। उनके मुताबिक, सदस्यों के पास 285 तारांकित प्रश्न, 380 शून्यकाल प्रस्तुतियां और 380 विशेष उल्लेख उठाने के अवसर थे।
हालांकि, इनमें से सिर्फ 16 प्रश्न, 52 शून्यकाल प्रस्तुतियां और 93 विशेष उल्लेख ही उठाए जा सके।
सभापति ने कहा कि सदन का फ्लोर खुला था, लेकिन प्रतिनिधित्व करने वाले लोगों की आवाज उठाने के लिए उपलब्ध अवसरों का पूरा लाभ नहीं उठाया जा सका।
‘व्यवधान से जनता के विश्वास को ठेस’
सभापति ने कहा कि राज्यसभा वरिष्ठ सदन है और इसकी जिम्मेदारी तर्कपूर्ण बहस, गरिमापूर्ण असहमति और विचारशील कानून निर्माण को बढ़ावा देना है।
उन्होंने कहा कि बार-बार होने वाले व्यवधान से अंततः जनता के विश्वास और उसकी आकांक्षाओं को ठेस पहुंचती है। उन्होंने संसदीय आचरण के उच्चतम मानकों को बनाए रखने और सदन की गरिमा को संरक्षित करने पर जोर दिया।
नए सदस्यों के लिए हुआ अनुकूलन कार्यक्रम
271वें सत्र की एक प्रमुख विशेषता नव निर्वाचित और मनोनीत सदस्यों के लिए आयोजित दो दिवसीय अनुकूलन कार्यक्रम रहा। इसमें संसदीय कार्यप्रणाली, प्रक्रिया और सदस्यों से अपेक्षित आचरण के बारे में जानकारी दी गई।
सभापति ने बताया कि कार्यक्रम में 35 सदस्य शामिल हुए। उन्होंने उम्मीद जताई कि नए सदस्य कार्यक्रम से मिली सीख को आगे बढ़ाएंगे और सदन की चर्चाओं में सार्थक योगदान देंगे।
AI आधारित भाषा अनुवाद का इस्तेमाल
सत्र के दौरान प्रौद्योगिकी के बढ़ते इस्तेमाल का भी सभापति ने उल्लेख किया। ‘वाणी सेतु’ के माध्यम से AI आधारित भाषा अनुवाद शुरू किया गया।
इस सुविधा के जरिए सदस्यों को अपनी पसंद की भाषा में, यहां तक कि क्षेत्रीय भाषाओं में दिए गए भाषणों को भी सुनने का अवसर मिला।
इसके अलावा त्वरित और सुरक्षित उपस्थिति तथा अन्य संसदीय कार्यों के लिए ‘सदस्य सेतु’ मोबाइल एप्लिकेशन का इस्तेमाल किया गया। सभापति ने कहा कि इन तकनीकी सुविधाओं को आगे भी बेहतर बनाया जाएगा और सदस्यों के सुझाव लिए जाएंगे।
उपसभापति और कर्मचारियों का जताया आभार
सभापति ने सदन की कार्यवाही के संचालन में सहयोग के लिए उपसभापति और उपसभापतियों के पैनल के सदस्यों के प्रति आभार जताया।
उन्होंने महासचिव, अधिकारियों और कर्मचारियों की टीम के प्रयासों की भी सराहना की। साथ ही कार्यवाही को कवर करने और जनता तक जानकारी पहुंचाने के लिए प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को धन्यवाद दिया।
स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दीं
समापन संबोधन में सभापति ने सभी सदस्यों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने अंतर-सत्र अवधि में पड़ने वाले त्योहारों के लिए भी शुभकामनाएं दीं।
उन्होंने उम्मीद जताई कि अगली बैठक में सदस्य सदन की गरिमा बनाए रखने और लोकतंत्र की उच्च परंपराओं के अनुरूप संसदीय दायित्व निभाने के नए संकल्प के साथ लौटेंगे।