“जलियांवाला बाग के शहीदों को राष्ट्र का नमन: ओम बिरला और सीएम योगी समेत दिग्गजों ने दी श्रद्धांजलि”
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13 April 2026
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जलियांवाला बाग के शहीदों को राष्ट्र का नमन: ओम बिरला और सीएम योगी समेत दिग्गजों ने दी श्रद्धांजलि
नई दिल्ली: 13 अप्रैल 1919 का वह काला दिन भारतीय इतिहास के पन्नों में आज भी उस घाव की तरह दर्ज है, जिसकी टीस हर साल देशवासियों के दिलों में उठती है। आज इस वीभत्स नरसंहार की बरसी पर पूरा देश उन मासूम और निहत्थे बलिदानियों को याद कर रहा है, जिन्होंने ब्रिटिश हुकूमत की गोलियों के सामने झुकने के बजाय मौत को गले लगाना बेहतर समझा।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से लेकर विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने सोशल मीडिया के माध्यम से इन महान आत्माओं को नमन किया है। नेताओं ने स्पष्ट किया कि जलियांवाला बाग की मिट्टी में मिला उन शहीदों का लहू आज भी भारत की एकता और अखंडता की नींव को मजबूत करता है।
लोकसभा अध्यक्ष ने साझा किया भावुक संदेश
संसदीय परंपराओं के संरक्षक ओम बिरला ने इस अवसर पर जलियांवाला बाग की घटना को भारतीय आत्मा को झकझोर देने वाला अध्याय बताया। उन्होंने कहा कि निहत्थे नागरिकों पर चलाई गई वे निर्मम गोलियां दरअसल गुलामी की बेड़ियों को काटने की शुरुआत थीं। बिरला के अनुसार, इस शहादत ने ही करोड़ों भारतीयों के भीतर स्वाभिमान और पूर्ण स्वराज की अलख जगाई थी।
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13 अप्रैल, 1919 के दिन जलियांवाला बाग में देश की आज़ादी के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले अमर शहीदों को कोटि-कोटि नमन।
निहत्थे, निर्दोष नागरिकों पर औपनिवेशिक शासन की निर्मम गोलियां भारत की आत्मा को झकझोर देने वाली घटना थी, जिसने पूरे राष्ट्र को एकजुट कर स्वतंत्रता के लिए… pic.twitter.com/ZMpLex1iLF
— Om Birla (@ombirlakota) April 13, 2026
उनका मानना है कि यह स्थान केवल एक स्मारक नहीं, बल्कि एक ऐसा तीर्थ है जो आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्रसेवा और बलिदान का पाठ पढ़ाता रहेगा।
मुख्यमंत्री योगी और धामी ने वीरों के साहस को सराहा
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जलियांवाला बाग को अदम्य साहस का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि ब्रिटिश क्रूरता के खिलाफ भारतीयों का वह त्याग अतुलनीय है। योगी ने जोर देकर कहा कि इन क्रांतिवीरों की गाथाएं ही आधुनिक भारत के निर्माण का मार्ग प्रशस्त करती हैं।
जलियांवाला बाग के अमर बलिदानियों को कोटि-कोटि नमन।
जलियांवाला बाग वह पावन तीर्थ है, जहां असंख्य राष्ट्रभक्तों ने ब्रिटिश हुकूमत की क्रूरता के सामने अदम्य साहस और अद्वितीय त्याग का परिचय देते हुए मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया था।
वहीं, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इसे इतिहास का सबसे पीड़ादायक हिस्सा करार दिया। धामी ने उल्लेख किया कि 1919 के उस हृदय विदारक दृश्य ने देश की सामूहिक चेतना को जागृत किया था। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे शहीदों के बलिदान को व्यर्थ न जाने दें और राष्ट्रहित को हमेशा सर्वोपरि रखें।
माँ भारती की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले जलियांवाला बाग के अमर शहीदों को विनम्र श्रद्धांजलि।
13 अप्रैल 1919 का वह हृदय विदारक दिवस, जब निहत्थे और निर्दोष भारतीयों पर हुए निर्मम अत्याचार ने पूरे देश की चेतना को झकझोर दिया, आज भी हमारे इतिहास का सबसे… pic.twitter.com/WVIVBp5lCp
— Pushkar Singh Dhami (@pushkardhami) April 13, 2026
देश भर से उमड़ी श्रद्धा
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं। नेताओं ने एक स्वर में कहा कि कृतज्ञ राष्ट्र इन बलिदानियों का सदैव ऋणी रहेगा। 13 अप्रैल की यह तारीख केवल एक शोक का दिन नहीं है, बल्कि यह संकल्प लेने का दिन है कि भारत की स्वतंत्रता और संप्रभुता पर कभी आंच नहीं आने दी जाएगी।
अमृत काल के इस दौर में इन शहीदों की यादें नागरिकों को लोकतंत्र के मूल्यों के प्रति और अधिक समर्पित होने के लिए प्रोत्साहित कर रही हैं।