दिल्ली हाई कोर्ट में Google-Meta का बड़ा बयान, बोले- हर वीडियो पर नजर रखना तकनीकी रूप से संभव नहीं
दिल्ली हाई कोर्ट में गूगल और मेटा ने कहा कि सोशल मीडिया पर अपलोड होने वाली हर पोस्ट और वीडियो की स्वतः निगरानी करना तकनीकी रूप से संभव नहीं है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 27 अगस्त तय की है।
News Tv India हिंदी Official | Verified Expert • 27 Mar, 2026Editor
Jul 7, 2026 • 11:15 PM | New Delhi
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दिल्ली हाई कोर्ट में Google-Meta का बड़ा बयान, बोले- हर वीडियो पर नजर रखना तकनीकी रूप से संभव नहीं
दिल्ली हाई कोर्ट में गूगल और मेटा ने कहा कि सोशल मीडिया पर अपलोड होने वाली हर पोस्ट और वीडियो की स्वतः निगरानी करना तकनीकी रूप से संभव नहीं है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 27 अगस्त तय की है।
“दिल्ली हाई कोर्ट में Google-Meta का बड़ा बयान, बोले- हर वीडियो पर नजर रखना तकनीकी रूप से संभव नहीं”
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07 July 2026
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दिल्ली हाई कोर्ट में Google-Meta का बड़ा बयान, बोले- हर वीडियो पर नजर रखना तकनीकी रूप से संभव नहीं
नई दिल्ली। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारियों को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान Google और Meta ने अदालत के सामने अपना पक्ष रखा। दोनों कंपनियों ने कहा कि इंटरनेट पर अपलोड होने वाली हर पोस्ट और वीडियो की स्वतः निगरानी करना तकनीकी और व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है। कंपनियों का कहना है कि बिना किसी स्पष्ट जानकारी, यूआरएल या सक्षम प्राधिकरण के आदेश के किसी कंटेंट की पहचान कर उसे हटाना उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर है।
यह मामला अदालत की कार्यवाही की कथित अनधिकृत वीडियो रिकॉर्डिंग इंटरनेट पर साझा किए जाने से जुड़ी जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया।
'हम सेंसर की भूमिका नहीं निभा सकते'
सुनवाई के दौरान गूगल और मेटा ने कहा कि उनसे यह अपेक्षा नहीं की जा सकती कि वे इंटरनेट पर मौजूद हर सामग्री की पहले से जांच करें। कंपनियों ने अदालत को बताया कि यदि किसी विवादित वीडियो या पोस्ट को हटाने की मांग की जाती है, तो उसके लिए संबंधित लिंक, स्पष्ट पहचान या कानूनी आदेश आवश्यक होता है।
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अदालत ने बताया कि याचिका में पक्षकार बनाए गए कुछ नेताओं को अभी तक नोटिस की तामील नहीं हो सकी है। इसी कारण मामले की अगली सुनवाई 27 अगस्त को निर्धारित की गई है, ताकि सभी पक्ष अपना जवाब अदालत के समक्ष रख सकें।
याचिका में क्या है मामला?
जनहित याचिका में आरोप लगाया गया है कि आबकारी नीति मामले से संबंधित अदालत की कार्यवाही की कथित अनधिकृत रिकॉर्डिंग सोशल मीडिया पर साझा की गई। याचिकाकर्ता का कहना है कि यह अदालत के नियमों का उल्लंघन है।
इसी आधार पर अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, संजय सिंह समेत अन्य नेताओं के खिलाफ अदालत की अवमानना की कार्रवाई की मांग की गई है।
Google और Meta ने बताई तकनीकी चुनौती
Meta ने अपने हलफनामे में कहा कि उसके प्लेटफॉर्म पर प्रतिदिन अरबों पोस्ट और वीडियो साझा किए जाते हैं। ऐसे में किसी विशेष यूआरएल या पहचान संबंधी जानकारी के बिना किसी कंटेंट को खोजकर हटाना संभव नहीं है।
वहीं Google ने कहा कि YouTube पर हर घंटे लाखों वीडियो अपलोड होते हैं। इसलिए प्रत्येक वीडियो की पहले से समीक्षा करना व्यवहारिक नहीं है।
IT Act की धारा 79 का दिया हवाला
दोनों कंपनियों ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 79 का हवाला देते हुए कहा कि इंटरमीडियरी प्लेटफॉर्म को कानूनी सुरक्षा प्राप्त है। उनका कहना है कि किसी सक्षम न्यायालय या अधिकृत सरकारी एजेंसी के आदेश अथवा किसी अवैध सामग्री की स्पष्ट सूचना मिलने पर ही संबंधित कंटेंट हटाने की प्रक्रिया शुरू की जाती है।
अब इस मामले में अदालत की अगली सुनवाई और सभी पक्षों के जवाब पर नजर रहेगी, क्योंकि यह मामला सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारियों और डिजिटल कंटेंट नियमन से जुड़े महत्वपूर्ण कानूनी सवालों से जुड़ा है।