ईरान-अमेरिका तनाव: IRGC की 'टेक दिग्गजों' को खुली धमकी; 1 अप्रैल की रात 8 बजे का अल्टीमेटम
ईरान के IRGC ने 18 अमेरिकी टेक कंपनियों को निशाना बनाने की चेतावनी दी है। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा कि ईरान को समझौता करना होगा।
दुबई/वॉशिंगटन: मध्य पूर्व में जारी सैन्य संघर्ष अब एक खतरनाक मोड़ ले चुका है, जहां युद्ध का दायरा पारंपरिक मोर्चों से निकलकर ग्लोबल टेक्नोलॉजी सेक्टर तक फैल गया है। ईरान द्वारा अमेरिकी टेक दिग्गजों को निशाना बनाने की सीधी चेतावनी के बाद अब जमीन पर इसके असर दिखने शुरू हो गए हैं। ताजा अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स के अनुसार, बहरीन स्थित अमेजन (Amazon) के डेटा सेंटर के बेहद करीब ड्रोन हमले किए गए हैं, जिससे वहां के तकनीकी परिचालन पर गंभीर असर पड़ा है।
हालांकि, प्रारंभिक सूचना के अनुसार डेटा सेंटर की मुख्य इमारत को सीधा नुकसान नहीं पहुंचा है, लेकिन आसपास हुए शक्तिशाली धमाकों की वजह से इसकी कार्यप्रणाली बाधित हुई है। यह घटना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि अब जंग सिर्फ सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्लोबल डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर भी इस युद्ध की आग की चपेट में आ रहा है।
निशाने पर मेटा, गूगल और एप्पल जैसी दिग्गज कंपनियां
1 अप्रैल 2026 को सामने आई आधिकारिक जानकारियों के मुताबिक, ईरान ने अपनी रणनीति बदलते हुए खुलकर घोषणा की है कि वह अमेरिकी तकनीकी कंपनियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई कर सकता है। खुफिया रिपोर्ट्स का दावा है कि ईरान ने कुल 18 अमेरिकी टेक कंपनियों को संभावित लक्ष्यों (Potential Targets) के रूप में चिन्हित किया है।
इस सूची में मेटा (Meta), गूगल (Google), एप्पल (Apple) और माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft) जैसी दुनिया की सबसे प्रभावशाली कंपनियां शामिल हैं। ईरान का तर्क है कि ये कंपनियां मध्य पूर्व में डेटा, क्लाउड सर्विसेज और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के माध्यम से प्रतिकूल गतिविधियों में सहायक हो रही हैं। इस घोषणा के बाद से पूरे क्षेत्र में काम कर रही अंतरराष्ट्रीय कंपनियों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं चरम पर हैं।
साइबर और फिजिकल हमलों का दोहरा खतरा
विशेषज्ञों का मानना है कि अब टेक कंपनियों को केवल साइबर हमलों का ही नहीं, बल्कि बहरीन जैसी घटनाओं के बाद फिजिकल हमलों का भी सामना करना पड़ सकता है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि जो कंपनियां मध्य पूर्व के डिजिटल स्पेस को नियंत्रित कर रही हैं, वे उसके रडार पर रहेंगी। इससे न केवल सूचनाओं के प्रवाह पर असर पड़ सकता है, बल्कि वैश्विक क्लाउड स्टोरेज और इंटरनेट सेवाओं में भी बड़े व्यवधान आने की आशंका है।
तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार, यदि इन कंपनियों के डेटा सेंटर्स या केबल नेटवर्क को निशाना बनाया जाता है, तो इसका असर केवल युद्धरत देशों पर ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और संचार व्यवस्था पर पड़ेगा।
ट्रंप की सख्त चेतावनी: 'सैन्य और आर्थिक स्तर पर देंगे जवाब'
