डेली ब्रश ना करने की लापरवाही से हो सकते है पार्किंसन डिजीज के शिकार
Parkinson Disease इन दिनों बहुत ही तेजी से बढ़ रहा है कई बार लोग इस बीमारी का पता नहीं लगा पाते है इसके उपाय और इसके सिंप्टम्स के बारे में आपको पता होना चाहिए।
डेली ब्रश ना करने की लापरवाही से हो सकते है पार्किंसन डिजीज के शिकार
अगर आप भी ब्रश करने में आलस करते हैं या फिर अपने दांत साफ करने को आगे डाल देते हैं तो इस आलस की वजह से आपको पार्किंसन जैसी गंभीर बीमारी हो सकती है ज्यादातर आपकी दिमाग को बहुत ही बुरी तरीके से इफेक्ट कर सकती है आखिर यह बीमारी क्या होती है और किस तरह से यह बढ़ती है इसके बारे में डिटेल्स में आपको इस आर्टिकल में बताएंगे।
ब्रश न करने का सीधा कनेक्शन
ब्रश न करने पर यह सिर्फ हमारे मुंह को नुकसान नहीं पहुंचता है बल्कि यह हमारे शरीर के बाकी पार्ट्स से भी जुड़ा होता है। मुंह में स्ट्रेप्टोकोकस म्यूटन्स जैसे बैक्टीरिया ब्रश न करने से बढ़ते हैं जो आंतों तक पहुंचकर ब्रेन को नुकसान पहुंचाते हैं।
• ये बैक्टीरिया गट ब्रेन एक्सिस के जरिए डोपामाइन सेल्स को मारते हैं जो पार्किंसन का मेन कारण है।
क्या है पार्किंसन रोग
पार्किंसन ब्रेन की न्यूरोलॉजिकल डिजीज है जिसमें डोपामाइन केमिकल की कमी से बॉडी की प्रोसेस बिगड़ जाती है। ये धीरे-धीरे बढ़ता है और ज्यादातर 50 साल से ऊपर वालों को होता है। यह पूरी तरह ठीक नहीं होता है लेकिन शुरुआती कदम से इसे कंट्रोल किया जा सकता है।
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जानें इसके सिंप्टम्स
अगर इसके सिंप्टम्स की बात करें तो पार्किंसन के शुरुआती सिम्टम्स में हाथ पैरों में कंपन होते है खासकर आराम के समय और गंध न आने का एहसास होता है।
• ये सिंप्टम्स मुंह के खराब हेल्थ से जुड़े हो सकते हैं। अगर आप जल्दी इन सिम्टम्स को कैच कर लेते हैं और इसका ट्रीटमेंट लेना शुरू करते हैं तो यह बहुत ही जल्दी सही हो जाता है।
जानें बढ़े हुए सिम्पटम्स
जब यह प्रॉब्लम बहुत ज्यादा बढ़ती है तो उसकी सिम्टम्स आपको अलग से ही दिख जाएंगे। इस में हाथों में ट्रेमर, मांसपेशियों में जकड़न, चलने में धीमापन और बार-बार गिरना पार्किंसन के बड़े सिम्पटम्स हैं।
• इस से चेहरा भावहीन हो जाता है और बोलने में रुकावट भी होने लगती है। ये सब मुंह के बैक्टीरिया से बढ़ सकते हैं।
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बैक्टीरिया से ब्रेन पर असर
ये बैक्टीरिया आंतों में ImP नामक जहरीला एलीमेंट बनाते हैं जो खून से ब्रेन तक जाता है। वहां डोपामाइन न्यूरॉन्स मरने लगते हैं जिससे पार्किंसन शुरू हो जाता है।
• साइंटिफिक स्टडी अप्रूव करती है कि जिन्हें भी पार्किंसन होता है उनकी आंतों में यह वाले बैक्टीरिया बहुत ही ज्यादा क्वांटिटी में पाए जाते हैं।
बचाव के आसान उपाय
अगर आप इस प्रॉब्लम से बचना चाहते हैं तो उसके लिए आपको कुछ आसान से उपाय अपनाने होंगे जिनमें आपको रोज कम से कम दो बार ब्रश करना चाहिए।
• इसके अलावा हर 6 महीने में अपने डेंटिस्ट से चेकअप भी करवाना चाहिए ताकि अगर कोई प्रॉब्लम है तो आपको पहले ही पता चल जाए इसके साथ ही प्रोबायोटिक्स और फाइबर वाली डाइट से आंत साफ रखें।
डाइट और व्यायाम
आपको अपनी डाइट काफी हेल्दी रखनी चाहिए इसके साथ ही अगर हो सके तो आप व्यायाम को भी अपने डेली रूटीन में जरूर शामिल करें यह आपके हेल्थ के लिए बहुत ही ज्यादा बेनिफिशियल रहती है। अगर पार्किंसन फैमिली में हो तो जेनेटिक टेस्ट करवाएं।
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