सद्भाव का 'वैश्विक प्रकाशस्तंभ': अबू धाबी के BAPS हिंदू मंदिर ने पूरे किए 2 गौरवशाली वर्ष; 100 देशों के 40 लाख श्रद्धालु बने साक्षी
अबू धाबी के BAPS हिंदू मंदिर ने 14 फरवरी 2026 को 2 वर्ष पूरे किए। 40 लाख से अधिक आगंतुकों और 100 देशों की भागीदारी के साथ यह मंदिर शांति का प्रतीक बन गया है।
अबू धाबी : अबू धाबी स्थित बीएपीएस हिंदू मंदिर ने 14 फरवरी 2026 को अपने स्थापना के दो वर्ष पूर्ण किए। इन दो वर्षों में यह मंदिर आध्यात्मिक सेवा, सांस्कृतिक समरसता और वैश्विक सौहार्द का उज्ज्वल केंद्र बनकर उभरा है। परम पूज्य महंत स्वामी महाराज के करकमलों से उद्घाटित इस दिव्य मंदिर में अब तक 100 से अधिक देशों के चार मिलियन (40 लाख) से अधिक श्रद्धालु एवं आगंतुक पधार चुके हैं।
विशेष वर्षगांठ समारोह में 8,000 से अधिक भक्तों, गणमान्य अतिथियों, राजनयिकों और परिवारों ने सहभागिता की। कार्यक्रम का विषय था – “मंदिर: हमारा परिवार, हमारा भविष्य।” यह आयोजन इस तथ्य को रेखांकित करता है कि मंदिर केवल पूजा का स्थान नहीं, बल्कि परिवारों को सशक्त करने, समुदायों को जोड़ने और विविध संस्कृतियों के बीच सद्भाव स्थापित करने वाली जीवंत संस्था है।
महंत स्वामी महाराज के प्रतिनिधि के रूप में स्वामी ब्रह्मविहारीदासजी ने मुख्य संबोधन दिया। उन्होंने कहा, “बालक एक वर्ष में चलना प्रारंभ करता है, पर दो वर्ष में बोलना। उसी प्रकार मंदिर ने अब संसार से संवाद प्रारंभ किया है और उसका संदेश है सद्भाव।” उनका संदेश विश्वभर से आने वाले राजदूतों, धर्मगुरुओं, पर्यटकों और समुदाय प्रतिनिधियों के हृदयों में समान रूप से प्रतिध्वनित हुआ है।
इस अवसर पर यूएई में सांस्कृतिक समरसता और एकता के समर्थक माननीय शेख नहयान बिन मुबारक अल नहयान का सम्मान किया गया। अपने संबोधन में उन्होंने मंदिर को “साझा मानवीय मूल्यों का सशक्त प्रतीक” बताया और इसे भारत एवं संयुक्त अरब अमीरात के बीच गहरी और स्थायी मित्रता का प्रतिबिंब कहा। उन्होंने आशा व्यक्त की कि यह मंदिर आने वाली पीढ़ियों को आध्यात्मिक शक्ति, नैतिक मार्गदर्शन और सामुदायिक उत्थान प्रदान करता रहेगा।
कार्यक्रम में “मंदिर संवाद” की विशेष श्रृंखला प्रस्तुत की गई, जिसमें मंदिर के वैश्विक और सामाजिक प्रभाव को रेखांकित किया गया। राजनयिक प्रतिनिधियों ने इसे परंपरा और आधुनिक कूटनीति के मध्य एक सेतु बताया। परिवारों ने साझा किया कि यह मंदिर उनके लिए आध्यात्मिक घर बन गया है, जहां परंपराएं खुलकर जी जाती हैं और सेवा के माध्यम से पारिवारिक संबंध सुदृढ़ होते हैं।
बच्चों ने चार सामूहिक संकल्पों — स्वयं में सकारात्मकता, पारिवारिक मूल्य, राष्ट्रीय सद्भाव और पर्यावरणीय उत्तरदायित्व का नेतृत्व किया, जो मंदिर की भावी पीढ़ियों के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
परंपरागत शिल्पकला और आधुनिक स्थायित्व का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता यह मंदिर सभ्यताओं के सहयोग का जीवंत उदाहरण है। परंतु इसकी वास्तविक शक्ति उसके प्रभाव में निहित है- आस्था को प्रेरित करना, परिवारों को सशक्त बनाना, समाज की सेवा करना और विश्व में शांति एवं सद्भाव को बढ़ावा देना।
अपने तृतीय वर्ष में प्रवेश करते हुए बीएपीएस हिंदू मंदिर इस विश्वास को सशक्त करता है कि आस्था, सेवा और एकता के माध्यम से एक अधिक आशावान और समरस विश्व का निर्माण संभव है।