महिला आरक्षण की आड़ में भेदभाव: कांग्रेस ने 131वें संशोधन बिल को खारिज किया, विजय इंदर सिंगला ने BJP पर साधा निशाना
पूर्व सांसद विजय इंदर सिंगला ने BJP पर महिला आरक्षण की आड़ में भेदभाव का आरोप लगाया, कहा कांग्रेस ने 131वें संशोधन बिल को खारिज किया।
News Tv India हिंदी Official | Verified Expert • 27 Mar, 2026Editor
Apr 21, 2026 • 8:22 AM
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महिला आरक्षण की आड़ में भेदभाव: कांग्रेस ने 131वें संशोधन बिल को खारिज किया, विजय इंदर सिंगला ने BJP पर साधा निशाना
पूर्व सांसद विजय इंदर सिंगला ने BJP पर महिला आरक्षण की आड़ में भेदभाव का आरोप लगाया, कहा कांग्रेस ने 131वें संशोधन बिल को खारिज किया।
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महिला आरक्षण की आड़ में भेदभाव: कांग्रेस ने 131वें संशोधन बिल को खारिज किया, विजय इंदर सिंगला ने BJP पर साधा निशाना
Key Highlights
पूर्व मंत्री विजय इंदर सिंगला ने भाजपा पर महिला आरक्षण के नाम पर भेदभाव करने का आरोप लगाया।
कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने 16 अप्रैल, 2026 को 131वें संविधान संशोधन बिल को खारिज कर दिया था।
सिंगला ने कहा कि भाजपा ने महिला आरक्षण कानून लागू करने में देरी की और अब इसका उपयोग संसदीय सीटों के पुनर्गठन के लिए कर रही है, जिससे पंजाब पर नकारात्मक असर पड़ेगा।
मानसा से आ रही खबरों के मुताबिक, पूर्व मंत्री और पूर्व सांसद विजय इंदर सिंगला ने एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा महिला आरक्षण की आड़ में भेदभाव कर रही है, जिसके चलते 16 अप्रैल, 2026 को 131वें संविधान संशोधन बिल को इंडियन नेशनल कांग्रेस (आईएनसी) और उसके साथियों ने पूरी तरह से सही कारणों से खारिज कर दिया था।
कांग्रेस का महिला आरक्षण पर रुख
सिंगला ने अपनी बात रखते हुए स्पष्ट किया कि कांग्रेस पार्टी ने हमेशा महिला आरक्षण का समर्थन किया है। उन्होंने याद दिलाया कि 2023 में पारित 106वें संविधान संशोधन के तहत यह पहले से ही देश का कानून है, जिसे कांग्रेस का पूरा समर्थन मिला था। उन्होंने कहा कि कांग्रेस महिलाओं के वास्तविक सशक्तिकरण में विश्वास रखती है, न कि राजनीतिक पैंतरेबाजी में।
131वें संविधान संशोधन पर उठे सवाल
पूर्व सांसद ने 16 अप्रैल, 2026 को लाए गए 131वें संशोधन बिल पर सवाल उठाए। उनके अनुसार, इस बिल का उद्देश्य महिला आरक्षण की आड़ में भेदभाव को बढ़ावा देना और संसदीय सीटों की संख्या में वृद्धि करना था। उन्होंने भाजपा सरकार पर आरोप लगाया कि 2023 में कानून पास होने के बावजूद, इसे लागू करने में लगभग 30 महीने की देरी की गई।
विजय इंदर सिंगला ने आगे बताया कि 16 अप्रैल, 2026 को कानून को अधिसूचित किया गया और उसी दिन लोकसभा का विस्तार करने, संसदीय क्षेत्रों का फिर से परिसीमन (डिलिमिटेशन) करने और प्रतिनिधित्व बदलने के लिए नए बिल पेश किए गए। उन्होंने इसे एक सोची-समझी रणनीति करार दिया, जिसके तहत पहले कानून को लागू करने में देरी की गई, फिर इसे परिसीमन से जोड़ा गया, और अंततः कुछ राज्यों के पक्ष में राजनीतिक ताकत को पुनर्गठित करने के लिए इसका इस्तेमाल किया गया।
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सिंगला ने पंजाब पर इस कदम के संभावित नकारात्मक प्रभावों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि पंजाब में 13 लोकसभा सीटें हैं और पुराने आंकड़ों के आधार पर परिसीमन के तहत इसका हिस्सा कम हो जाएगा। इससे न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी), वित्तीय वितरण और मानसा तथा पंजाब के हर जिले के किसानों, मजदूरों और परिवारों को प्रभावित करने वाले हर राष्ट्रीय फैसले पर राज्य का असर सीधे तौर पर कम हो जाएगा।
पंजाब की विशिष्ट स्थिति का जिक्र करते हुए सिंगला ने कहा कि यह एक सीमावर्ती राज्य है, राष्ट्रीय सुरक्षा का केंद्र है और भारत की खाद्य सुरक्षा की रीढ़ है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पंजाब ने जिम्मेदारी से जनसंख्या स्थिरता का पालन किया है, लेकिन अब उसे सही काम करने की सजा दी जा रही है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ आरक्षण का सवाल नहीं है, बल्कि राज्यों की आवाज और हमारे लोकतंत्र की ईमानदारी का सवाल है।
सिंगला ने अंत में दोहराया कि कांग्रेस पार्टी पंजाब, मानसा और हर उस नागरिक के साथ खड़ी रहेगी जो यह मानता है कि संवैधानिक अधिकार राजनीतिक फायदे के लिए सौदेबाजी की चीज नहीं हैं।