बजट 2026-27: 'ग्लोबल नॉलेज हब' बनने की राह पर भारत, क्या शिक्षा बजट में होगा ऐतिहासिक इजाफा?
1 फरवरी को निर्मला सीतारमण पेश करेंगी केंद्रीय बजट। डिजिटल लाइब्रेरी, AI लर्निंग और निजी विश्वविद्यालयों के लिए CSR फंड जैसे क्रांतिकारी बदलावों पर टिकी हैं शिक्षा जगत की नजरें।
नई दिल्ली : केंद्रीय बजट 2026-27 पेश होने में अब कुछ ही दिन शेष हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा 1 फरवरी को पेश किए जाने वाले इस बजट से शिक्षा क्षेत्र को व्यापक उम्मीदें हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत को वैश्विक स्तर पर 'इनोवेशन और रिसर्च हब' के रूप में स्थापित होना है, तो शिक्षा पर होने वाले खर्च को मौलिक रूप से बढ़ाना होगा।
GDP का 10% शिक्षा पर खर्च करने की मांग
शिक्षाविदों का तर्क है कि दुनिया के विकसित राष्ट्र अपनी जीडीपी (GDP) का औसतन 10 प्रतिशत शिक्षा पर खर्च करते हैं, जबकि भारत में यह आंकड़ा फिलहाल 4-5 प्रतिशत के बीच है। भारत की विशाल युवा जनसांख्यिकी को देखते हुए, इस बजट में आवंटन बढ़ाने की पुरजोर मांग की जा रही है ताकि 'डिजिटल डिवाइड' को खत्म किया जा सके।