UP Employment Scheme: यूपी में युवाओं के लिए 16 नए रोजगार केंद्र बनेंगे, एक ही जगह मिलेगा स्किल ट्रेनिंग, नौकरी और स्वरोजगार का मौका
UP Employment Scheme के तहत उत्तर प्रदेश में पहले चरण में 16 रोजगार एवं औद्योगिक केंद्र बनाए जाएंगे। यहां युवाओं को स्किल ट्रेनिंग, रोजगार, स्वरोजगार और उद्योग स्थापित करने की सुविधाएं एक ही जगह मिलेंगी।
BaluSingh Rajpurohit Official | Verified Expert • 27 Mar, 2026Editor
UP Employment Scheme: यूपी में युवाओं के लिए 16 नए रोजगार केंद्र बनेंगे, एक ही जगह मिलेगा स्किल ट्रेनिंग, नौकरी और स्वरोजगार का मौका
UP Employment Scheme के तहत उत्तर प्रदेश में पहले चरण में 16 रोजगार एवं औद्योगिक केंद्र बनाए जाएंगे। यहां युवाओं को स्किल ट्रेनिंग, रोजगार, स्वरोजगार और उद्योग स्थापित करने की सुविधाएं एक ही जगह मिलेंगी।
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16 July 2026
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UP Employment Scheme: यूपी में युवाओं के लिए 16 नए रोजगार केंद्र बनेंगे, एक ही जगह मिलेगा स्किल ट्रेनिंग, नौकरी और स्वरोजगार का मौका
लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार राज्य के युवाओं को कौशल प्रशिक्षण, रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ने के लिए एक नई पहल शुरू करने जा रही है। UP Employment Scheme के तहत प्रदेश में पहले चरण में 16 सरदार वल्लभभाई पटेल रोजगार एवं औद्योगिक क्षेत्र (SVPEIZ) विकसित किए जाएंगे। सरकार का उद्देश्य इन केंद्रों को ऐसे प्लेटफॉर्म के रूप में तैयार करना है, जहां युवाओं को प्रशिक्षण, रोजगार, उद्योग स्थापना और उद्यमिता से जुड़ी सभी सुविधाएं एक ही स्थान पर मिल सकें।
इस परियोजना की घोषणा उत्तर प्रदेश दिवस के अवसर पर की गई थी। अब इसे लागू करने की दिशा में तैयारियां तेज हो गई हैं। अधिकारियों का कहना है कि यह मॉडल भविष्य की औद्योगिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है, ताकि प्रदेश के युवाओं को बदलते रोजगार बाजार के अनुरूप कौशल उपलब्ध कराया जा सके।
UP Employment Scheme के तहत पहले चरण में बनेंगे 16 केंद्र
सरकार की योजना के अनुसार पहले चरण में प्रदेश के विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में 16 एसवीपीईआईजेड केंद्र स्थापित किए जाएंगे।
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इनमें सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग (MSME) और यूपीसीडा के माध्यम से पांच-पांच केंद्र विकसित किए जाएंगे। वहीं यूपीईडा और यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) दो-दो केंद्र स्थापित करेंगे। इसके अलावा ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण और गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण एक-एक केंद्र विकसित करेंगे।
इन केंद्रों का उद्देश्य केवल उद्योग स्थापित करना नहीं, बल्कि युवाओं को उद्योगों की जरूरत के अनुसार प्रशिक्षित कर रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ना है।
प्रमुख सचिव, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम शशि भूषण लाल सुशील के अनुसार वर्ष 2017 के बाद उत्तर प्रदेश में निवेश और औद्योगिक गतिविधियों में तेजी आई है। प्रदेश में लगातार नए औद्योगिक क्षेत्र विकसित हो रहे हैं और देश-विदेश की कंपनियां निवेश कर रही हैं।
उन्होंने कहा कि नई तकनीकों के विस्तार के साथ उद्योगों को प्रशिक्षित और कुशल मानव संसाधन की आवश्यकता बढ़ेगी। इसी को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर इस परियोजना की रूपरेखा तैयार की गई है।
सरकार का लक्ष्य केवल प्रशिक्षण देना नहीं, बल्कि युवाओं को सीधे रोजगार और उद्यमिता से जोड़ना है।
प्रदेश को 9 औद्योगिक एवं कौशल विकास जोन में बांटा जाएगा
UP Employment Scheme के तहत उत्तर प्रदेश को स्थानीय उद्योगों, प्राकृतिक संसाधनों और निवेश की संभावनाओं के आधार पर 9 हब एंड स्पोक जोन में विकसित किया जाएगा।
इन जोनों में गौतमबुद्ध नगर, गाजियाबाद और हापुड़ को एक समूह में रखा गया है। इसके अलावा मेरठ, सहारनपुर, बागपत और बुलंदशहर का अलग औद्योगिक जोन होगा।
