Gyanvapi Dispute: ज्ञानवापी, मथुरा और संभल विवाद में सुप्रीम कोर्ट की बड़ी पहल, विशेष लोक अदालत में सुलह की कोशिश
Gyanvapi Dispute समेत मथुरा श्रीकृष्ण जन्मभूमि और संभल विवाद में सुलह की कोशिश तेज हो सकती है। 21 से 23 अगस्त तक सुप्रीम कोर्ट की विशेष लोक अदालत आयोजित होगी।
BaluSingh Rajpurohit Official | Verified Expert • 27 Mar, 2026Editor
Jul 12, 2026 • 11:16 PM | नई दिल्ली Last Edited By:News Tv India हिंदी
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BaluSingh Rajpurohit
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Gyanvapi Dispute: ज्ञानवापी, मथुरा और संभल विवाद में सुप्रीम कोर्ट की बड़ी पहल, विशेष लोक अदालत में सुलह की कोशिश
Gyanvapi Dispute समेत मथुरा श्रीकृष्ण जन्मभूमि और संभल विवाद में सुलह की कोशिश तेज हो सकती है। 21 से 23 अगस्त तक सुप्रीम कोर्ट की विशेष लोक अदालत आयोजित होगी।
“Gyanvapi Dispute: ज्ञानवापी, मथुरा और संभल विवाद में सुप्रीम कोर्ट की बड़ी पहल, विशेष लोक अदालत में सुलह की कोशिश”
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12 July 2026
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Image courtesy : AI ( Gyanvapi Dispute और मंदिर मस्जिद मामलों में विशेष लोक अदालत )
वाराणसी के ज्ञानवापी विवाद से लेकर मथुरा श्रीकृष्ण जन्मभूमि और संभल से जुड़े मंदिर-मस्जिद मामलों में अब बातचीत और आपसी सहमति से समाधान तलाशने की कोशिश हो सकती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक इन संवेदनशील मामलों से जुड़े पक्षों को विशेष लोक अदालत की प्रक्रिया के लिए नोटिस भेजे गए हैं।
सुप्रीम कोर्ट की ‘समाधान समारोह-2026’ पहल के तहत 21, 22 और 23 अगस्त को विशेष लोक अदालत आयोजित की जानी है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य आपसी सहमति से निपटाए जा सकने वाले लंबित मामलों में पक्षकारों को बातचीत का अवसर देना है।
Gyanvapi Dispute में सुलह की कोशिश, 14 जुलाई को शुरुआती वार्ता
ज्ञानवापी विवाद से जुड़े पक्षों के बीच 14 जुलाई को वाराणसी में शुरुआती सुलह वार्ता होने की रिपोर्ट है। इसका मकसद अगस्त में प्रस्तावित विशेष लोक अदालत से पहले बातचीत की संभावनाओं को समझना बताया जा रहा है।
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रिपोर्ट्स के अनुसार हिंदू और मुस्लिम पक्षों को इस प्रक्रिया के संबंध में नोटिस जारी किए गए हैं। हालांकि किसी भी समझौते का रास्ता दोनों पक्षों की सहमति पर निर्भर करेगा।
विशेष लोक अदालत में 21 से 23 अगस्त तक होगी प्रक्रिया
सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक ‘समाधान समारोह-2026’ की शुरुआत 21 अप्रैल से हुई है। इसका समापन 21, 22 और 23 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट परिसर में विशेष लोक अदालत के आयोजन के साथ होगा।
इस पहल में सुप्रीम कोर्ट में लंबित और सुलह योग्य मामलों को आपसी बातचीत के जरिए निपटाने की कोशिश की जाएगी। पक्षकार पूर्व-सुलह बैठकों में व्यक्तिगत या वर्चुअल माध्यम से भी शामिल हो सकते हैं।
ज्ञानवापी के साथ मथुरा और संभल विवाद की चर्चा
रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि ज्ञानवापी के अलावा मथुरा श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद और संभल से जुड़े धार्मिक स्थल विवाद के पक्षकारों को भी प्रक्रिया से जोड़ने की कोशिश की जा रही है।
ये तीनों मामले लंबे समय से कानूनी और राजनीतिक चर्चा के केंद्र में रहे हैं। अलग-अलग पक्षों के अपने दावे हैं और कई मुद्दे अदालतों में विचाराधीन हैं।
ऐसे में विशेष लोक अदालत की पहल को सीधे किसी पक्ष के दावे पर फैसला नहीं माना जाना चाहिए। इसका उद्देश्य बातचीत के जरिए सहमति की संभावना तलाशना है।
Gyanvapi Dispute क्या है?
वाराणसी का ज्ञानवापी परिसर काशी विश्वनाथ मंदिर से सटा हुआ है। परिसर से जुड़े पूजा अधिकार, सर्वे और धार्मिक दावों को लेकर अलग-अलग अदालतों में कानूनी कार्यवाही चली है।
हिंदू पक्ष और मुस्लिम पक्ष के अपने-अपने कानूनी दावे हैं। मामला संवेदनशील होने के कारण अदालतों के आदेश और आधिकारिक रिकॉर्ड ही इससे जुड़े तथ्यों की पुष्टि का प्रमुख आधार हैं।
संभल विवाद में भी दोनों पक्षों के अलग दावे
संभल से जुड़े मामले में धार्मिक स्थल और परिसर की भूमि को लेकर विवाद सामने आया है। उत्तर प्रदेश सरकार और मस्जिद कमेटी की ओर से अदालत में अलग-अलग दावे रखे गए हैं।
कुएं और भूमि की स्थिति को लेकर भी पक्षों में मतभेद है। सरकार की ओर से पूर्व में अदालत में अपना पक्ष रखा गया है, जबकि मस्जिद कमेटी के दावे अलग रहे हैं।
मामला न्यायिक प्रक्रिया में होने के कारण किसी भी आरोप या दावे को अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता।
मथुरा श्रीकृष्ण जन्मभूमि विवाद भी लंबे समय से अदालत में
मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर से सटे शाही ईदगाह परिसर को लेकर भूमि और धार्मिक अधिकारों से जुड़े मुकदमे लंबे समय से चर्चा में हैं।
हिंदू पक्ष की ओर से परिसर को लेकर विभिन्न दावे किए गए हैं। दूसरी ओर मुस्लिम पक्ष ने भी अदालत में अपना कानूनी पक्ष रखा है।
अब यदि पक्षकार विशेष लोक अदालत की सुलह प्रक्रिया में आगे बढ़ते हैं तो बातचीत के जरिए किसी सहमति की संभावना तलाशी जा सकती है।
क्यों अहम है Supreme Court की Special Lok Adalat?
विशेष लोक अदालत का मूल उद्देश्य लंबित और सुलह योग्य मामलों में पक्षकारों को आपसी सहमति से विवाद समाप्त करने का अवसर देना है।
ज्ञानवापी, मथुरा और संभल जैसे धार्मिक रूप से संवेदनशील विवादों में बातचीत की कोई भी पहल महत्वपूर्ण मानी जाएगी। हालांकि समाधान तभी संभव है, जब संबंधित पक्ष स्वेच्छा से किसी सहमति पर पहुंचें।