दिल्ली प्रदूषण पर AAP का भाजपा पर हमला, अंकुश नारंग बोले– जहरीली हवा में जीने को मजबूर हैं दिल्लीवाले
आम आदमी पार्टी ने दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और एमसीडी में नेता प्रतिपक्ष अंकुश नारंग ने कहा कि भाजपा प्रदूषण रोकने में पूरी तरह विफल रही है
नई दिल्ली:आम आदमी पार्टी ने दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और एमसीडी में नेता प्रतिपक्ष अंकुश नारंग ने कहा कि भाजपा प्रदूषण रोकने में पूरी तरह विफल रही है और दिल्ली की जनता जहरीली हवा में सांस लेने को मजबूर है।
अंकुश नारंग ने दावा किया कि दिल्ली में प्रदूषण का स्तर इतना खतरनाक हो चुका है कि लोग रोजाना 16 सिगरेट के बराबर प्रदूषित हवा अपने शरीर में ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि मंगलवार को दिल्ली का एक्यूआई 400 के पार पहुंच गया, जो हालात की गंभीरता को साफ दिखाता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि ग्रैप-4 लागू होने के बावजूद नियमों का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है। पटपड़गंज में भाजपा विधायक के कार्यालय में निर्माण कार्य जारी है, जो सरकार के आदेशों पर ही सवाल खड़े करता है। नारंग ने कहा कि जब भाजपा के अपने नेता ही नियम नहीं मान रहे, तो आम लोगों से क्या उम्मीद की जा सकती है।
अंकुश नारंग ने कहा कि सिर्फ वाहनों पर सख्ती करने से प्रदूषण कम नहीं होगा। सरकार को ठोस और जमीनी स्तर पर कदम उठाने होंगे। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अब दिल्ली में भाजपा की “चार इंजन की सरकार” है—एमसीडी, दिल्ली सरकार, एलजी और केंद्र—फिर भी प्रदूषण से निपटने के लिए कोई प्रभावी योजना नजर नहीं आती।
उन्होंने भाजपा के चुनावी नारे पर कटाक्ष करते हुए कहा कि लोकसभा चुनाव में ‘400 पार’ का सपना पूरा नहीं हुआ, लेकिन दिल्ली में भाजपा ने ‘एक्यूआई 400 पार’ जरूर कर दिखाया है। हालात ऐसे हैं कि बुजुर्गों को सांस लेने में दिक्कत हो रही है, बच्चे बीमार पड़ रहे हैं और खांसी-बुखार आम हो गया है।
कृत्रिम बारिश को लेकर किए गए दावों पर भी अंकुश नारंग ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से क्लाउड सीडिंग को सफल बताया गया, लेकिन जमीनी हकीकत में बारिश नहीं हुई और प्रदूषण कम होने के कोई संकेत नहीं दिखे। उन्होंने एक्यूआई निगरानी केंद्रों के सामने पानी डालकर आंकड़े कम दिखाने के आरोप भी लगाए।
अंत में अंकुश नारंग ने कहा कि भाजपा सरकार जलभराव, बाढ़, यमुना सफाई और अब प्रदूषण—हर मोर्चे पर विफल साबित हुई है। दिल्ली की जनता इस नाकामी की कीमत अपने स्वास्थ्य से चुका रही है।