Vande Mataram 150th Anniversary: 'वंदे मातरम केवल गीत नहीं, भारत की आत्मा है', दिल्ली विधानसभा में बोलीं सीएम रेखा गुप्ता

राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' की 150वीं वर्षगांठ पर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने विधानसभा को संबोधित किया। उन्होंने इस गीत को राष्ट्रीय चेतना की आवाज बताते हुए कहा कि यह किसी धर्म या राजनीति का नहीं, बल्कि मातृभूमि के प्रति सम्मान का प्रतीक है। जानें सीएम के संबोधन की बड़ी बातें।

Jan 9, 2026 - 21:27
Vande Mataram 150th Anniversary: 'वंदे मातरम केवल गीत नहीं, भारत की आत्मा है', दिल्ली विधानसभा में बोलीं सीएम रेखा गुप्ता
Vande Mataram 150th Anniversary: 'वंदे मातरम केवल गीत नहीं, भारत की आत्मा है', दिल्ली विधानसभा में बोलीं सीएम रेखा गुप्ता

नई दिल्ली : दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शुक्रवार को विधानसभा में कहा कि 'वंदे मातरम' महज एक गीत नहीं, बल्कि भारत की आत्मा की अभिव्यक्ति है।

राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ पर अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि यह गीत नागरिकों को मातृभूमि के प्रति कर्तव्य, एकता और सम्मान की भावना से जोड़ता है।

वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि लगभग 150 साल पहले रचित यह गीत भारत के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान चेतना की आवाज बना।

उनके अनुसार, यह गीत भारत की भूमि, प्रकृति, संस्कृति और सभ्यता का सम्मान करता है और हमें याद दिलाता है कि भारत की मिट्टी न केवल अनाज बल्कि मूल्यों और संस्कृति का भी उत्पादन करती है।

विधानसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री गुप्ता ने कहा कि इस ऐतिहासिक राष्ट्रीय गीत की 150वीं वर्षगांठ पर विधानसभा में इस पर विचार-विमर्श करना अत्यंत महत्वपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि वंदे मातरम की 100वीं वर्षगांठ के दौरान देश आपातकाल के दौर से गुजर रहा था, जिसके कारण राष्ट्रगान को वह सम्मान नहीं मिल पाया जिसका वह हकदार था।

उन्होंने इसे भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का एक दुर्भाग्यपूर्ण अध्याय बताया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश 'विकास भी, विरासत भी' के सिद्धांत पर प्रगति कर रहा है।

उन्होंने आगे कहा कि भारत अपनी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को संरक्षित करते हुए निरंतर प्रगति की नई ऊंचाइयों को छू रहा है।

उन्होंने कहा कि देश धीरे-धीरे औपनिवेशिक मानसिकता से बाहर निकल रहा है और 'विकसित भारत' के स्पष्ट दृष्टिकोण के साथ एक आत्मनिर्भर और समृद्ध राष्ट्र के रूप में आगे बढ़ रहा है।

उन्होंने आगे बताया कि इस गीत की रचना महान साहित्यकार और राष्ट्रवादी विचारक बंकिम चंद्र चटर्जी ने 1875 में की थी और बाद में इसे 1882 में उपन्यास 'आनंदमठ' में शामिल किया गया था।

उन्होंने स्पष्ट किया कि यह गीत किसी धर्म, संप्रदाय, वर्ग, या राजनीतिक विचारधारा से संबंधित नहीं है, बल्कि मातृभूमि और उसके बच्चों के बीच अटूट बंधन का प्रतीक है।

मुख्यमंत्री गुप्ता ने कहा कि वंदे मातरम राजनीति से ऊपर राष्ट्रीय नीति का प्रतिनिधित्व करता है।

“दुर्भाग्य से, कुछ लोग इसे राजनीतिक नजरिए से देखने का प्रयास करते हैं, जबकि गीत का हर शब्द केवल भारत माता की स्तुति में डूबा हुआ है।”

उन्होंने आगे कहा कि यह गीत भारत की नदियों, पहाड़ों, खेतों और समृद्धि की महिमा का बखान करता है और देश के लोगों को एक सूत्र में पिरोता है।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि देश वर्तमान में एक वैचारिक संघर्ष का सामना कर रहा है, जिसे हथियारों से नहीं बल्कि केवल राष्ट्रीय चेतना के माध्यम से ही लड़ा जा सकता है।

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