GEC 2026: पीयूष गोयल का बड़ा एलान "2047 तक $35 ट्रिलियन की विकसित अर्थव्यवस्था बनेगा भारत"
मुंबई में ग्लोबल इकोनॉमिक को-ऑपरेशन (GEC) 2026 में पीयूष गोयल ने भारत के 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने और वैश्विक व्यापार समझौतों पर चर्चा की।
मुंबई : केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बुधवार को मुंबई में ग्लोबल इकोनॉमिक को-ऑपरेशन (जीईसी) 2026 कॉन्फ्रेंस के दूसरे दिन उपस्थित लोगों को संबोधित किया। उन्होंने अपने संबोधन में आर्थिक कूटनीति को लेकर भारत के रुख को सामने रखा और वैश्विक व्यापार एवं निवेश के क्षेत्र में भरोसेमंद एवं जरूरी सहयोगी के रूप में भारत के उभार पर चर्चा की।
फ्रांस, यूनाइटेड किंगडम (यूके), संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, सेशेल्स, श्रीलंका, सिंगापुर समेत प्रमुख बड़ी वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं के वरिष्ठ मंत्रियों एवं कारोबारी प्रतिनिधियों को एक मंच पर लाते हुए वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बहुत महत्वपूर्ण समय में जीईसी 2026 की शुरुआत हुई है। बदलते व्यापारिक परिदृश्य और तेजी से बहुध्रुवीय होती दुनिया में इस फोरम का उद्देश्य एक मजबूत, समावेशी और भविष्य के लिए सजग आर्थिक गठजोड़ के लिए व्यावहारिक रूपरेखा तैयार करना है।
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने अपने मंत्री स्तरीय मुख्य संबोधन में भारत की रणनीति पर बात करते हुए कहा, "अभी से लेकर 2047 तक भारत अपनी अर्थव्यवस्था में 26 ट्रिलियन डॉलर और जोड़ेगा। यह विकास की ऐसी तस्वीर है, जो इतिहास में बेमिसाल है और दुनिया में कहीं और ऐसा विकास दिखने की उम्मीद कम है। आर्थिक अलगाव का दौर खत्म हो गया है, इसीलिए हम अलायंस बना रहे हैं, दोस्ती गहरी कर रहे हैं और मजबूती के साथ व्यापार समझौते कर रहे हैं। चार साल में नौ समझौते हुए हैं। आगे और भी समझौते आएंगे। हर बातचीत में राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखा जाता है और किसानों, उद्यमियों, एमएसएमई, महिलाओं और उद्योगों के लिए अवसर सृजित करना तथा संवेदनशील सेक्टर्स को सुरक्षित रखना बातचीत के केंद्र में रहता है।"
उन्होंने आगे कहा, "मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) हमारी तरफ से भारत के भविष्य का साझेदार बनने का न्योता है। यह एक ऐसे सफर का हिस्सा बनने का मौका है, जो भारत को दुनिया की चौथी बड़ी अर्थव्यवस्था से 2027-28 तक तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बना देगा और 2047 तक 30 से 35 ट्रिलियन डॉलर वाली विकसित अर्थव्यवस्था में बदल देगा। दुनिया विकास की इस कहानी का हिस्सा बनना चाहती है। खुलेपन के साथ भरोसेमंद और कदम बढ़ाता हुआ भारत हर उस साझेदार का स्वागत करने के लिए तत्पर है, जो गंभीरता के साथ हमसे जुड़ना चाहता है।"
भारत सरकार के विदेश मंत्रालय और महाराष्ट्र सरकार के साथ मिलकर फ्यूचर इकोनॉमिक को-ऑपरेशन काउंसिल (एफईसीसी) द्वारा आयोजित जीईसी 2026 में दुनियाभर के वरिष्ठ मंत्रियों और व्यापार प्रतिनिधियों को एक मंच पर लाया गया है। इसका उद्देश्य मजबूत एवं भविष्य के लिए सजग आर्थिक गठजोड़ को आकार देने के लिए व्यावहारिक रूपरेखा तैयार करना है। इस फोरम का नेतृत्व विजय चौथाईवाले और एफईसीसी की डायरेक्टर प्रियम गांधी-मोदी द्वारा किया जा रहा है। फोरम को एक एडवाइजरी काउंसिल गाइड कर रही है, जिसमें आनंद महिंद्रा, चेयरमैन, महिंद्रा ग्रुप; बाबा कल्याणी, चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर, भारत फोर्ज लिमिटेड; सिरिल श्रॉफ, मैनेजिंग पार्टनर, सिरिल अमरचंद मंगलदास; और आदिल जैनुलभाई, चेयरमैन, नेटवर्क18 ग्रुप जैसी भारतीय उद्योग जगत की बड़ी हस्तियां शामिल हैं।
भारत ने इस समय 38 विकसित देशों के साथ 16 एफटीए और 6 पीटीए को अंजाम दिया है। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने इसे स्पष्ट एवं अनुशासित राष्ट्रीय उद्देश्य का परिणाम बताया है।