इसी तरह मुरादाबाद-बरेली, आगरा-अलीगढ़, लखनऊ-अयोध्या, कानपुर-प्रयागराज, चित्रकूट-झांसी-विंध्याचल, वाराणसी-आजमगढ़ और गोरखपुर-बस्ती-देवीपाटन मंडलों को भी अलग-अलग औद्योगिक एवं कौशल विकास जोन के रूप में विकसित किया जाएगा।
हर जोन में वहां के प्रमुख उद्योगों और भविष्य के निवेश को ध्यान में रखते हुए प्रशिक्षण और औद्योगिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
एक ही परिसर में मिलेगी स्किल ट्रेनिंग, नौकरी और उद्यमिता की सुविधा
सरकार इन केंद्रों को वन स्टॉप इंडस्ट्रियल, स्किल एंड एम्प्लॉयमेंट इकोसिस्टम के रूप में विकसित करेगी।
यहां युवाओं के लिए स्किल डेवलपमेंट सेंटर, रोजगार सहायता केंद्र और उद्यमिता सहायता केंद्र स्थापित किए जाएंगे।
इसके अलावा डिजिटल साक्षरता, विदेशी भाषाओं और विभिन्न तकनीकी क्षेत्रों का प्रशिक्षण भी उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि युवा राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय रोजगार बाजार के लिए भी तैयार हो सकें।
उद्यमियों के लिए भी आसान होगी उद्योग स्थापना
परियोजना के तहत प्लग एंड प्ले मॉडल को भी लागू किया जाएगा। इसका मतलब है कि उद्यमियों को पहले से तैयार औद्योगिक परिसर उपलब्ध कराया जाएगा, जहां बिजली, पानी, सड़क और अन्य बुनियादी सुविधाएं पहले से मौजूद होंगी।
इससे उद्योग स्थापित करने में लगने वाला समय कम होगा और नए निवेशकों को तेजी से उत्पादन शुरू करने में मदद मिलेगी।
सरकार का मानना है कि इससे निवेश बढ़ेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
जरूरत पड़ने पर बनेंगी बहुमंजिला औद्योगिक इकाइयां
जिन क्षेत्रों में भूमि की उपलब्धता सीमित होगी, वहां बहुमंजिला औद्योगिक परिसर विकसित किए जाएंगे। इसके लिए फ्लैटेड फैक्ट्री मॉडल अपनाया जाएगा, जिसमें एक ही भवन के अलग-अलग हिस्सों में कई सूक्ष्म और मध्यम उद्योग संचालित किए जा सकेंगे।
इस मॉडल से कम जमीन में अधिक औद्योगिक इकाइयों को स्थान मिल सकेगा और शहरी क्षेत्रों में औद्योगिक विकास को गति मिलेगी।
उद्योगों की भागीदारी से चलेगी पूरी व्यवस्था
प्रत्येक हब के संचालन के लिए स्पेशल पर्पज व्हीकल (SPV) बनाया जाएगा। संबंधित औद्योगिक क्षेत्र के प्रमुख निवेशक को इसका अध्यक्ष बनाया जाएगा।
सरकार का मानना है कि उद्योगों की सीधी भागीदारी से प्रशिक्षण कार्यक्रम वास्तविक जरूरतों के अनुरूप तैयार किए जा सकेंगे और युवाओं को बेहतर रोजगार अवसर मिलेंगे।
गुजरात और महाराष्ट्र के मॉडल का अध्ययन कर तैयार हुई योजना
इस परियोजना की रूपरेखा तैयार करने से पहले उत्तर प्रदेश सरकार की टीम ने गुजरात और महाराष्ट्र का दौरा किया था।
टीम ने वहां टाटा समूह सहित विभिन्न औद्योगिक संस्थानों द्वारा विकसित कौशल विकास और औद्योगिक मॉडल का अध्ययन किया। इसके बाद उत्तर प्रदेश की आवश्यकताओं के अनुरूप यह नया मॉडल तैयार किया गया।
सरकार का कहना है कि परियोजना के विकास और संचालन में देश के प्रतिष्ठित औद्योगिक संस्थानों की भी भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।
निर्माण के साथ ही शुरू होगा कौशल प्रशिक्षण
जिन स्थानों पर भूमि उपलब्ध है, वहां जल्द निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा। वहीं जहां जमीन उपलब्ध नहीं है, वहां यूपीसीडा, यूपीईडा, यीडा और अन्य विकास प्राधिकरणों के सहयोग से भूमि उपलब्ध कराई जाएगी।
सरकार की योजना है कि भवन निर्माण पूरा होने का इंतजार किए बिना युवाओं का कौशल प्रशिक्षण शुरू कर दिया जाए, ताकि उद्योगों के शुरू होने तक प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार हो सके।
उत्तर प्रदेश को रोजगार और विनिर्माण हब बनाने की तैयारी
सरकार का कहना है कि UP Employment Scheme का उद्देश्य केवल औद्योगिक क्षेत्र विकसित करना नहीं है। इसे निवेश, कौशल विकास, रोजगार, नवाचार और उद्यमिता के साझा केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा।
यदि योजना तय समय पर लागू होती है, तो इससे प्रदेश के युवाओं को उद्योगों की जरूरत के अनुसार प्रशिक्षण मिलने के साथ रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी उपलब्ध होंगे। साथ ही उत्तर प्रदेश को देश के प्रमुख विनिर्माण और कौशल विकास केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में भी यह परियोजना महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।