"हादसे पर राजनीति न करें ममता": शायना एनसी का पलटवार, अजित पवार के निधन को बताया महाराष्ट्र के लिए अपूर्णीय क्षति

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के विमान हादसे में दुखद निधन के बाद अब राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा इस हादसे को 'साजिश' बताने वाले संकेतों पर शिवसेना नेता शायना एनसी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।

Jan 29, 2026 - 11:31
"हादसे पर राजनीति न करें ममता": शायना एनसी का पलटवार, अजित पवार के निधन को बताया महाराष्ट्र के लिए अपूर्णीय क्षति
"हादसे पर राजनीति न करें ममता": शायना एनसी का पलटवार, अजित पवार के निधन को बताया महाराष्ट्र के लिए अपूर्णीय क्षति

मुंबई : शिवसेना नेता शायना एनसी ने महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निधन पर बयानबाजी को लेकर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी किसी की मौत पर राजनीति न करें।

समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में शायना एनसी ने कहा, "आप (ममता बनर्जी) किस हद तक अफवाहें फैलाएंगी? आपके लिए यह शायद एक राजनीतिक मुद्दा हो सकता है। देश के लिए संवेदनशीलता के साथ समझ लीजिए कि यह एक हादसा था, जिसमें एक नेता की जिंदगी गई है।"

शिवसेना नेता ने आगे कहा, "अजित पवार ने अपने 50 साल सक्रिय राजनीति में रहते हुए राज्य में लगातार दौरे किए। जिला परिषद के प्रचार के लिए बारामती गए थे। टेक्निकल खराबी हो सकती है और जांच होनी चाहिए, लेकिन यह कहना कि ये षड्यंत्र है, यह आपके 'बी-ग्रेड' फिल्म की कोई स्टोरी नहीं है। इसलिए अपने आप पर कंट्रोल करें। अगर संवेदनशीलता नहीं दिखा सकती हैं तो ऐसी बयानबाजी न करें।"

महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजीत पवार की प्लेन क्रैश में मौत पर शायना एनसी ने कहा, "अजीत पवार का महाराष्ट्र की राजनीति में 50 साल लंबा योगदान रहा है। इस दौरान उन्होंने बारामती से विधायक के तौर पर काम किया, वित्त मंत्री बने, सिंचाई मंत्री रहे और डिप्टी चीफ मिनिस्टर बने। अफसोस की बात यह है कि बुधवार के दिन उनकी जिंदगी के 66 साल, 6 महीने और 6 दिन पूरे हुए थे। वह छह बार डिप्टी चीफ मिनिस्टर भी रहे।"

शिवसेना नेता ने आगे कहा, "अजित पवार की खासियत यह थी कि वह न सिर्फ एक जन नेता थे, बल्कि एक काबिल एडमिनिस्ट्रेटर भी थे। कई सालों तक वह हमारे पड़ोसी रहे, हमारा बाउंड्री वॉल एक है। एक खास बात यह थी कि हर सुबह 6 से साढ़े 7 बजे तक उनका ओपीडी वार्ड खुला रहता था, जहां लोग अपनी समस्याएं लेकर आते थे। वह उनकी समस्याओं का समाधान करते थे।"

उन्होंने यह भी कहा कि महाराष्ट्र की राजनीति में काबिल व्यवस्थापक का नाम लेना पड़े तो वे अजित पवार का ही नाम लेंगे। जिस अंदाज से उन्होंने बारामती और प्रदेश के लिए काम किया, ट्रिपल इंजन सरकार में उनकी कमी महसूस होगी। देवेंद्र फडणवीस और एकनाथ शिंदे उनके लिए एक बड़े भाई की तरह थे।

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