प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी युग्म सम्मेलन में करेंगे भविष्य के नवाचारों का आगाज
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज युग्म (YUGM) की शुरुआत करेंगे। इस आयोजन से देश में इनोवेशन इकोसिस्टम में निजी निवेश बढ़ेगा। डीप टेक स्टार्टअप शोकेस में देशभर से अत्याधुनिक नवाचार प्रदर्शित किए जाएंगे।
नई दिल्ली : प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी आज सुबह 11 बजे नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित युग्म सम्मेलन में भाग लेंगे और इसे संबोधित करेंगे। 'युग्म' (संस्कृत में अर्थ: संगम) एक ऐसा महत्वपूर्ण नीतिगत सम्मेलन है जो सरकार, शैक्षणिक जगत, उद्योग और नवाचार क्षेत्र को एक मंच पर लाएगा।
आत्मनिर्भर और नवप्रवर्तन आधारित भारत के लिए नई पहलें
प्रधानमंत्री मोदी के "आत्मनिर्भर भारत" और "नवप्रवर्तन आधारित भारत" के विजन के अनुरूप, सम्मेलन में कई नवाचार-आधारित परियोजनाएं शुरू की जाएंगी। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
-
आईआईटी कानपुर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और इंटेलिजेंट सिस्टम के लिए सुपरहब की स्थापना।
-
आईआईटी बॉम्बे में जैव विज्ञान, जैव प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य और चिकित्सा क्षेत्र में सुपरहब का विकास।
क्या आप WhatsApp पर न्यूज़ अपडेट पाना चाहते हैं?
WhatsApp पर ताज़ा और भरोसेमंद न्यूज़ अपडेट तुरंत पाएं। अभी जुड़ें और हर खबर सबसे पहले पढ़ें।
Follow News Tv India on WhatsApp -
शीर्ष अनुसंधान संस्थानों में वाधवानी इनोवेशन नेटवर्क (WIN) केंद्रों का निर्माण।
-
अनुसंधान को प्रोत्साहन देने के लिए राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (NRF) के साथ साझेदारी।
सम्मेलन में डीप टेक स्टार्टअप्स का भव्य प्रदर्शन
युग्म सम्मेलन के दौरान आयोजित डीप टेक स्टार्टअप शोकेस में देशभर से अत्याधुनिक नवाचारों का प्रदर्शन किया जाएगा। यह स्टार्टअप्स और निवेशकों के लिए एक साझा मंच प्रदान करेगा जहां विचारों का आदान-प्रदान और नेटवर्किंग के अवसर मिलेंगे।
सम्मेलन के प्रमुख उद्देश्य
युग्म सम्मेलन के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल हैं:
-
भारत के नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र में निजी निवेश को बढ़ावा देना।
-
अनुसंधान और तकनीक के व्यावसायीकरण को तेज करना।
-
शिक्षा, उद्योग और सरकार के बीच साझेदारी को सुदृढ़ करना।
-
एएनआरएफ और एआईसीटीई जैसी राष्ट्रीय पहलों को गति देना।
-
विकसित भारत@2047 के लक्ष्य के अनुरूप राष्ट्रीय नवाचार रणनीति को एक दिशा देना।
सम्मेलन का आयोजन और निवेश योजना
यह सम्मेलन वाधवानी फाउंडेशन और सरकारी संस्थानों के संयुक्त निवेश से संचालित होगा, जिसमें लगभग 1,400 करोड़ रुपये की सहयोगी परियोजना शामिल है। यह भारत को एक नवाचार महाशक्ति के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।