लोकतंत्र की ऐतिहासिक गूँज: असम, केरल और पुडुचेरी में टूटा 50 साल का रिकॉर्ड, महिलाओं ने दिखाया दम
असम, केरल और पुडुचेरी की विधानसभा चुनावों के साथ-साथ कर्नाटक, नागालैंड और त्रिपुरा की 4 सीटों पर उपचुनाव के लिए गुरुवार सुबह 7 बजे मतदान शुरू हुआ, जो कुछ मामूली घटनाओं को छोड़कर कुल मिलाकर शांतिपूर्ण रहा।
गुवाहाटी : असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने गुरुवार को हुए विधानसभा चुनावों में मतदान प्रतिशत पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि खासकर हिंदू और स्वदेशी समुदायों में दिखा उत्साह लोकतांत्रिक प्रक्रिया के प्रति मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
मतदान संपन्न होने के बाद सीएम हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि स्थानीय और स्वदेशी मतदाताओं में भागीदारी में स्पष्ट बढ़ोतरी देखी गई है।
उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए सकारात्मक संकेत बताते हुए कहा कि ऐसी सक्रिय भागीदारी चुनावी प्रणाली को मजबूत करती है और शासन में जनता के भरोसे को दर्शाती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बढ़ता हुआ मतदान प्रतिशत इस बात का संकेत है कि लोग अब अधिक जागरूक हैं और अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का उपयोग करने के लिए उत्सुक हैं।
उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण मतदान और मतदाताओं का उत्साह राज्य में जीवंत लोकतांत्रिक संस्कृति को दर्शाता है।
सरमा ने भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले गठबंधन की जीत को लेकर भी भरोसा जताया और कहा कि 126 सदस्यीय विधानसभा में गठबंधन 90 से अधिक सीटें जीत सकता है।
उन्होंने कहा कि विभिन्न क्षेत्रों से मिले जनसमर्थन से साफ संकेत मिलता है कि जनता का जनादेश सत्तारूढ़ गठबंधन के पक्ष में है।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि ज्यादा मतदान से लोकतांत्रिक व्यवस्था और मजबूत होगी और इससे अधिक प्रतिनिधित्व वाली सरकार बनेगी।
उन्होंने कहा कि अंतिम नतीजे राज्य की जनता की आकांक्षाओं को दर्शाएंगे, क्योंकि इस बार असम में हाल के वर्षों के सबसे ज्यादा भागीदारी वाले चुनावों में से एक देखा गया।
चुनाव आयोग के अनुसार, असम में इस बार 85.38 प्रतिशत का रिकॉर्ड मतदान हुआ, जो 2016 के 84.67 प्रतिशत के पिछले रिकॉर्ड से अधिक है।
अधिकारियों ने मतदान को कुल मिलाकर शांतिपूर्ण बताया, जहां केवल कुछ स्थानों से मामूली घटनाएं सामने आईं।
प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार, महिला मतदाताओं (85.96 प्रतिशत) की भागीदारी पुरुषों (84.80 प्रतिशत) से थोड़ी अधिक रही, जबकि थर्ड जेंडर मतदाताओं का प्रतिशत 36.84 रहा।
नई दिल्ली : असम, केरल और पुडुचेरी की विधानसभा चुनावों के साथ-साथ कर्नाटक, नागालैंड और त्रिपुरा की 4 सीटों पर उपचुनाव के लिए गुरुवार सुबह 7 बजे मतदान शुरू हुआ, जो कुछ मामूली घटनाओं को छोड़कर कुल मिलाकर शांतिपूर्ण रहा।
आयोग के अनुसार, इस चुनाव में असम और पुडुचेरी ने रिकॉर्ड मतदान दर्ज किया। असम में 85.38 प्रतिशत और पुडुचेरी में 89.83 प्रतिशत मतदान हुआ, जो अब तक का सबसे ज्यादा है। इससे पहले असम में 2016 में 84.67 प्रतिशत और पुडुचेरी में 2011 में 86.19 प्रतिशत मतदान दर्ज हुआ था। वहीं, केरल में कुल 78.03 प्रतिशत मतदान हुआ।
उपचुनावों में भी अच्छा मतदान देखने को मिला। कर्नाटक (बागलकोट, दावणगेरे साउथ) में करीब 68 प्रतिशत, नागालैंड (कोरिडांग) में 82.21 प्रतिशत और त्रिपुरा (धर्मनगर) में 80.04 प्रतिशत मतदान हुआ।
चुनाव आयोग की तरफ से बताया गया कि ये आंकड़े प्रारंभिक हैं और इनमें सर्विस वोटर व पोस्टल बैलेट शामिल नहीं हैं। अंतिम आंकड़े बाद में जारी किए जाएंगे।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयुक्त डॉ. एसएस संधू और डॉ. विवेक जोशी ने लाइव वेबकास्टिंग के जरिए मतदान प्रक्रिया पर नजर रखी। पहली बार असम, केरल और पुडुचेरी के 100 प्रतिशत मतदान केंद्रों पर लाइव वेबकास्टिंग की व्यवस्था की गई। कुल 296 विधानसभा सीटों पर 5.31 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं ने वोट डाले। जबकि, 63,084 मतदान केंद्रों पर एक साथ मतदान शुरू हुआ।
संपन्न हुए मतदान को लेकर ज्ञानेश कुमार ने कहा है कि असम, केरल और पुडुचेरी में 2026 के विधानसभा चुनाव न केवल भारत के लिए, बल्कि पूरे लोकतांत्रिक विश्व के लिए एक ऐतिहासिक मिसाल है। ईसीआई की ओर से, मैं असम, पुडुचेरी और केरल के हर एक मतदाता को इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए बधाई देता हूं।
चुनाव प्रक्रिया में 2.5 लाख से ज्यादा पोलिंग स्टाफ और 1.8 लाख से ज्यादा पोलिंग एजेंट तैनात रहे। मतदान शुरू होने से पहले सभी केंद्रों पर मॉक पोलिंग कराई गई। मतदान को आसान बनाने के लिए कई नई सुविधाएं दी गईं, जैसे ईवीएम पर उम्मीदवारों की रंगीन फोटो, मोबाइल जमा करने की सुविधा, नए डिजाइन की वोटर स्लिप और एक मतदान केंद्र पर अधिकतम 1,200 मतदाताओं की सीमा। दिव्यांग मतदाताओं के लिए व्हीलचेयर, वॉलंटियर्स की मदद और परिवहन सुविधा भी उपलब्ध कराई गई।