पंजाब में अब स्कूलों से लड़ी जाएगी नशे के खिलाफ जंग, 8 लाख छात्रों तक पहुंचेगा खास एंटी-ड्रग अभियान
पंजाब सरकार ने स्कूल खुलने के साथ नशे के खिलाफ अभियान को और तेज कर दिया है। प्रशिक्षित शिक्षक, माइंडफुलनेस प्रोग्राम और एंटी-ड्रग पाठ्यक्रम के जरिए छात्रों को जागरूक किया जाएगा।
News Tv India हिंदी Official | Verified Expert • 27 Mar, 2026Editor
Jul 3, 2026 • 7:21 AM | Chandigarh
N
News TV India
BREAKING
News Tv India हिंदी
2 hours ago
पंजाब में अब स्कूलों से लड़ी जाएगी नशे के खिलाफ जंग, 8 लाख छात्रों तक पहुंचेगा खास एंटी-ड्रग अभियान
पंजाब सरकार ने स्कूल खुलने के साथ नशे के खिलाफ अभियान को और तेज कर दिया है। प्रशिक्षित शिक्षक, माइंडफुलनेस प्रोग्राम और एंटी-ड्रग पाठ्यक्रम के जरिए छात्रों को जागरूक किया जाएगा।
Full Story: https://www.newstvindia.in/s/ab0e08
https://www.newstvindia.in/s/ab0e08
Copied
पंजाब में अब स्कूलों से लड़ी जाएगी नशे के खिलाफ जंग, 8 लाख छात्रों तक पहुंचेगा खास एंटी-ड्रग अभियान
गर्मी की छुट्टियों के बाद पंजाब के स्कूल खुलने के साथ ही राज्य सरकार ने नशे के खिलाफ अपने अभियान को शिक्षा व्यवस्था से जोड़ते हुए नई पहल शुरू की है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में चलाए जा रहे 'युद्ध नशेआं विरुद्ध' अभियान के तहत सरकारी स्कूलों में शिक्षकों, प्रधानाचार्यों और छात्रों की सक्रिय भागीदारी पर जोर दिया जा रहा है।
सरकार का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य केवल नशे के दुष्प्रभावों के बारे में जानकारी देना नहीं, बल्कि किशोरों में मानसिक मजबूती, सही निर्णय लेने की क्षमता और जीवन कौशल विकसित करना भी है, ताकि वे नशे जैसी समस्याओं से दूर रह सकें।
शिक्षकों को दी जा रही विशेष ट्रेनिंग
सरकार के अनुसार, इस अभियान को प्रभावी बनाने के लिए टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज़ (TISS) के सहयोग से नौ जिलों, विशेषकर सीमावर्ती क्षेत्रों के 1,400 से अधिक स्कूल प्रमुखों को प्रशिक्षण दिया गया है।
क्या आप WhatsApp पर न्यूज़ अपडेट पाना चाहते हैं?
WhatsApp पर ताज़ा और भरोसेमंद न्यूज़ अपडेट तुरंत पाएं। अभी जुड़ें और हर खबर सबसे पहले पढ़ें।
प्रशिक्षण का उद्देश्य स्कूल प्रमुखों और शिक्षकों को किशोरों में नशे की शुरुआती प्रवृत्तियों की पहचान करना, मानसिक स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों को समझना और जरूरत पड़ने पर उचित मार्गदर्शन देना है।
इसके अलावा अमृतसर में कक्षा 9 से 12 तक पढ़ाने वाले 3,000 से अधिक शिक्षकों के लिए क्षमता विकास कार्यशालाएं आयोजित की गईं। सरकार का दावा है कि प्रशिक्षण के बाद 75 प्रतिशत शिक्षकों ने स्वस्थ स्कूल वातावरण बनाने की प्रेरणा मिलने की बात कही, जबकि 85 प्रतिशत शिक्षकों ने माना कि किशोरों में नशे की समस्या का संबंध तनाव, साथियों के दबाव और भावनात्मक चुनौतियों से भी जुड़ा होता है।
अब इस कार्यक्रम को पूरे पंजाब में विस्तार देने की तैयारी है।
छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी विशेष ध्यान
राज्य सरकार ने सरकारी स्कूलों में 'माइंडफुलनेस प्रोग्राम' भी शुरू किया है। कक्षा 6 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए प्रतिदिन लगभग 30 मिनट के सत्र आयोजित किए जाते हैं, जिनमें ध्यान (मेडिटेशन), श्वास अभ्यास, सकारात्मक सोच और आभार व्यक्त करने जैसी गतिविधियां शामिल हैं।
सरकार के अनुसार, मोहाली के करीब 210 सरकारी स्कूलों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू इस कार्यक्रम में शामिल 83 प्रतिशत छात्रों ने बताया कि वे तनावपूर्ण परिस्थितियों का पहले की तुलना में बेहतर तरीके से सामना कर पा रहे हैं।
देश का पहला एविडेंस-बेस्ड एंटी-ड्रग पाठ्यक्रम
पंजाब सरकार का दावा है कि राज्य ने कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए भारत का पहला एविडेंस-बेस्ड एंटी-ड्रग पाठ्यक्रम शुरू किया है।
पिछले वर्ष अगस्त में शुरू हुए इस कार्यक्रम में लगभग 3,658 सरकारी स्कूलों के करीब 8 लाख छात्र शामिल हैं। इस पाठ्यक्रम को 6,500 से अधिक प्रशिक्षित शिक्षक पढ़ा रहे हैं।
जे-पाल साउथ एशिया (J-PAL South Asia) और व्यवहार वैज्ञानिकों के सहयोग से तैयार इस पाठ्यक्रम में विद्यार्थियों को नशे के दुष्प्रभाव, साथियों के दबाव से निपटना, सही निर्णय लेना और नशे से इनकार करने के व्यावहारिक तरीके सिखाए जाते हैं।
स्कूलों में गुमनाम शिकायत पेटियां भी लगाई गईं
सरकार ने विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित सहायता व्यवस्था विकसित करने के उद्देश्य से स्कूलों में गुमनाम शिकायत पेटियां (Anonymous Complaint Boxes) भी लगाई हैं।
इनके माध्यम से छात्र बिना अपनी पहचान उजागर किए नशे या उससे जुड़ी किसी भी चिंता की जानकारी स्कूल प्रशासन तक पहुंचा सकते हैं।
मंत्रियों ने क्या कहा?
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल नशे के खतरों के प्रति चेतावनी देना नहीं, बल्कि बच्चों को सही निर्णय लेने के लिए आवश्यक ज्ञान, आत्मविश्वास और मानसिक मजबूती प्रदान करना है।
वहीं शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने कहा कि शिक्षक समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं। उनके अनुसार, मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में चल रहा नशा विरोधी अभियान शिक्षा व्यवस्था के सहयोग से और प्रभावी बनाया जा रहा है।
शिक्षा के साथ रोकथाम पर भी फोकस
सरकार का कहना है कि पंजाब शिक्षा के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन कर चुका है और अब नशे के खिलाफ लड़ाई में भी रोकथाम आधारित मॉडल विकसित करने पर काम किया जा रहा है। इसके तहत स्कूलों को केवल शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि सुरक्षित और जागरूक वातावरण के रूप में विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि बच्चे नशे की गिरफ्त में आने से पहले ही जागरूक और सुरक्षित रह सकें.