भारत-ओमान CEPA लागू: अगले 3 वर्षों में निर्यात में 50% वृद्धि की उम्मीद, इन क्षेत्रों को मिलेगा बड़ा लाभ
भारत-ओमान व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (सीईपीए) लागू हो गया है। अगले तीन वर्षों में वस्तु निर्यात में 50% वृद्धि का अनुमान है।
News Tv India हिंदी Official | Verified Expert • 27 Mar, 2026Editor
Jun 1, 2026 • 3:19 PM | New Delhi
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भारत-ओमान CEPA लागू: अगले 3 वर्षों में निर्यात में 50% वृद्धि की उम्मीद, इन क्षेत्रों को मिलेगा बड़ा लाभ
भारत-ओमान व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (सीईपीए) लागू हो गया है। अगले तीन वर्षों में वस्तु निर्यात में 50% वृद्धि का अनुमान है।
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नई दिल्ली : भारत और ओमान के बीच व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (सीईपीए) सोमवार को औपचारिक रूप से लागू हो गया। इस महत्वपूर्ण द्विपक्षीय व्यापार समझौते के लागू होने से अगले तीन वर्षों में भारत का ओमान को वस्तु निर्यात 50 प्रतिशत तक बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है। यह समझौता दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए मील का पत्थर साबित होगा।
इस समझौते का प्राथमिक उद्देश्य भारत के निर्यात को पिछले वर्ष के 4.06 अरब डॉलर से बढ़ाकर तत्काल 6 अरब डॉलर तक पहुंचाना है। वहीं, मध्य अवधि में इसे 10 अरब डॉलर के महत्वाकांक्षी लक्ष्य तक ले जाने की योजना है। यह वृद्धि भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा प्रोत्साहन साबित होगी, जिससे विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार और विकास को बढ़ावा मिलेगा।
ओमान की ओर से उदार पेशकश
ओमान ने भारत को अपनी 98.08 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर शून्य शुल्क की पेशकश की है। यह रियायत भारत द्वारा ओमान को किए जाने वाले कुल निर्यात का 99.38 प्रतिशत कवर करती है। इस दायरे में आने वाले प्रमुख श्रम-गहन क्षेत्रों में जेम एंड ज्वेलरी, टेक्सटाइल, चमड़ा, जूता, स्पोर्ट्स गुड्स, प्लास्टिक, फर्नीचर, इंजीनियरिंग उत्पाद, फार्मास्यूटिकल्स, मेडिकल डिवाइस और ऑटोमोबाइल शामिल हैं। इन क्षेत्रों को शून्य शुल्क का लाभ मिलने से उनकी प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी और निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज होगी।
भारत की व्यापारिक रियायतें और संवेदनशील उत्पादों का संरक्षण
भारत ने अपनी कुल टैरिफ लाइनों में से 77.79 प्रतिशत पर उदारीकरण की पेशकश की है। यह पेशकश मूल्य के हिसाब से ओमान से भारत के आयात का 94.81 प्रतिशत कवर करती है। ओमान के निर्यात के लिए महत्वपूर्ण और भारत के लिए संवेदनशील उत्पादों के संबंध में, यह पेशकश मुख्य रूप से शुल्क दर कोटा (टीआरक्यू) आधारित है, जो एक संतुलित दृष्टिकोण सुनिश्चित करती है।
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अपने घरेलू हितों की रक्षा के लिए, भारत ने कुछ संवेदनशील उत्पादों को समझौते से बाहर रखा है, जिन पर कोई रियायत नहीं दी गई है। इनमें विशेष रूप से कृषि उत्पाद शामिल हैं, जैसे डेयरी उत्पाद, चाय, कॉफी, रबर और तंबाकू उत्पाद। इसके अतिरिक्त, सोना और चांदी के आभूषण, कुछ अन्य श्रम-प्रधान उत्पाद जैसे जूते, खेल सामग्री और कई आधार धातुओं का स्क्रैप भी इस सूची में शामिल हैं। यह कदम घरेलू उद्योगों और किसानों को संभावित नकारात्मक प्रभावों से बचाने के लिए उठाया गया है।
भारत और ओमान ने पिछले साल दिसंबर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मस्कट यात्रा के दौरान सीईपीए पर हस्ताक्षर किए थे। यह समझौता दोनों देशों के बीच लंबे समय से चली आ रही आर्थिक और राजनयिक साझेदारी का परिणाम है, जो अब व्यापारिक संबंधों को एक नई दिशा दे रहा है।
सेवा क्षेत्र को भी मिलेगा लाभ
वस्तु व्यापार के अलावा, भारत की अर्थव्यवस्था में बड़ी हिस्सेदारी रखने वाले सेवा क्षेत्र को भी इस समझौते से फायदा होने की उम्मीद है। ओमान का सेवा क्षेत्र का आयात 12.52 अरब डॉलर का है, जो भारतीय सेवा कंपनियों के लिए अपार संभावनाओं को दर्शाता है। भारतीय कंपनियां वित्तीय सेवाओं, सूचना प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में ओमान के बाजार में अपनी पैठ बना सकती हैं।
अन्य देशों के साथ भारत के व्यापार समझौते
ओमान के अलावा, भारत अन्य कई देशों और व्यापारिक गुटों के साथ भी द्विपक्षीय व्यापार समझौतों के लिए सक्रिय रूप से बातचीत कर रहा है। भारत ने जुलाई 2025 में ब्रिटेन और अप्रैल 2026 में न्यूजीलैंड के साथ इसी तरह के समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस वर्ष 27 जनवरी को यूरोपीय संघ (27 देशों का समूह) के साथ एक मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के लिए बातचीत पूरी की गई है। वहीं, भारत अमेरिका के साथ भी द्विपक्षीय समझौते को लेकर बातचीत कर रहा है, जो वैश्विक व्यापार में भारत की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।