अमेरिकी टेक इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाए जाने की खबरों पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बेहद सख्त प्रतिक्रिया दी है। ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि किसी भी अमेरिकी कंपनी या उसके डिजिटल ढांचे पर आंच आती है, तो अमेरिका इसका जवाब 'पूरी ताकत' से देगा। उन्होंने इसे सीधे तौर पर अमेरिकी राष्ट्रीय हितों और संप्रभुता पर हमला करार दिया है।
व्हाइट हाउस से जारी संदेश में कहा गया है कि अमेरिका ऐसी किसी भी उकसावे वाली कार्रवाई के खिलाफ सैन्य और आर्थिक, दोनों मोर्चों पर जवाबी कार्रवाई के लिए तैयार है। ट्रंप के इस कड़े रुख से साफ हो गया है कि यदि टेक कंपनियों पर हमले जारी रहे, तो यह क्षेत्रीय संघर्ष एक विनाशकारी और व्यापक वैश्विक युद्ध का रूप ले सकता है।
तेहरान/वॉशिंगटन : खाड़ी क्षेत्र में जारी युद्ध अब एक बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुँच गया है। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने वैश्विक कॉर्पोरेट जगत को हिला देने वाली चेतावनी जारी की है। ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपनी धरती पर होने वाले किसी भी हमले या हत्या का बदला सीधे अमेरिकी कंपनियों के प्रतिष्ठानों को निशाना बनाकर लेगा।
IRGC का संदेश: 18 कंपनियों को 'वैध लक्ष्य' घोषित किया
IRGC ने पहली बार नागरिक तकनीक क्षेत्र की दिग्गज कंपनियों को सीधे तौर पर युद्ध में घसीटा है। संगठन का आरोप है कि ये कंपनियां खुफिया जानकारी और AI के जरिए ईरान के खिलाफ अभियानों में मदद कर रही हैं। ऐप्पल, गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, टेस्ला, इंटेल, आईबीएम और बोइंग समेत कुल 18 कंपनियां इस सूची में शामिल हैं। IRGC ने इन कंपनियों के कर्मचारियों को सलाह दी है कि वे अपनी जान बचाने के लिए तुरंत कार्यस्थलों को छोड़ दें। संगठन ने स्थानीय लोगों से भी अपील की है कि वे इन कंपनियों के दफ्तरों या प्रतिष्ठानों से कम से कम एक किलोमीटर की दूरी बना लें। यह चेतावनी तेहरान के समयानुसार आज, 1 अप्रैल की रात 8 बजे से प्रभावी होगी।
अमेरिका का जवाब: "अगले कुछ दिन निर्णायक"
ईरान की इस धमकी के बीच वॉशिंगटन ने अपना रुख और कड़ा कर दिया है। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने पेंटागन में ब्रीफिंग के दौरान स्पष्ट किया कि अमेरिका पीछे हटने वाला नहीं है। हेगसेथ ने कहा कि युद्ध अब अपने पांचवें हफ्ते में है और आने वाले कुछ दिन निर्णायक साबित होंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ईरान समझौता नहीं करता, तो सैन्य कार्रवाई और तेज की जाएगी। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सहयोगियों पर भी दबाव बनाया है कि वे हॉर्मुज जलडमरूमध्य को खुला रखने के लिए अधिक साहस दिखाएं और जरूरत पड़ने पर बल प्रयोग करें। हेगसेथ के अनुसार, अमेरिका के पास विकल्पों की कमी नहीं है, जबकि ईरान की सैन्य क्षमताएं लगातार कमजोर हो रही हैं।
बाजार और वैश्विक सुरक्षा पर असर
IRGC की इस धमकी का असर तुरंत वैश्विक बाजारों पर देखने को मिला है। नैस्डैक में सूचीबद्ध बड़ी टेक कंपनियों के शेयरों में अस्थिरता देखी गई। खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते खतरे को देखते हुए कच्चे तेल की कीमतें पहले ही 116 डॉलर प्रति बैरल को पार कर चुकी हैं। अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने सऊदी अरब और यूएई जैसे देशों में मौजूद अमेरिकी नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी है।
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