लखनऊ अग्निकांड की जांच के लिए दो सदस्यीय SIT गठित, 7 दिन में सौंपेगी रिपोर्ट, सीएम योगी ने रद्द किए सभी कार्यक्रम
Lucknow Fire Incident के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बड़ा फैसला लेते हुए दो सदस्यीय एसआईटी (SIT) का गठन किया है। जांच टीम सात दिन के भीतर रिपोर्ट सौंपेगी। हादसे के बाद सीएम योगी ने अपने सभी सरकारी कार्यक्रम रद्द कर दिए और घायलों से मुलाकात की।
लखनऊ के अलीगंज इलाके में हुए दर्दनाक अग्निकांड के बाद अब उस भवन से जुड़े पुराने दस्तावेज और प्रशासनिक फैसले चर्चा के केंद्र में आ गए हैं। जांच के दौरान सामने आया है कि जिस इमारत में यह हादसा हुआ, उसके खिलाफ वर्ष 2016 में अवैध निर्माण को लेकर ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया गया था। लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि यह आदेश दो महीने से भी कम समय के भीतर वापस ले लिया गया था।
इस खुलासे के बाद लखनऊ अलीगंज अग्निकांड (Lucknow Aliganj Fire) से जुड़े कई नए सवाल खड़े हो गए हैं। लोग यह जानना चाहते हैं कि आखिर जब भवन में अनधिकृत निर्माण पाया गया था, तो ध्वस्तीकरण की कार्रवाई आगे क्यों नहीं बढ़ सकी।
1980 में हुआ था भवन का आवंटन
उपलब्ध दस्तावेजों के मुताबिक, अलीगंज योजना के सेक्टर-डी स्थित भवन संख्या एमएस/102/डी का आवंटन 11 जुलाई 1980 को लॉटरी प्रणाली के तहत विजय कुमार, पुत्र रामेश्वर सहाय, के नाम किया गया था।
यह आवंटन किराया-क्रय पद्धति के आधार पर किया गया था। बाद में 4 नवंबर 1980 को आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद भवन का कब्जा आवंटी को सौंप दिया गया।
समय के साथ बदलता रहा स्वामित्व
करीब 25 साल बाद वर्ष 2005 में इस संपत्ति का स्वामित्व विक्रय विलेख के माध्यम से विजय कुमार और उनकी पत्नी उषा के नाम दर्ज किया गया। इसके बाद 19 जनवरी 2013 को दोनों ने यह भवन वीरेन्द्र प्रताप शुक्ला और सुरेन्द्र प्रताप शुक्ला को बेच दिया।
नए स्वामित्व के बाद 7 अगस्त 2014 को लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने दोनों खरीदारों के पक्ष में नामांतरण की प्रक्रिया पूरी कर दी।
2014 में मिला था मानचित्र का अनुमोदन
करीब 1992 वर्गफीट क्षेत्रफल वाले इस भवन का नक्शा 20 अगस्त 2014 को स्वतः मानचित्र योजना के तहत आवासीय उपयोग के लिए स्वीकृत किया गया था।
हालांकि, कुछ समय बाद भवन में अनधिकृत निर्माण की शिकायतें सामने आने लगीं। शिकायतों के आधार पर लखनऊ विकास प्राधिकरण ने वीरेन्द्र प्रताप शुक्ला के खिलाफ मुकदमा संख्या 08/2016 दर्ज किया।
जांच के बाद जारी हुआ था ध्वस्तीकरण आदेश
मामले की जांच के बाद विहित प्राधिकारी ने 10 मई 2016 को भवन में पाए गए अवैध निर्माण के खिलाफ ध्वस्तीकरण का आदेश पारित किया। इस आदेश का उद्देश्य अनधिकृत हिस्सों को हटाना था।
लेकिन इसके बाद घटनाक्रम ने अप्रत्याशित मोड़ ले लिया। महज दो महीने के भीतर, 5 जुलाई 2016 को यह आदेश निरस्त कर दिया गया। इसके पीछे क्या कारण थे, इसे लेकर अब कई तरह के सवाल उठ रहे हैं।
अग्निकांड के बाद फिर चर्चा में आया पुराना फैसला
लखनऊ अलीगंज अग्निकांड (Lucknow Aliganj Fire) के बाद यह पुराना मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। स्थानीय लोगों और कई जानकारों का कहना है कि यदि अवैध निर्माण को लेकर कार्रवाई की गई थी, तो ध्वस्तीकरण आदेश वापस लेने की वजह सार्वजनिक होनी चाहिए।
लोग यह भी सवाल उठा रहे हैं कि उस समय प्रशासन ने किन तथ्यों के आधार पर अपना फैसला बदला और क्या सभी प्रक्रियाओं का पालन किया गया था।
पुराने रिकॉर्ड खंगाल सकती हैं जांच एजेंसियां
माना जा रहा है कि हादसे के बाद जांच एजेंसियां भवन से जुड़े सभी पुराने दस्तावेज, स्वीकृत मानचित्र, स्वामित्व परिवर्तन और वर्ष 2016 में लिए गए फैसलों की विस्तार से समीक्षा कर सकती हैं।
लखनऊ अलीगंज अग्निकांड (Lucknow Aliganj Fire) ने न सिर्फ भवन सुरक्षा बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता और अवैध निर्माण के मामलों में कार्रवाई की प्रक्रिया को लेकर भी कई अहम सवाल खड़े कर दिए हैं। आने वाले दिनों में जांच आगे बढ़ने के साथ इस मामले से जुड़े और भी तथ्य सामने आ सकते हैं।
लखनऊ : राजधानी लखनऊ के अलीगंज इलाके में हुए भीषण अग्निकांड (Lucknow Fire Incident) के बाद प्रशासन ने जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर चार अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है, जबकि पुलिस ने मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। दूसरी ओर, जिस इमारत में यह दर्दनाक हादसा हुआ, उसका मालिक घटना के बाद से फरार बताया जा रहा है।
