ईरान-अमेरिका तनाव: IRGC की 'टेक दिग्गजों' को खुली धमकी; 1 अप्रैल की रात 8 बजे का अल्टीमेटम
ईरान के IRGC ने 18 अमेरिकी टेक कंपनियों को निशाना बनाने की चेतावनी दी है। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा कि ईरान को समझौता करना होगा।
नई दिल्ली: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को बेहद कड़ी भाषा में धमकी दी है. ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए कहा कि मंगलवार को ईरान में “पावर प्लांट डे” और “ब्रिज डे” एक साथ हो सकता है. उन्होंने लिखा कि अमेरिका ने ईरान में जो कुछ बचा है, उसे नष्ट करना अभी शुरू भी नहीं किया है. अब ब्रिज के बाद पावर प्लांट पर हमला होगा.
ट्रंप ने साफ चेतावनी दी कि ईरान को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पूरी तरह खोलना होगा, वरना परिणाम बहुत भयानक होंगे. उन्होंने कहा कि अगर होर्मुज नहीं खोला गया तो ईरान को “जहन्नुम” भेज दिया जाएगा.
ट्यूसडे पावर प्लांट और ब्रिज डे
ट्रंप के पोस्ट में लिखा, “मंगलवार ईरान में पावर प्लांट डे और ब्रिज डे एक साथ होगा. जैसा पहले कभी नहीं देखा गया, वैसा कुछ होने वाला है.” उन्होंने ईरान की नई व्यवस्था को भी चेतावनी दी कि जो करना है, वह तेजी से करना होगा. ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है जब मध्य पूर्व में तनाव चरम पर है.
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के तेल व्यापार का महत्वपूर्ण रास्ता है. यहां से बहुत बड़ा हिस्सा तेल गुजरता है. ईरान के इस रास्ते को बंद रखने से तेल की आपूर्ति प्रभावित हो रही है.
ईरान पर लगातार दबाव
ट्रंप ने पहले भी 48 घंटे की समय सीमा दी थी. उन्होंने कहा था कि अगर ईरान ने होर्मुज नहीं खोला तो अमेरिका कहर बरपाएगा. अब उन्होंने समय खत्म होने की बात कही है. ट्रंप ने एक दुर्लभ बचाव अभियान का भी जिक्र किया, जिसमें अमेरिकी बलों ने ईरान के अंदर जाकर घायल एफ-15 पायलट को बचाया. ट्रंप का कहना है कि यह मिशन बहुत खतरनाक था. अमेरिकी सैनिक घंटों तक ईरानी क्षेत्र में रहे और दुश्मन की नजर से बचते रहे.
ईरान का सख्त रुख
ईरान ने ट्रंप की इन धमकियों को पूरी तरह ठुकरा दिया है. ईरानी कमांडरों ने अमेरिका की चेतावनी को “घबराया हुआ और मूर्खतापूर्ण” बताया है. ईरान ने कहा कि अगर अमेरिका या इजरायल उसके बुनियादी ढांचे पर हमला करता है तो जवाब में पूरे क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों पर भारी हमले होंगे.
ईरान ने हाल ही में खाड़ी देशों में ऊर्जा सुविधाओं पर हमले भी किए है. दोनों तरफ से बढ़ती धमकियों से युद्ध की आशंका और मजबूत हो गई है.दुनिया पर असरस्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुलने या बंद रहने से पूरी दुनिया के तेल बाजार पर असर पड़ रहा है. ट्रंप का अल्टीमेटम न सिर्फ ईरान को, बल्कि पूरे क्षेत्र को प्रभावित कर रहा है.
