फतेहगढ़ साहिब में नतमस्तक हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान, छोटे साहिबज़ादों की शहादत को किया नमन
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज सुबह ऐतिहासिक गुरुद्वारा श्री फतेहगढ़ साहिब में माथा टेककर माता गुजरी जी और छोटे साहिबज़ादे बाबा ज़ोरावर सिंह तथा बाबा फतेह सिंह जी की बेमिसाल शहादत को श्रद्धांजलि अर्पित की। शहादत सभा के अवसर पर उन्होंने कहा कि यह पावन धरती केवल पंजाब ही नहीं, बल्कि पूरी मानवता के लिए प्रेरणा का केंद्र है।
News Tv India हिंदी Official | Verified Expert • 27 Mar, 2026Editor
Dec 26, 2025 • 10:18 AM
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फतेहगढ़ साहिब में नतमस्तक हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान, छोटे साहिबज़ादों की शहादत को किया नमन
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज सुबह ऐतिहासिक गुरुद्वारा श्री फतेहगढ़ साहिब में माथा टेककर माता गुजरी जी और छोटे साहिबज़ादे बाबा ज़ोरावर सिंह तथा बाबा फतेह सिंह जी की बेमिसाल शहादत को श्रद्धांजलि अर्पित की। शहादत सभा के अवसर पर उन्होंने कहा कि यह पावन धरती केवल पंजाब ही नहीं, बल्कि पूरी मानवता के लिए प्रेरणा का केंद्र है।
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फतेहगढ़ साहिब में नतमस्तक हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान, छोटे साहिबज़ादों की शहादत को किया नमन
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज सुबह ऐतिहासिक गुरुद्वारा श्री फतेहगढ़ साहिब में माथा टेककर माता गुजरी जी और छोटे साहिबज़ादे बाबा ज़ोरावर सिंह तथा बाबा फतेह सिंह जी की महान शहादत को श्रद्धांजलि अर्पित की। शहादत सभा के पावन अवसर पर मुख्यमंत्री ने इस धरती को नमन करते हुए कहा कि यह स्थान केवल सिख इतिहास ही नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता के संघर्ष और बलिदान का प्रतीक है।
शहादत सभा के दिनों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब में इन दिनों को ‘शोक के दिनों’ के रूप में मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि इन्हीं दिनों में अत्याचारी शासकों ने छोटे साहिबज़ादों को जीवित ही दीवार में चिनवा दिया था। यह कुर्बानी ऐसी है, जिस पर न केवल पंजाब, बल्कि पूरी दुनिया को गर्व है। मुख्यमंत्री ने बताया कि शहादत सभा के दौरान लगभग 50 लाख श्रद्धालु फतेहगढ़ साहिब पहुंचकर गुरु घर का आशीर्वाद प्राप्त करेंगे।
गुरुद्वारे में अरदास के बाद पत्रकारों से बातचीत में मुख्यमंत्री मान ने कहा कि छोटे साहिबज़ादों और माता गुजरी जी की शहादत मानव इतिहास में बेमिसाल है। उन्होंने कहा कि ये कुर्बानियां आने वाली पीढ़ियों को ज़बर, ज़ुल्म और अन्याय के खिलाफ डटकर खड़े होने की प्रेरणा देती रहेंगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस क्षेत्र की एक-एक इंच भूमि पवित्र है और इसी कारण यहां देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु श्रद्धा के साथ नमन करने आते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह पावन धरती केवल सिख समुदाय के लिए ही नहीं, बल्कि समूची मानवता के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
छोटे साहिबज़ादों की शहादत का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अंतरात्मा की आवाज़ के अनुसार धर्म अपनाने के मानव अधिकार की रक्षा के लिए दी गई यह कुर्बानी इतिहास की अद्वितीय घटनाओं में से एक है। उन्होंने कहा कि सिख इतिहास में इस बलिदान को ‘नन्ही जानों का बड़ा साका’ कहा जाता है। भले ही इस घटना को घटित हुए तीन सौ वर्षों से अधिक समय बीत चुका हो, लेकिन आज भी समूचा सिख जगत इस पीड़ा को उतनी ही गहराई से महसूस करता है।
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मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बताया कि उन्होंने परमात्मा के समक्ष पंजाब की चढ़दी कला, आपसी सद्भाव, शांति और भाईचारे के साझा मूल्यों को और मजबूत करने की अरदास की है। उन्होंने कहा कि वे स्वयं को सौभाग्यशाली मानते हैं कि अकाल पुरख ने उन्हें पंजाब की सेवा का अवसर दिया है।
दुनिया भर से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की सुविधा को लेकर किए गए प्रबंधों की जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाएं, यातायात व्यवस्था, स्वच्छता, सुरक्षा और अन्य आवश्यक इंतजाम व्यापक स्तर पर किए गए हैं। उन्होंने कहा कि शहादत सभा के दौरान संगत की सेवा करना सरकार का पहला कर्तव्य है और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि किसी भी श्रद्धालु को कोई असुविधा न हो।
मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि इस वर्ष नौवें पातशाह श्री गुरु तेग बहादुर जी का 350वां शहादत दिवस भी पूरे सम्मान और श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इसी अवसर पर नवंबर माह में श्री आनंदपुर साहिब की पावन धरती से सिखों के तख्त साहिबानों से जुड़े तीन शहरों को पवित्र शहर घोषित करने का निर्णय लिया गया था। अमृतसर की वॉल्ड सिटी, तलवंडी साबो और श्री आनंदपुर साहिब को पवित्र शहर का दर्जा देने संबंधी अधिसूचना जारी कर दी गई है, जिससे दुनिया भर में बसे सिखों की एक लंबे समय से चली आ रही मांग पूरी हुई है।
छोटे साहिबज़ादों की शहादत के दिवस को ‘वीर बाल दिवस’ नाम देने को लेकर उठे विवाद पर मुख्यमंत्री ने कहा कि जब केंद्र की भाजपा सरकार ने यह निर्णय लिया था, तब शिरोमणि अकाली दल ने इसका समर्थन किया था, लेकिन संगत के विरोध के बाद अब वह अपने रुख से पीछे हट रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि साहिबज़ादों की बेमिसाल कुर्बानी को किसी एक दिवस या शब्द में सीमित नहीं किया जा सकता और अकाली दल का रुख बदलना इस बात का प्रमाण है कि वह अपनी विरासत और मूल्यों को लेकर गंभीर नहीं है।