“भारत की सोच से दुनिया को मिलेगी एकता की राह: आरएसएस सरकार्यवाह”
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24 April 2026
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मुख्य अंश
आरएसएस सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले ने वाशिंगटन में भारत के वैश्विक विजन पर प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि भारत की सभ्यतागत सोच दुनिया को एकजुट करने और शांतिपूर्ण व्यवस्था बनाने में सहायक हो सकती है।
होसबोले ने भौतिक प्रगति के साथ आध्यात्मिक मूल्यों के महत्व पर भी जोर दिया।
भारत की सभ्यतागत सोच वैश्विक एकता की कुंजी: होसबोले
वाशिंगटन : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले ने कहा है कि भारत की प्राचीन सभ्यतागत सोच में विश्व को एकजुट करने की अपार क्षमता है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि आज का भारत एक ऐसे निर्णायक मोड़ पर खड़ा है, जहाँ वह विश्व में अधिक शांतिपूर्ण और संतुलित व्यवस्था की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
वैश्विक मंच पर भारत का विजन
वाशिंगटन क्षेत्र में 'भारत का वैश्विक विजन और उभरते विश्व में उसकी भूमिका' विषय पर आयोजित एक विशेष रात्रिभोज कार्यक्रम को संबोधित करते हुए, होसबोले ने भारत के दृष्टिकोण को विस्तार से साझा किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत की सांस्कृतिक परंपराएं केवल अतीत का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि वे आज विश्व के सामने मौजूद गंभीर समस्याओं, जैसे सामाजिक विखंडन और पर्यावरणीय संकट, का समाधान भी प्रस्तुत कर सकती हैं।
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अपने संबोधन में होसबोले ने कहा, "भारत की सोच इस मूल सिद्धांत पर आधारित है कि संपूर्ण अस्तित्व में एक ही मूल एकता विद्यमान है। यह एकता प्रत्येक जीवित और निर्जीव वस्तु में व्याप्त है।" उन्होंने स्पष्ट किया कि यही सर्वव्यापी एकता का विचार भारत के वैश्विक दृष्टिकोण की आधारशिला है।
मूल्यों के संकट पर चिंता
दुनिया की वर्तमान स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए, होसबोले ने कहा कि मानव जाति ने भौतिक क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति की है, परंतु मूल्यों और नैतिकता के स्तर पर वह पिछड़ गई है। उन्होंने कहा, "हमारे पास वस्तुओं की बहुतायत हो गई है, लेकिन मूल्यों का क्षरण हुआ है। ज्ञान बढ़ा है, पर निर्णय लेने की क्षमता कम हुई है। विशेषज्ञों की फौज खड़ी है, पर समस्याएं भी बढ़ी हैं।"
उन्होंने भारत के दृष्टिकोण को विशिष्ट बताते हुए कहा कि यहाँ भौतिक विकास को आध्यात्मिक समझ के साथ समान महत्व दिया जाता है। होसबोले ने कहा, "भारत की सोच प्रकृति को माँ के रूप में देखती है। हमारी आवश्यकताएं पूरी होती हैं, परंतु लालच को बढ़ावा नहीं मिलता।"
विविधता का उत्सव
विविधता के विषय पर बोलते हुए, दत्तात्रेय होसबोले ने कहा कि इसे संघर्ष का कारण न मानकर, उत्सव के रूप में देखना चाहिए। उन्होंने कहा कि विविधता मानव समाज की असली सुंदरता है, और विभिन्न संस्कृतियों को अपनी पहचान बनाए रखते हुए सामंजस्यपूर्ण ढंग से एक साथ रहना चाहिए।
सत्य की ओर अग्रसर मार्ग
होसबोले ने आगे कहा कि मानव समाज ने हमेशा विभिन्न स्तरों पर संबंधों को समझने का प्रयास किया है - मानव-मानव, मानव-प्रकृति, और मानव-ईश्वर के बीच। अंततः, उन्होंने कहा, सभी मार्ग एक ही परम सत्य की ओर ले जाते हैं। सत्य एक है, पर उसे पाने के अनेक रास्ते हो सकते हैं।
'वसुधैव कुटुंबकम' का जीवंत उदाहरण
भारत की वैश्विक भूमिका पर प्रकाश डालते हुए, दत्तात्रेय होसबोले ने कहा कि 'विश्व एक परिवार है' (वसुधैव कुटुंबकम) का विचार भारत ने केवल कहा नहीं, बल्कि उसे अपने आचरण से सिद्ध भी किया है। उन्होंने ऐतिहासिक उदाहरणों का हवाला देते हुए कहा कि भारत में विभिन्न धर्मों के लोग सदियों से शांति और सद्भाव के साथ रहते आए हैं।
आंतरिक सुदृढ़ीकरण की आवश्यकता
उन्होंने यह भी कहा कि यदि भारत को अपनी वैश्विक भूमिका प्रभावी ढंग से निभानी है, तो उसे आंतरिक रूप से मजबूत बनना होगा। भारत को एक आत्मविश्वासी और समृद्ध समाज के रूप में विकसित होना होगा, और आधुनिकता के साथ-साथ अपनी सांस्कृतिक जड़ों को भी संजोना होगा।
अहिंसक और शांतिपूर्ण इतिहास
दत्तात्रेय होसबोले ने इस बात पर भी जोर दिया कि भारत ने कभी भी विस्तारवादी या आक्रामक नीति नहीं अपनाई। उन्होंने कहा, "भारत ने कभी किसी देश पर आक्रमण नहीं किया, न ही किसी को अपना गुलाम बनाया।" उन्होंने बताया कि दुनिया भर में बसे भारतीय समुदाय वहाँ के विकास में योगदान देते हैं और सामाजिक ताने-बाने को मजबूत करते हैं।
अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों की सहमति
कार्यक्रम में उपस्थित प्रमुख विदेशी नीति विशेषज्ञ वाल्टर रसेल मीड ने भी भारत की संभावित वैश्विक भूमिका पर सहमति जताई। उन्होंने कहा कि एक 'मजबूत, आत्मविश्वासी और दुनिया के प्रति खुला भारत' वैश्विक राजनीति को एक नया आयाम दे सकता है और विशेष रूप से एशिया में तनाव को कम करने में सहायक हो सकता है। मीड ने कहा कि दुनिया को आज एक सशक्त और संतुलित भारत की आवश्यकता है।
आरएसएस: स्थिरता की शक्ति
लंबे समय से आरएसएस का अध्ययन कर रहे अकादमिक वाल्टर एंडरसन ने संगठन को भारत में 'स्थिरता लाने वाली शक्ति' बताया। उन्होंने कहा कि आरएसएस देशभक्ति की भावना को बढ़ावा देता है और समय के साथ स्वयं को अनुकूलित करने की क्षमता रखता है।
स्वास्थ्य और जीवनशैली में भारत का योगदान
होसबोले ने यह भी कहा कि भारत केवल राजनीतिक क्षेत्र में ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य और जीवनशैली के क्षेत्र में भी विश्व का मार्गदर्शन कर सकता है। उन्होंने कहा कि आज पूरा विश्व योग और संतुलित जीवनशैली को अपनाने के लिए भारत की ओर आशा भरी नज़रों से देख रहा है।
इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में विभिन्न सामुदायिक नेताओं, विद्वानों और नीति-निर्माताओं ने भाग लिया, जहाँ भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका और उसके अद्वितीय विचारों पर गहन मंथन हुआ।