13वें दिन भी नहीं थमा अतिथि शिक्षकों का आंदोलन, विधानसभा घेराव के दौरान पुलिस से हल्की झड़प
छत्तीसगढ़ में अतिथि शिक्षक नियमितीकरण, समान काम-समान वेतन और सेवा सुरक्षा की मांग को लेकर 13वें दिन भी हड़ताल पर डटे हैं। विधानसभा घेराव के दौरान पुलिस ने बैरिकेडिंग कर प्रदर्शनकारियों को रोका।
News Tv India हिंदी Official | Verified Expert • 27 Mar, 2026Editor
Jul 17, 2026 • 11:00 AM
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13वें दिन भी नहीं थमा अतिथि शिक्षकों का आंदोलन, विधानसभा घेराव के दौरान पुलिस से हल्की झड़प
छत्तीसगढ़ में अतिथि शिक्षक नियमितीकरण, समान काम-समान वेतन और सेवा सुरक्षा की मांग को लेकर 13वें दिन भी हड़ताल पर डटे हैं। विधानसभा घेराव के दौरान पुलिस ने बैरिकेडिंग कर प्रदर्शनकारियों को रोका।
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17 July 2026
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13वें दिन भी नहीं थमा अतिथि शिक्षकों का आंदोलन, विधानसभा घेराव के दौरान पुलिस से हल्की झड़प
छत्तीसगढ़ में अतिथि शिक्षकों का विधानसभा घेराव, नियमितीकरण और समान वेतन की मांग पर 13वें दिन भी जारी रही हड़ताल
13वें दिन भी नहीं थमा आंदोलन, हजारों शिक्षक पहुंचे दुर्ग
छत्तीसगढ़ में अतिथि शिक्षकों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। नियमितीकरण, समान काम-समान वेतन, सेवा सुरक्षा और रोजगार की स्थिरता जैसी मांगों को लेकर राज्य अतिथि शिक्षक विद्या मितान संघ के बैनर तले चल रही अनिश्चितकालीन हड़ताल सोमवार को 13वें दिन भी जारी रही। प्रदेश के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में अतिथि शिक्षक दुर्ग के हिंदी भवन पहुंचे, जहां से उन्होंने विधानसभा घेराव के लिए पैदल मार्च शुरू किया।
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आंदोलन को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने पहले से ही सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे। विधानसभा की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को जेल तिहार चौक के पास बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया गया।
विधानसभा मार्च के दौरान पुलिस से हल्की धक्का-मुक्की
बैरिकेडिंग के बाद कुछ प्रदर्शनकारी आगे बढ़ने का प्रयास करने लगे, जिससे पुलिस और अतिथि शिक्षकों के बीच हल्की धक्का-मुक्की की स्थिति बनी। हालांकि प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा और किसी बड़े विवाद की सूचना नहीं है। आंदोलनकारी शिक्षकों ने अनुशासित तरीके से अपनी मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन जारी रखा।
11 वर्षों से दे रहे सेवाएं, अब तक नहीं हुआ नियमितीकरण
संघ ने सरकार पर लगाया उपेक्षा का आरोप
राज्य अतिथि शिक्षक विद्या मितान संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि प्रदेश के हजारों अतिथि शिक्षक पिछले करीब 11 वर्षों से शासकीय विद्यालयों में सेवाएं दे रहे हैं। गणित, विज्ञान, भौतिकी, रसायन विज्ञान और अंग्रेजी जैसे विषयों के विशेषज्ञ शिक्षक बस्तर और सरगुजा जैसे दूरस्थ एवं आदिवासी इलाकों में भी शिक्षा व्यवस्था संभाल रहे हैं।
संघ का आरोप है कि लंबे समय से सेवाएं देने के बावजूद उन्हें आज तक नियमित नियुक्ति का लाभ नहीं मिला। उनका कहना है कि सरकार के समक्ष कई बार मांगें रखने के बावजूद अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है, जिससे शिक्षकों और उनके परिवारों में निराशा बढ़ रही है।
हड़ताल से सरकारी स्कूलों की पढ़ाई पर असर
संघ के अनुसार 1 जुलाई से जारी हड़ताल का असर प्रदेश के कई सरकारी स्कूलों में दिखाई देने लगा है। विशेष रूप से उन विद्यालयों में पढ़ाई प्रभावित हो रही है, जहां विषय विशेषज्ञ के रूप में अतिथि शिक्षक ही छात्रों को पढ़ा रहे थे।
शिक्षकों का कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो इसका सीधा असर विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ेगा।
मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने का ऐलान
नियमितीकरण और सेवा सुरक्षा पर अड़े शिक्षक
प्रदर्शनकारी शिक्षकों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी प्रमुख मांगें—नियमितीकरण, समान काम के लिए समान वेतन और सेवा सुरक्षा—पूरी नहीं होतीं, तब तक अनिश्चितकालीन हड़ताल और आंदोलन जारी रहेगा।
संघ ने सरकार से जल्द वार्ता कर समाधान निकालने की अपील की है ताकि शिक्षकों के साथ-साथ विद्यार्थियों का भी शैक्षणिक नुकसान न हो।