मुख्यमंत्री के निर्देश पर चार अधिकारियों पर गिरी गाज
अग्निकांड के बाद सामने आई शुरुआती लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार ने चार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की है। निलंबित अधिकारियों में एक्सईएन कलेक्शन जानकीपुरम गौरव कुमार, एफएसएसओ इंदिरा नगर कमलेन्द्र कुमार सिंह, सहायक अभियंता अनिल कुमार और जूनियर इंजीनियर प्रमोद पांडे शामिल हैं।
सरकार का मानना है कि इस मामले में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और जांच में जो भी अधिकारी या व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि इस हादसे के जिम्मेदार लोगों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
छह नामजद आरोपियों समेत कई लोगों के खिलाफ दर्ज हुआ मामला
अलीगंज थाना क्षेत्र में हुई इस घटना के संबंध में पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस के मुताबिक, अपराध संख्या 115/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के साथ-साथ उत्तर प्रदेश अग्निशमन सेवा अधिनियम की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
इस एफआईआर में छह नामजद आरोपियों के अलावा अन्य जिम्मेदार लोगों को भी शामिल किया गया है। जांच एजेंसियां अब पूरे मामले में आग लगने के कारणों और सुरक्षा मानकों में हुई कथित अनियमितताओं की गहराई से पड़ताल कर रही हैं।
तीन आरोपियों को पुलिस ने किया गिरफ्तार
मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में रामकृष्ण उपाध्याय, वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला और तुषॉक कृष्णा जायसवाल शामिल हैं। पुलिस इन तीनों से पूछताछ कर रही है और यह जानने की कोशिश की जा रही है कि हादसे में उनकी भूमिका क्या रही।
अधिकारियों का कहना है कि मामले से जुड़े अन्य लोगों की तलाश भी जारी है और जांच के आधार पर आगे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। पुलिस की विभिन्न टीमें लगातार कार्रवाई में जुटी हुई हैं।
हादसे के बाद फरार हुआ बिल्डिंग मालिक
अग्निकांड के बाद इमारत के मालिक के फरार होने की खबर ने मामले को और गंभीर बना दिया है। स्थानीय लोगों और गार्ड के अनुसार, जिस भवन में आग लगी थी उसके मालिक बीपी शुक्ला और उनका परिवार घटना के बाद से अपने निजी आवास से गायब हैं।
बताया जा रहा है कि उनके घर पर ताला लगा हुआ है और परिवार के सदस्य कहीं बाहर चले गए हैं। घर की निगरानी कर रहे गार्ड ने बताया कि वह पिछले एक सप्ताह से वहां काम कर रहा है और उसे केवल मकान की देखभाल के लिए रखा गया था। घटना की जानकारी उसे ड्यूटी पर पहुंचने के बाद मिली।
अब पुलिस बिल्डिंग मालिक की तलाश में जुटी हुई है और उसके संभावित ठिकानों का पता लगाया जा रहा है।
हादसे के कारणों की हर पहलू से जांच जारी
लखनऊ अग्निकांड ने एक बार फिर शहरों में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था और भवन मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन की ओर से पहले ही विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया जा चुका है, जो पूरे मामले की विस्तृत जांच कर सात दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपेगा।
फिलहाल पुलिस और प्रशासन दोनों स्तरों पर कार्रवाई जारी है। सरकार का कहना है कि इस हादसे के पीछे जो भी लोग जिम्मेदार पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कानून के तहत कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। वहीं, पीड़ित परिवारों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने के लिए भी प्रशासन लगातार प्रयास कर रहा है।
लखनऊ : उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज इलाके में हुए भीषण अग्निकांड (Lucknow Fire Incident) के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कई अहम फैसले किए हैं। हादसे की सूचना मिलते ही मुख्यमंत्री ने अपने मंगलवार के सभी सरकारी कार्यक्रम रद्द कर दिए और सीधे लखनऊ पहुंचकर राहत एवं बचाव कार्यों की निगरानी की। साथ ही घटना की विस्तृत जांच के लिए दो सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है, जिसे सात दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।
हाईलेवल बैठक के बाद SIT गठन का फैसला
मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, हादसे के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। इस दौरान दुर्घटना की परिस्थितियों, राहत कार्यों और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के उपायों पर विस्तार से चर्चा की गई।