ईरान-अमेरिका तनाव: ट्रंप के 'समझौते' के संकेत; सैन्य दबाव और कूटनीति के बीच एक नई राह की उम्मीद?
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में ईरान के साथ एक संभावित समझौते की तरफ इशारा किया है. उनका दावा है कि अमेरिकी हमलों से ईरान की सैन्य ताकत कमजोर हुई है, जिससे बातचीत की रफ्तार तेज हुई है.
News Tv India हिंदी Official | Verified Expert • 27 Mar, 2026Editor
Mar 30, 2026 • 7:26 AM
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ईरान-अमेरिका तनाव: ट्रंप के 'समझौते' के संकेत; सैन्य दबाव और कूटनीति के बीच एक नई राह की उम्मीद?
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में ईरान के साथ एक संभावित समझौते की तरफ इशारा किया है. उनका दावा है कि अमेरिकी हमलों से ईरान की सैन्य ताकत कमजोर हुई है, जिससे बातचीत की रफ्तार तेज हुई है.
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ईरान-अमेरिका तनाव: ट्रंप के 'समझौते' के संकेत; सैन्य दबाव और कूटनीति के बीच एक नई राह की उम्मीद?
वॉशिंगटन : अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ समझौता जल्द हो सकता है. उन्होंने यह भी दावा किया कि अमेरिका के हालिया हमलों से ईरान की सेना और नेतृत्व कमजोर हुआ है, जिससे बातचीत तेज हुई है. ट्रंप ने फ्लोरिडा के मार-ए-लागो से लौटते समय एयर फोर्स वन में पत्रकारों से कहा, “मुझे लगता है कि ईरान के साथ समझौता हो सकता है और यह जल्द ही हो सकता है.”
बातचीत का दौर: सीधा और परोक्ष
ट्रंप ने बताया कि अमेरिका ईरान के साथ सीधे और परोक्ष दोनों तरह से बातचीत कर रहा है. उन्होंने कहा, “हम उनके साथ सीधे भी बात कर रहे हैं और माध्यमों के जरिए भी.” कई रिपोर्ट्स बताती हैं कि ट्रंप प्रशासन के करीबी सलाहकार बातचीत शुरू करने की कोशिशों में जुटे हैं.
ईरान की सैन्य ताकत को नुकसान
ट्रंप ने इन बातचीतों को हाल के सैन्य हमलों से जोड़ा और दावा किया कि अमेरिका ने ईरान को बड़ा नुकसान पहुंचाया है. उनके अनुसार, “हमने उनके 158 जहाज, पूरी नौसेना, वायुसेना और ज्यादातर मिसाइलों को नष्ट कर दिया.” फरवरी 2026 में हुए अमेरिका-इजरायल के संयुक्त हमलों में ईरान के परमाणु स्थलों और सैन्य क्षमताओं को भारी नुकसान पहुँचाने की खबरें भी सामने आई थीं.
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ट्रंप ने यह भी कहा कि इन हमलों के बाद ईरान के नेतृत्व में बदलाव आया है. उनके अनुसार, “अब वहां नया नेतृत्व है, जो पहले से ज्यादा समझदारी से व्यवहार कर रहा है.” ट्रंप ने दावा किया कि ईरान ने अमेरिका की कई शर्तों को मान लिया है. उन्होंने कहा, “हमने उनसे 15 मांगें रखी थीं और ज्यादातर बातों पर वे सहमत हैं.” हालांकि, ईरान के अधिकारियों ने अमेरिकी शांति प्रस्ताव को 'हकीकत से दूर' बताते हुए खारिज कर दिया है, जिसमें परमाणु कार्यक्रम छोड़ने और बैलिस्टिक मिसाइलों को सीमित करने की मांगें शामिल थीं.
तेल की पेशकश: सद्भाव का संकेत?
उन्होंने यह भी कहा कि ईरान ने अमेरिका को तेल देकर सद्भाव दिखाया है. “उन्होंने हमें तेल से भरे कई बड़े जहाज दिए हैं और आज भी 20 और जहाज देने की बात कही है, जिनकी आपूर्ति कल से शुरू होगी.” कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका ने वैश्विक बाजारों को स्थिर करने के लिए समुद्री ईरानी तेल पर लगे प्रतिबंधों में अस्थायी छूट भी दी थी.
हालांकि, ट्रंप ने माना कि अभी अंतिम समझौते को लेकर पूरी तरह निश्चितता नहीं है. उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि समझौता हो जाएगा, लेकिन यह भी संभव है कि न हो.” अमेरिकी सैनिक भेजने के सवाल पर ट्रंप ने कहा कि अमेरिका के पास कई विकल्प हैं. “हमारे पास वहां काफी सैन्य ताकत मौजूद है और हमारे पास कई विकल्प हैं.” ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर उन्होंने सख्त रुख दोहराया. उन्होंने कहा, “मैं नहीं चाहता कि ईरान के पास परमाणु हथियार हो, क्योंकि अगर उनके पास यह होगा तो वे इसका तुरंत इस्तेमाल कर सकते हैं.”
क्षेत्रीय सहयोगी साथ
ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर ईरान ने शर्तें नहीं मानीं तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे. उन्होंने कहा, “उन्हें परमाणु हथियार छोड़ने होंगे, तभी वे फिर से एक मजबूत देश बन सकते हैं. अगर ऐसा नहीं हुआ तो उनका देश भी खतरे में पड़ सकता है.” उन्होंने यह भी कहा कि क्षेत्र के कई देश अब अमेरिका के साथ खड़े हैं. सऊदी अरब, कतर और यूएई सभी जवाबी कार्रवाई कर रहे हैं और वे पूरी तरह हमारे साथ हैं.