कम उम्र की महिलाओं में बढ़ रहा सर्वाइकल कैंसर का खतरा जानें सिम्पटम्स और ट्रीटमेंट
Cervical Cancer इन दिनों बहुत ही ज्यादा बढ़ गया है जिसके चलते वैक्सीनेशन के प्रति जागरूकता फैलाई जा रही है इसके शुरुआती सिंप्टम्स अगर आप पहचान ले तो जल्दी बच सकते हैं।
कम उम्र की महिलाओं में बढ़ रहा सर्वाइकल कैंसर का खतरा जानें सिम्पटम्स और ट्रीटमेंट
आजकल कम उम्र की महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे है खासकर भारत में जहां यह महिलाओं के लिए बड़ा खतरा बन गया है। अगर समय रहते इसका पता चल जाता है तो इसका इलाज बहुत जल्दी हो जाता है जैसे-जैसे टाइम बढ़ता है तो यह अपने हायर स्टेज पर पहुंच जाती है जहां यह बहुत गंभीर बीमारी बन जाती है।
क्या है सर्वाइकल कैंसर
सर्वाइकल कैंसर गर्भाशय के निचले हिस्से यानी सर्विक्स में होने वाली खतरनाक बीमारी है जो HPV वायरस के संक्रमण से मुख्य रूप से फैलती है। यह बीमारी धीरे-धीरे बढ़ती है और शुरुआत में कोई खास लक्षण नहीं दिखते है इसलिए इसके खिलाफ जागरूकता होना जरूरी है। वहीं भारत में ग्रामीण इलाकों में यह ज्यादा नॉर्मल है क्योंकि स्क्रीनिंग की कमी रहती है।
कम उम्र में क्यों बढ़ रहे मामले
यह बीमारी कम उम्र में बहुत ज्यादा देखी जा रही है कम उम्र में सर्वाइकल कैंसर के केस बढ़ने का मैन कारण HPV इन्फेक्शन है जो असुरक्षित यौन संबंधों से फैलता है।
• इसके कई कारण हो सकते है जिस में कम उम्र में शादी, कई पार्टनर और स्क्रीनिंग न कराना भी शामिल है।
जानें इसके मैन कारण
HPV संक्रमण के अलावा कम उम्र में पहला शारीरिक संबंध, धूम्रपान, कई बच्चे पैदा करना और कम शिक्षा का लेवल रिस्क बढ़ाते हैं। स्वच्छता की कमी और कई पार्टनर वाले साथी के वजह से भी यह जल्दी होता हैं।
• इसके प्रति जागरूकता ना होने की वजह से समय रहते इसका इलाज नहीं करा पाने पर यह प्रॉब्लम बढ़ जाती है।
पहचाने शुरुआती सिंप्टम्स
आपको से शुरुआती लक्षणों पर ध्यान देना चाहिए जिनमें शुरुआत में अनियमित माहवारी, सेक्स के बाद खून आना या बदबूदार सफेद डिस्चार्ज जैसे सिंप्टम्स दिखते हैं।
• कई बार पेट के निचले हिस्से में दर्द, पेशाब में जलन या अचानक वजन घटना भी इसके सिंप्टम्स हो सकते हैं। ये लक्षण नजरअंदाज नहीं करें क्योंकि जल्दी पता चलने पर इलाज ईजी होता है क्योंकि अगर कैंसर फैल जाए तो ब्लैडर या आंतों पर असर पड़ता है।
जानें इसके स्टेजेस
यह कैंसर स्टेज में होता है जिसमें पहला स्टेज इसका इनिशियल स्टेज होता है। स्टेज 1 में कैंसर सिर्फ सर्विक्स तक लिमिटेड रहता है। वहीं स्टेज 2 से 3 में इस में फैलाव होता है और स्टेज 4 में बाकी के अंग भी बहुत ज्यादा अफेक्टेड होने लगते हैं।
• अगर शुरू में ही आपको पता चल जाता है तो 85% चांस है कि यह जल्दी सही हो जाएगा।
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ट्रीटमेंट ऑप्शंस
इस के प्रारंभिक स्टेज में सर्जरी जैसे हिस्टेरेक्टॉमी की जाती है। इस के अलावा रेडिएशन और कीमोथेरेपी का कॉम्बिनेशन एडवांस्ड मामलों में यूज होता है। साइबरनाइफ या टारगेटेड थेरेपी नई टेक्नीक हैं जो साइड इफेक्ट्स कम करती हैं।
जानें कैसे होगा ट्रीटमेंट
अगर इसके शुरुआती ट्रीटमेंट के बाद की जाए तो इसमें पैप स्मीयर टेस्ट या HPV डीएनए जांच से शुरुआती स्टेज ने ही इस का पता लगाया जा सकता है। VIA (एसिड से जांच) ग्रामीण एरिया के लिए सस्ता और आसान है। भारत में सरकारी स्क्रीनिंग कार्यक्रम भी चल रहे हैं।
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