पंजाब में गेहूं खरीद की तैयारी तेज: 132 लाख मीट्रिक टन खरीद का लक्ष्य, जानें क्या है नया MSP
पंजाब सरकार ने गेहूं खरीद सीजन 2026-27 के लिए कमर कस ली है। मंत्री समूह (GoM) की बैठक में 132 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीद और 2585 रुपये एमएसपी का लक्ष्य तय किया गया है।
पंजाब सरकार ने आगामी गेहूं खरीद सीजन 2026-27 के लिए अपनी तैयारियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के निर्देशों पर गठित मंत्री समूह (GOM) ने आज एक उच्च स्तरीय बैठक की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य किसानों से गेहूं की सुचारू और पारदर्शी खरीद सुनिश्चित करना था।
बैठक में कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुडियां, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री लाल चंद कटारूचक्क, जल संसाधन मंत्री बरिन्दर कुमार गोयल और परिवहन मंत्री लालजीत सिंह भुल्लर शामिल हुए। मंत्रियों ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि खरीद प्रक्रिया में किसानों को किसी भी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए।
खरीद सीजन और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP)
बैठक में जानकारी दी गई कि पंजाब में गेहूं की सरकारी खरीद 1 अप्रैल 2026 से शुरू होने की संभावना है। सरकार ने इस सीजन के लिए कुछ महत्वपूर्ण लक्ष्य निर्धारित किए हैं:
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कुल खरीद का लक्ष्य: खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग लगभग 132 लाख मीट्रिक टन (LMT) गेहूं खरीदने की तैयारी कर रहा है।
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न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP): इस साल गेहूं के लिए 2585 रुपये प्रति क्विंटल का भाव तय किया गया है।
स्टोरेज और ढुलाई की चुनौती
सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती खरीदे गए अनाज को सुरक्षित रखने के लिए जगह (Storage Space) की है। मंत्री समूह को बताया गया कि भारतीय खाद्य निगम (FCI) फिलहाल हर महीने 5 लाख मीट्रिक टन गेहूं और चावल की ढुलाई कर रहा है।
हालांकि, नए सीजन की फसल को रखने के लिए पंजाब को हर महीने कम से कम 15 लाख मीट्रिक टन अनाज के उठान (Lifting) की जरूरत है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने इस मुद्दे को केंद्र सरकार के समक्ष भी प्रमुखता से उठाया है ताकि गोदामों में जगह खाली हो सके और नई फसल को सुरक्षित रखा जा सके।
सुरक्षित भंडारण के लिए वैकल्पिक इंतजाम
अनाज को खराब होने से बचाने के लिए विभाग कई अन्य विकल्पों पर भी काम कर रहा है:
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नए पलिंथ (Plinths): फसल रखने के लिए नए ऊंचे चबूतरे बनाए जा रहे हैं।
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चावल मिलों का उपयोग: खाली पड़ी राइस मिलों की जगहों का इस्तेमाल गेहूं स्टोर करने के लिए किया जाएगा।
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सुरक्षा उपकरण: अनाज को ढकने के लिए तिरपाल (LPED Covers) उपलब्ध हैं। साथ ही, 3.91 लाख प्लास्टिक के कैरेट और 6.75 लाख लकड़ी के कैरेट के ऑर्डर दिए गए हैं, जो मार्च तक प्राप्त हो जाएंगे।
आढ़तियों की कमीशन का मुद्दा
बैठक में आढ़तियों (Commission Agents) की मांगों पर भी चर्चा हुई। आढ़ती अपनी कमीशन की दर को 45 रुपये से बढ़ाकर 64 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग कर रहे हैं। राज्य सरकार ने भरोसा दिलाया है कि वह इस मामले को केंद्र सरकार के पास मजबूती से उठा रही है ताकि आढ़तियों की जायज मांगों को पूरा किया जा सके।
पारदर्शिता और निर्विघ्न खरीद पर जोर
मंत्री समूह ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि पूरी खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता बरती जाए। जिला प्रशासनों के साथ नियमित बैठकें की जा रही हैं ताकि ऐन मौके पर कोई समस्या न आए। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि मंडियों में बिजली, पानी और किसानों के बैठने के उचित प्रबंध हों।
इस बैठक में खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के प्रमुख सचिव राहुल तिवाड़ी और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे। सरकार का दावा है कि इस बार भी पंजाब का किसान अपनी फसल बिना किसी देरी और बाधा के मंडियों में बेच सकेगा।