SBI रिसर्च का पूर्वानुमान: वित्त वर्ष 2027 में ₹12 लाख करोड़ तक पहुंचेगा भारत का पूंजीगत खर्च

भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए आगामी वित्त वर्ष (FY27) महत्वपूर्ण रहने वाला है। एसबीआई रिसर्च (SBI Research) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, बुनियादी ढांचे और विकास को गति देने के लिए भारत का पूंजीगत खर्च (Capital Expenditure) सालाना आधार पर 10 प्रतिशत बढ़कर 12 लाख करोड़ रुपये के पार जा सकता है।

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News Tv India हिंदी Official | Verified Expert • 27 Mar, 2026 Editor
Jan 27, 2026 • 9:30 AM
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SBI रिसर्च का पूर्वानुमान: वित्त वर्ष 2027 में ₹12 लाख करोड़ तक पहुंचेगा भारत का पूंजीगत खर्च
27 में ₹12 लाख करोड़ तक पहुंचेगा भारत का पूंजीगत खर्च
भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए आगामी वित्त वर्ष (FY27) महत्वपूर्ण रहने वाला है। एसबीआई रिसर्च (SBI Research) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, बुनियादी ढांचे और विकास को गति देने के लिए भारत का पूंजीगत खर्च (Capital Expenditure) सालाना आधार पर 10 प्रतिशत बढ़कर 12 लाख करोड़ रुपये के पार जा सकता है।
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SBI रिसर्च का पूर्वानुमान: वित्त वर्ष 2027 में ₹12 लाख करोड़ तक पहुंचेगा भारत का पूंजीगत खर्च
SBI रिसर्च का पूर्वानुमान: वित्त वर्ष 2027 में ₹12 लाख करोड़ तक पहुंचेगा भारत का पूंजीगत खर्च
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नई दिल्ली : भारत का पूंजीगत खर्च वित्त वर्ष 27 में सालाना आधार पर 10 प्रतिशत बढ़कर 12 लाख करोड़ रुपए के आंकड़े को पार कर सकता है। यह जानकारी एसबीआई रिसर्च की ओर से सोमवार को दी गई।

एसबीआई रिसर्च का अनुमान है कि इस दौरान नॉमिनल जीडीपी की वृद्धि दर 10.5 प्रतिशत से 11 प्रतिशत के बीच रह सकती है और वैश्विक स्तर पर धातुओं की कीमतों में तेजी का असर थोक महंगाई दर पर देखने को मिल सकता है।

एसबीआई के समूह मुख्य आर्थिक सलाहकार डॉ. सौम्या कांति घोष ने कहा कि वित्त वर्ष 2027 में नॉमिनल जीडीपी की धीमी गति कर राजस्व को प्रभावित कर सकती है, जिसके लिए बेहतर व्यय नियोजन की आवश्यकता होगी।

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उन्होंने आगे कहा कि देश का राजकोषीय घाटा वित्त वर्ष 27 में 4.2 प्रतिशत के आसपास रह सकता है। इस दौरान उधारी की लागत वित्त वर्ष 27 में 6.8 प्रतिशत से लेकर 7.0 प्रतिशत के बीच रह सकती है।

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एसबीआई रिसर्च ने बताया कि वित्त वर्ष 27 में देश की शुद्ध उधारी 11.7 लाख करोड़ रुपए हो सकती है।

रिपोर्ट में बताया गया कि केंद्रीय बजट 2026 एक नई उभरती हुई राजनीतिक व्यवस्था के व्यापक प्रभावों के बीच आ रहा है, जो अभी भी काफी हद तक अस्पष्ट है और वैश्विक वित्तीय बाजारों के इतिहास में इसका गहरा प्रभाव पड़ रहा है। वैश्विक स्तर पर समन्वय की कमी शेयर और बॉन्ड बाजारों में भारी गिरावट का मुख्य कारण है।

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रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि राज्यों का कुल सरकारी ऋण में महत्वपूर्ण हिस्सा है, इसलिए राज्य के बजटों में वार्षिक घाटे के लक्ष्यों पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय, वास्तविक विकास अनुमानों और विकास आवश्यकताओं के अनुरूप, मध्यम अवधि के लिए ऋण-से-जीएसडीपी अनुपात को स्पष्ट रूप से निर्धारित किया जाना चाहिए। केंद्रीय बजट में इस बात पर प्रकाश डाला जा सकता है।

News Tv India हिंदी Official | Verified Expert • 27 Mar, 2026 Editor

News Tv India डेस्क प्रतिष्ठित पत्रकारों की पहचान है। इससे कई पत्रकार देश-दुनिया, खेल और मनोरंजन जगत की खबरें साझा करते हैं।

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