दुबई/वॉशिंगटन: मध्य पूर्व में जारी सैन्य संघर्ष अब एक खतरनाक मोड़ ले चुका है, जहां युद्ध का दायरा पारंपरिक मोर्चों से निकलकर ग्लोबल टेक्नोलॉजी सेक्टर तक फैल गया है। ईरान द्वारा अमेरिकी टेक दिग्गजों को निशाना बनाने की सीधी चेतावनी के बाद अब जमीन पर इसके असर दिखने शुरू हो गए हैं। ताजा अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स के अनुसार, बहरीन स्थित अमेजन (Amazon) के डेटा सेंटर के बेहद करीब ड्रोन हमले किए गए हैं, जिससे वहां के तकनीकी परिचालन पर गंभीर असर पड़ा है।
हालांकि, प्रारंभिक सूचना के अनुसार डेटा सेंटर की मुख्य इमारत को सीधा नुकसान नहीं पहुंचा है, लेकिन आसपास हुए शक्तिशाली धमाकों की वजह से इसकी कार्यप्रणाली बाधित हुई है। यह घटना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि अब जंग सिर्फ सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्लोबल डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर भी इस युद्ध की आग की चपेट में आ रहा है।
निशाने पर मेटा, गूगल और एप्पल जैसी दिग्गज कंपनियां
1 अप्रैल 2026 को सामने आई आधिकारिक जानकारियों के मुताबिक, ईरान ने अपनी रणनीति बदलते हुए खुलकर घोषणा की है कि वह अमेरिकी तकनीकी कंपनियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई कर सकता है। खुफिया रिपोर्ट्स का दावा है कि ईरान ने कुल 18 अमेरिकी टेक कंपनियों को संभावित लक्ष्यों (Potential Targets) के रूप में चिन्हित किया है।
इस सूची में मेटा (Meta), गूगल (Google), एप्पल (Apple) और माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft) जैसी दुनिया की सबसे प्रभावशाली कंपनियां शामिल हैं। ईरान का तर्क है कि ये कंपनियां मध्य पूर्व में डेटा, क्लाउड सर्विसेज और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के माध्यम से प्रतिकूल गतिविधियों में सहायक हो रही हैं। इस घोषणा के बाद से पूरे क्षेत्र में काम कर रही अंतरराष्ट्रीय कंपनियों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं चरम पर हैं।
साइबर और फिजिकल हमलों का दोहरा खतरा
विशेषज्ञों का मानना है कि अब टेक कंपनियों को केवल साइबर हमलों का ही नहीं, बल्कि बहरीन जैसी घटनाओं के बाद फिजिकल हमलों का भी सामना करना पड़ सकता है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि जो कंपनियां मध्य पूर्व के डिजिटल स्पेस को नियंत्रित कर रही हैं, वे उसके रडार पर रहेंगी। इससे न केवल सूचनाओं के प्रवाह पर असर पड़ सकता है, बल्कि वैश्विक क्लाउड स्टोरेज और इंटरनेट सेवाओं में भी बड़े व्यवधान आने की आशंका है।
तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार, यदि इन कंपनियों के डेटा सेंटर्स या केबल नेटवर्क को निशाना बनाया जाता है, तो इसका असर केवल युद्धरत देशों पर ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और संचार व्यवस्था पर पड़ेगा।
ट्रंप की सख्त चेतावनी: 'सैन्य और आर्थिक स्तर पर देंगे जवाब'
अमेरिकी टेक इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाए जाने की खबरों पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बेहद सख्त प्रतिक्रिया दी है। ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि किसी भी अमेरिकी कंपनी या उसके डिजिटल ढांचे पर आंच आती है, तो अमेरिका इसका जवाब 'पूरी ताकत' से देगा। उन्होंने इसे सीधे तौर पर अमेरिकी राष्ट्रीय हितों और संप्रभुता पर हमला करार दिया है।
व्हाइट हाउस से जारी संदेश में कहा गया है कि अमेरिका ऐसी किसी भी उकसावे वाली कार्रवाई के खिलाफ सैन्य और आर्थिक, दोनों मोर्चों पर जवाबी कार्रवाई के लिए तैयार है। ट्रंप के इस कड़े रुख से साफ हो गया है कि यदि टेक कंपनियों पर हमले जारी रहे, तो यह क्षेत्रीय संघर्ष एक विनाशकारी और व्यापक वैश्विक युद्ध का रूप ले सकता है।
तेहरान/वॉशिंगटन : खाड़ी क्षेत्र में जारी युद्ध अब एक बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुँच गया है। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने वैश्विक कॉर्पोरेट जगत को हिला देने वाली चेतावनी जारी की है। ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपनी धरती पर होने वाले किसी भी हमले या हत्या का बदला सीधे अमेरिकी कंपनियों के प्रतिष्ठानों को निशाना बनाकर लेगा।