उन्होंने कहा, "भारत ने 2022 से अब तक करीब चार साल में 9 समझौते किए हैं। इन समझौतों में मजबूती के साथ भारत के पक्ष को रखा गया है। इस भरोसे से एक साथ हमें अपने रक्षात्मक हितों को संरक्षित करने और आक्रामक हितों को आगे बढ़ाने में मदद मिली है। सहयोगी देशों ने भारत की स्थिति को स्वीकार किया है, क्योंकि हम अपने लक्ष्य को लेकर ईमानदार और पारदर्शी रहे हैं। हमारी बातचीत से हमें किसानों की रक्षा करने, एमएसएमई के विकास को सुरक्षित रखने, मछुआरों को संरक्षित करने और भारत में रोजगार को बनाए रखने में मदद मिली है। साथ ही टेक्सटाइल्स, फुटवियर और लेदर उद्योग में नए बाजारों तक पहुंच भी मिली है। इनसे फार्मास्युटिकल निर्यात को विस्तार देने, कृषि एवं समुद्री उत्पाद के निर्यात को बेहतर करने और टेक्नोलॉजी एवं निर्यात को आकर्षित करने में भी मदद मिली है।"
विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने कहा, "दुनिया एक अनिश्चितता के दौर में प्रवेश कर गई है, जहां पुरानी सोच पर सवाल खड़े हो रहे हैं और प्रमुख अवधारणाएं लगातार बदल रही हैं। सोर्सिंग से लेकर प्रोडक्शन और मार्केट तक, पूरे स्पेक्ट्रम में डी-रिस्किंग और डाइवर्सिफाई करने की सोच दिन-प्रतिदिन और मजबूत होती जा रही है। भारत की प्रतिक्रिया हमेशा से अपनी राष्ट्रीय क्षमताओं को बढ़ाने, विकास के रास्ते में आने वाली चुनौतियों का सामना करने और मजबूती के साथ अंतराष्ट्रीय सहयोगियों के साथ ज्यादा गहराई से जुड़ने की रही है। जैसे-जैसे हम 2047 तक विकसित भारत के अपने लक्ष्य की ओर बढ़ रहे हैं, हम न केवल वैश्विक विकास में, बल्कि वैश्विक स्थायित्व, प्रेडिक्टेबिलिटी और भरोसे में भी योगदान देने के लिए तत्पर हैं।"
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एवं एफईसीसी के मुख्य संरक्षक देवेंद्र फडणवीस ने इस फोरम को ग्लोबल ऑर्डर में हो रहे बड़े बदलावों के खिलाफ महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा, "हम ऐसे समय में मिल रहे हैं, जब वैश्विक व्यापार में तेजी से उथल-पुथल हो रहा है, सप्लाई चेन री-ऑर्गनाइज हो रही है और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सेक्टर्स, सेमीकंडक्टर्स, ऊर्जा, खाद्य, रेयर अर्थ और एआई अब राष्ट्रीय सुरक्षा का हिस्सा बन गए हैं। पूंजी प्रवाह सिर्फ रिटर्न नहीं, बल्कि काफी हद तक भूराजनीतिक झुकाव के आधार पर तय हो रहा है। आर्थिक नीतियों के इस दौर में भारत की तरक्की विकास और खुशहाली की ओर उन्मुख एक स्ट्रक्चरल ब्लूप्रिंट पर आधारित है। इसी को दर्शाते हुए जीईसी 2026 एक ऐसा प्लेटफॉर्म है, जो गठजोड़ का नया फ्रेमवर्क तैयार करेगा। समुद्री व्यापार, उद्यमशीलता और वैश्विक जुड़ाव पर टिके मुंबई शहर से आइए मिलकर एक ऐसी आर्थिक व्यवस्था को आकार दें, जो मजबूत, समावेशी और रणनीतिक रूप से स्थिर हो।"
एफईसीसी के एडवाइजर और भारत फोर्ज लिमिटेड के चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर बाबा कल्याणी ने कहा, "नए वर्ल्ड ऑर्डर में आकार ले रहे बड़े बदलावों के इस दौर में स्थिरता, विकास और संसाधन उपलब्ध कराने वाला देश भारत ही है। हाल की ट्रेड डील्स और आगामी आईएमईसी कॉरिडोर के साथ भारत एक कनेक्टर इकोनॉमी के तौर पर वैश्विक आर्थिक परिदृश्य पर अपनी छाप छोड़ने के लिए सबसे मजबूत स्थिति में है। भारत का विकास वैश्विक मूल्य श्रृंखला में जरूरी लचीलापन लाएगा। हम आप सभी को हमारे साथ मिलकर काम करने, को-ऑपरेट करने, को-क्रिएट करने और को-डेवलप करने के लिए आमंत्रित करते हैं।"
जीईसी 2026 में सरकारों, बहुपक्षीय संस्थानों और ग्लोबल कॉर्पोरेशंस के प्रमुख मिलकर फाइनेंशियल रेजिलिएंस, लॉन्ग-टर्म इन्फ्रास्ट्रक्चर कैपिटल, ट्रेड कॉरिडोर, प्रतिस्पर्धी क्षमता और सप्लाई चेन के विविधीकरण पर चर्चा करेंगे। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, टेक्नोलॉजी ट्रांजिशन, सस्टेनेबिलिटी, ईएसजी प्रायोरिटी और समावेशी विकास को आगे बढ़ाने में महिला नेतृत्व की भूमिका पर चर्चा के लिए भी सत्र आयोजित किए जा रहे हैं।
ऐसे समय में जब आर्थिक शक्ति एक बहुध्रुवीय दुनिया में तेजी से फैल रही है, इस फोरम का लक्ष्य वैश्विक आर्थिक बातचीत की दिशा तय करने में भारत के बढ़ते प्रभाव को और मजबूती से पेश करना है। भारत जीईसी 2026 का लाभ लेकर एक भरोसेमंद आर्थिक साझेदार, निवेश गंतव्य और विकसित एवं उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं के बीच पुल के रूप में अपनी स्थिति को मजबूत करेगा।