एआई क्लाउड से सुरक्षित होगा भारत का डेटा; सेना ने पेश किया सुरक्षित चैटिंग और ट्रांसलेशन प्लेटफॉर्म
भारतीय सेना ने इंडिया एआई समिट में स्वदेशी ड्यूल-यूज तकनीकें पेश की हैं। इनमें आपदा चेतावनी, सुरक्षित क्लाउड और एआई एग्जाम सिस्टम शामिल हैं।
नई दिल्ली : भारतीय सेना ने इंडिया एआई समिट में दिखाया कि अब वह सिर्फ हथियारों की ताकत पर नहीं, बल्कि डेटा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर भी तेजी से आगे बढ़ रही है। सेना ने कई ऐसी स्वदेशी एआई तकनीकें पेश कीं, जिनका फायदा सिर्फ सेना को ही नहीं बल्कि आम लोगों को भी मिल सकता है।
यही वजह है कि इन्हें ड्यूल-यूज तकनीक कहा जा रहा है, यानी एक ही तकनीक रक्षा और नागरिक दोनों कामों में उपयोगी है। सेना ने यहां एक ऐसा एआई एग्जाम सिस्टम प्रदर्शित किया, जो परीक्षा की कॉपी जांचने से लेकर नंबर देने और फीडबैक तैयार करने तक का काम खुद कर सकता है।
भारतीय सेना के मुताबिक, यह स्कूलों, कॉलेजों और ट्रेनिंग संस्थानों के लिए बहुत काम की चीज साबित हो सकती है। एक और खास सिस्टम यहां मौजूद है, जो किसी भी इलाके की रियल टाइम जानकारी एक जगह पर दिखा देता है। इससे ऑपरेशन की प्लानिंग और मॉनिटरिंग आसान हो जाती है। यही तकनीक आपदा के समय कंट्रोल रूम, स्मार्ट सिटी सिस्टम या इमरजेंसी रिस्पॉन्स में भी मदद कर सकती है।
सेना ने एक सुरक्षित एआई क्लाउड प्लेटफॉर्म भी पेश किया है। यहां इस प्लेटफॉर्म में चैट, डॉक्यूमेंट बनाना, अनुवाद करना, प्रेजेंटेशन तैयार करना जैसे काम एक ही सिस्टम से किए जा सकते हैं। खास बात यह है कि इसमें डेटा पूरी तरह सुरक्षित रहता है और बाहर लीक होने का खतरा नहीं होता। यहां प्रदर्शित सबसे अहम तकनीकों में से एक है आपदा की पहले से चेतावनी देने वाला सिस्टम।
यह भूस्खलन, बाढ़ और हिमस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाओं की तीन से सात दिन पहले तक सटीक जानकारी दे सकता है। इससे सीमावर्ती इलाकों में तैनात जवानों के साथ-साथ आम लोगों और प्रशासन को भी समय रहते तैयारी का मौका मिल सकता है।
भारतीय सेना के मुताबिक, चेहरा पहचानने वाली एआई तकनीक भी यहां दिखाई गई है। यह वह तकनीक है जो फोटो और वीडियो के जरिए तुरंत पहचान कर सकती है। इसका उपयोग सुरक्षा, एयरपोर्ट, लापता लोगों की तलाश और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में किया जा सकता है। वहीं, यहां एक मोबाइल आधारित सिस्टम ऐसा है जो किसी भी घटना की लोकेशन, तस्वीर और समय की जानकारी तुरंत भेज देता है।
इससे आपदा के समय राहत और बचाव कार्य तेज हो सकते हैं। ड्राइवर की थकान पकड़ने वाली मशीन भी यहां पेश की गई, जो गाड़ी चलाते समय झपकी आने पर तुरंत अलर्ट देती है। इससे सड़क हादसों को कम करने में मदद मिल सकती है।
इसके अलावा, सेना ने ऐसा पोर्टेबल एआई सिस्टम भी दिखाया, जो दूर-दराज या नेटवर्क से कटे इलाकों में भी काम कर सकता है। यह सीमावर्ती क्षेत्रों, आपदा प्रभावित इलाकों या ग्रामीण इलाकों के लिए बेहद उपयोगी है।
वाहनों की ट्रैकिंग से लेकर नकली यानी डीपफेक वीडियो पकड़ने वाली तकनीक और मोबाइल व वेबसाइट को साइबर हमलों से बचाने वाले एआई सिस्टम भी समिट में प्रदर्शित किए गए।
दरअसल, भारतीय सेना का फोकस साफ है: देश की सुरक्षा मजबूत करने के साथ-साथ ऐसी तकनीकें तैयार करना जो आम नागरिकों की सुरक्षा, डिजिटल सुरक्षा और आपदा प्रबंधन में भी काम आएं। इंडिया एआई समिट में पेश की गई ये पहलें दिखाती हैं कि सेना अब तकनीकी रूप से एक नए दौर में प्रवेश कर चुकी है।