हाईकोर्ट-सुप्रीम कोर्ट पर 'विवादित' टिप्पणी! राजा वड़िंग ने SC आयोग चेयरमैन को दी कानूनी कार्रवाई की चेतावनी; कहा- "माफी मांगें गढ़ी"
पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने पंजाब राज्य अनुसूचित जाति (SC) आयोग के चेयरमैन जसवीर सिंह गढ़ी के एक बयान पर कड़ा ऐतराज जताया है। वड़िंग ने गढ़ी द्वारा न्यायपालिका के खिलाफ इस्तेमाल की गई भाषा को "गैर-जिम्मेदाराना" और "संवैधानिक मर्यादाओं का उल्लंघन" करार दिया है।
लुधियाना में राजनीतिक बयानबाजी को लेकर नया विवाद सामने आया है। पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने पंजाब राज्य अनुसूचित जाति आयोग के चेयरमैन जसवीर सिंह गढ़ी द्वारा उच्च न्यायालयों के संबंध में की गई टिप्पणी की कड़ी आलोचना की है। वड़िंग ने गढ़ी के उस बयान को “अत्यंत आपत्तिजनक और गैर-जिम्मेदाराना” करार दिया है, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर कहा था कि राजनेता “अपने पिता के पास चिल्लाते हुए हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट जाते हैं।”
राजा वड़िंग ने कहा कि भारत की संवैधानिक अदालतें नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा का सर्वोच्च मंच हैं और उन्हें किसी भी प्रकार के राजनीतिक व्यंग्य या हल्की टिप्पणी का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में न्यायपालिका की स्वतंत्रता और गरिमा सर्वोपरि है, और उस पर की गई इस तरह की टिप्पणी न्यायिक संस्थाओं की प्रतिष्ठा को आघात पहुंचाती है।
वड़िंग ने आरोप लगाया कि संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा इस प्रकार की भाषा का प्रयोग करना न केवल अनुचित है, बल्कि यह ‘क्रिमिनल कंटेम्प्ट’ की श्रेणी में भी आ सकता है। उनके अनुसार, जब कोई सार्वजनिक पदाधिकारी न्यायपालिका के प्रति असम्मानजनक शब्दों का उपयोग करता है, तो इससे आम जनता के बीच न्याय प्रणाली की साख प्रभावित होती है। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति आयोग के चेयरमैन जैसे संवेदनशील और जिम्मेदार पद पर रहते हुए ऐसे बयान देना संस्था की गरिमा और गंभीरता को कम करता है।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने मांग की कि जसवीर सिंह गढ़ी तुरंत अपने बयान को वापस लें और बिना शर्त सार्वजनिक रूप से माफी मांगें। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि ऐसा नहीं किया गया तो पार्टी आवश्यक कानूनी कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगी। वड़िंग ने कहा कि लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार है, लेकिन यह अधिकार संवैधानिक संस्थाओं के सम्मान की सीमा के भीतर ही प्रयोग किया जाना चाहिए।
इस घटनाक्रम ने राज्य की राजनीतिक फिजा को गरमा दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संवैधानिक संस्थाओं को लेकर की गई टिप्पणियां अक्सर गंभीर बहस को जन्म देती हैं, क्योंकि वे लोकतांत्रिक ढांचे के मूल सिद्धांतों से जुड़ी होती हैं। ऐसे में उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय के संदर्भ में की गई कोई भी विवादित टिप्पणी व्यापक प्रतिक्रिया का कारण बन सकती है।
वड़िंग ने यह भी कहा कि न्यायपालिका लोकतंत्र का महत्वपूर्ण स्तंभ है और उसे कमजोर करने वाली किसी भी प्रवृत्ति का विरोध किया जाना चाहिए। उन्होंने सभी जनप्रतिनिधियों और संवैधानिक पदाधिकारियों से संयमित और जिम्मेदार भाषा के उपयोग की अपील की।
फिलहाल इस बयान पर जसवीर सिंह गढ़ी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, यह मुद्दा आने वाले दिनों में राजनीतिक और कानूनी बहस का केंद्र बन सकता है।