लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से लेकर विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने सोशल मीडिया के माध्यम से इन महान आत्माओं को नमन किया है। नेताओं ने स्पष्ट किया कि जलियांवाला बाग की मिट्टी में मिला उन शहीदों का लहू आज भी भारत की एकता और अखंडता की नींव को मजबूत करता है।
लोकसभा अध्यक्ष ने साझा किया भावुक संदेश
संसदीय परंपराओं के संरक्षक ओम बिरला ने इस अवसर पर जलियांवाला बाग की घटना को भारतीय आत्मा को झकझोर देने वाला अध्याय बताया। उन्होंने कहा कि निहत्थे नागरिकों पर चलाई गई वे निर्मम गोलियां दरअसल गुलामी की बेड़ियों को काटने की शुरुआत थीं। बिरला के अनुसार, इस शहादत ने ही करोड़ों भारतीयों के भीतर स्वाभिमान और पूर्ण स्वराज की अलख जगाई थी।
उनका मानना है कि यह स्थान केवल एक स्मारक नहीं, बल्कि एक ऐसा तीर्थ है जो आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्रसेवा और बलिदान का पाठ पढ़ाता रहेगा।
मुख्यमंत्री योगी और धामी ने वीरों के साहस को सराहा
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जलियांवाला बाग को अदम्य साहस का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि ब्रिटिश क्रूरता के खिलाफ भारतीयों का वह त्याग अतुलनीय है। योगी ने जोर देकर कहा कि इन क्रांतिवीरों की गाथाएं ही आधुनिक भारत के निर्माण का मार्ग प्रशस्त करती हैं।
वहीं, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इसे इतिहास का सबसे पीड़ादायक हिस्सा करार दिया। धामी ने उल्लेख किया कि 1919 के उस हृदय विदारक दृश्य ने देश की सामूहिक चेतना को जागृत किया था। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे शहीदों के बलिदान को व्यर्थ न जाने दें और राष्ट्रहित को हमेशा सर्वोपरि रखें।
देश भर से उमड़ी श्रद्धा
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं। नेताओं ने एक स्वर में कहा कि कृतज्ञ राष्ट्र इन बलिदानियों का सदैव ऋणी रहेगा। 13 अप्रैल की यह तारीख केवल एक शोक का दिन नहीं है, बल्कि यह संकल्प लेने का दिन है कि भारत की स्वतंत्रता और संप्रभुता पर कभी आंच नहीं आने दी जाएगी।
अमृत काल के इस दौर में इन शहीदों की यादें नागरिकों को लोकतंत्र के मूल्यों के प्रति और अधिक समर्पित होने के लिए प्रोत्साहित कर रही हैं।