स्लिप डिस्क की बढ़ती प्रॉब्लम को न करें इग्नोर वरना हो सकता है भारी नुकसान
स्लिप डिस्क उम्र के बढ़ने और गलत लाइफस्टाइल के चलते बहुत ज्यादा देखी जा रही है। अगर आप इस पर शुरू में ही ध्यान देते है तो इसे कंट्रोल में कर सकते है। इस में कई घरेलू उपाय शामिल है।
स्लिप डिस्क की बढ़ती प्रॉब्लम को न करें इग्नोर वरना हो सकता है भारी नुकसान
स्लिप डिस्क रीढ़ की हड्डी से जुड़ी हुई एक प्रॉब्लम है जो कमर दर्द का की बड़ी वजह बनती है। रीड की हड्डी हमारे शरीर के बहुत ही इंपॉर्टेंट स्ट्रक्चर होती है कई बार हम स्लिप डिस्क के दर्द को मामूली समझ कर छोड़ देते हैं लेकिन कई बार टाइम के साथ यह बढ़ जाता है और तकलीफ बहुत असहनीय हो जाती है इसलिए समय रहते इसका ध्यान देना चाहिए स्लिप डिस्क और इसके ट्रीटमेंट के बारे में आपको डिटेल्स में बताते हैं।
क्या है स्लिप डिस्क
स्लिप डिस्क रीढ़ की हड्डी के बीच वाली गद्देदार डिस्क का खिसकना या फट जाना है। ये डिस्क हड्डियों को सहारा देती हैं और झटकों से बचाती हैं लेकिन चोट या दबाव से इनका अंदरूनी जेल जैसा पदार्थ बाहर निकल आता है। इससे नसों पर बहुत प्रेशर पड़ता है जो तेज दर्द देता है।
स्लिप डिस्क की वजह
स्लिप डिस्क होने की काफी सारी वजह हो सकती है हालांकि यह उम्र बढ़ाने के साथ देखी जाती है लेकिन आजकल यह युवाओं में भी देखी जा रही है इसके भी कई सारे कारण है कई बार भारी वजन उठाना गलत मुद्रा में बैठना या अचानक झटके से स्लिप डिस्क हो जाती है इसके अलावा मोटापा धूम्रपान और मसल्स के कमजोर होने से भी स्लिप डिस्क की प्रॉब्लम हो सकती है
स्लिप डिस्क के सिम्पटम्स
स्लिप डिस्क के सिम्टम्स आपको शुरू में ही दिख जाएंगे जब आपको यह सिम्टम्स दिखे तो आपको शुरू में ही इसके लिए अवेयर हो जाना चाहिए।
• स्लिप डिस्क के शुरुआत में कमर या गर्दन में हल्का दर्द होता है जो पैर या हाथों तक फैल सकता है। कई बार झनझनाहट, सुन्नता या कमजोरी फील होती है। लंबे समय बैठने या झुकने से दर्द बढ़ जाता है।
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स्लिप डिस्क के बड़े हुए सिम्पटम्स
अब बात करते हैं स्लिप डिस्क के बहुत ही ज्यादा बड़े हुए सिंप्टम्स जिन्हें आपको बिल्कुल भी इग्नोर नहीं करना चाहिए। गंभीर केस में पैरों में कमजोरी आ जाती है कई बार तो टॉयलेट करने में भी दिक्कत होती है।
• स्लिप डिस्क में चलना-फिरना मुश्किल हो जाता है और दर्द रातों की नींद उड़ा देता है। ऐसे में तुरंत आपको डॉक्टर से मिलना चाहिए।
स्लिप डिस्क का ट्रीटमेंट
स्लिप डिस्क के ट्रीटमेंट में डॉक्टर पहले शारीरिक जांच करते हैं फिर MRI या X-ray से डिस्क की कंडिशन पता लगाते हैं। कभी कभी CT स्कैन भी जरूरी होता है। यह जांच दर्द के सही कारण को बताती है।
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जानें घरेलू उपाय
इसके कई घरेलू उपाय भी है जिन्हें अगर आप अपनाते हैं तो आपको काफी फायदा देखने को मिलेगा हालांकि यह बहुत ज्यादा गंभीर होने पर मदद नहीं करेंगे लेकिन अगर आप शुरू में ही इन उपाय को अपनाते हैं तो आपको काफी फायदा मिलेगा।
• अगर दर्द है तो आप आराम करे और गर्म या ठंडी सिकाई आजमाएं इसके अलावा हल्की स्ट्रेचिंग करें। अपना वजन कंट्रोल रखें और टाइट गद्दे पर सोएं।
• कभी भी भारी सामान न उठाएं। जितना हो सके योग को अपने डेली रूटीन में शामिल करें और अपनी लाइफस्टाइल को अच्छा बनाएं।
कब जरूरी है सर्जरी
अगर 6 हफ्ते बाद भी सुधार नहीं होता है या नसों पर गंभीर प्रेशर हो तो माइक्रोडिस्केक्टॉमी सर्जरी की सलाह दी जाती है। डॉक्टर अपने हिसाब से कंडीशन देखकर सर्जरी बताते हैं।
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