पंजाब के निर्माण मजदूरों के लिए बदला सिस्टम, भगवंत मान सरकार में कल्याण योजनाओं की रफ्तार तेज

पंजाब में दशकों से उपेक्षित रहे निर्माण मजदूरों के लिए भगवंत मान सरकार ने कल्याण व्यवस्था में बड़े संरचनात्मक सुधार किए हैं। आवेदन प्रक्रिया सरल हुई है, तकनीक के जरिए देरी घटी है और हजारों मजदूरों तक समय पर लाभ पहुंच रहा है।

Feb 5, 2026 - 14:15
पंजाब के निर्माण मजदूरों के लिए बदला सिस्टम, भगवंत मान सरकार में कल्याण योजनाओं की रफ्तार तेज
पंजाब के निर्माण मजदूरों के लिए बदला सिस्टम, भगवंत मान सरकार में कल्याण योजनाओं की रफ्तार तेज

पंजाब के निर्माण मजदूर वर्षों तक राज्य के सबसे उपेक्षित नागरिकों में गिने जाते रहे। सड़कों से लेकर स्कूल, अस्पताल और घर—राज्य की नींव इन्हीं हाथों ने रखी, लेकिन बदले में उन्हें मिला अभाव, अनिश्चितता और सरकारी सिस्टम की बेरुखी। कल्याण योजनाएं थीं, पर कागजों में। हकीकत में मजदूर दफ्तरों के चक्कर काटते रहे।

अब यह तस्वीर बदल रही है। मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार ने निर्माण मजदूरों के लिए सिर्फ घोषणाएं नहीं कीं, बल्कि पूरे सिस्टम को नए सिरे से खड़ा किया।

बदला हुआ सिस्टम, बदली हुई सोच

मजदूरों को फॉर्म भरने, बेवजह की शर्तों और महीनों की देरी से राहत देने के लिए पंजाब सरकार ने प्रशासनिक ढांचे में ठोस सुधार किए। पंजाब बिल्डिंग एंड अदर कंस्ट्रक्शन वर्कर्स वेलफेयर बोर्ड (BOCW) के कामकाज को तेज, पारदर्शी और जवाबदेह बनाया गया।

पिछली सरकारों के दौर में कल्याण लाभ मिलने में औसतन 206 दिन लगते थे। लेबर कार्ड सिर्फ एक साल के लिए वैध होते थे और सहायता मिलेगी या नहीं, यह भी तय नहीं था। मान सरकार को न सिर्फ यह सुस्त सिस्टम विरासत में मिला, बल्कि वर्षों की अनदेखी और देनदारियां भी संभालनी पड़ीं।

अनावश्यक शर्तों से मुक्ति

सरकार ने प्रयोग नहीं, बल्कि संरचनात्मक सुधार का रास्ता चुना। मजदूरों को अपमानित करने वाली शर्तें हटाई गईं। प्रसव लाभ के लिए नवजात के आधार कार्ड की अनिवार्यता खत्म करना इसका बड़ा उदाहरण है। आर्थिक मदद के लिए नवजात से पहचान मांगना न तो व्यावहारिक था, न मानवीय—अब यह बाधा इतिहास बन चुकी है।

तकनीक, लेकिन इंसान के लिए

पंजाब का मॉडल इसलिए अलग है क्योंकि यहां तकनीक को दिखावे के लिए नहीं, बल्कि परेशानी कम करने के लिए अपनाया गया। जो आवेदन प्रक्रिया पहले 11 चरणों में पूरी होती थी, उसे सरल किया गया। 14 योजनाओं से गैर-जरूरी मंजूरियां हटाईं गईं। विभाग अब आपस में डेटा साझा करते हैं, जिससे मजदूरों से वही दस्तावेज बार-बार नहीं मांगे जाते जो सरकार के पास पहले से मौजूद हैं।

पहले मजदूरों को फॉर्म जमा करने और आधार सत्यापन के लिए बार-बार दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते थे। इससे रोज़ी का नुकसान होता था। अब पूरा सिस्टम ऑनलाइन है। एक बार जानकारी देने के बाद प्रक्रिया खुद आगे बढ़ती है। स्वास्थ्य बीमा कवर को 10 लाख रुपये तक बढ़ाया गया है, जिससे आपात स्थिति में बिना कागजी झंझट इलाज संभव हो पा रहा है।

आंकड़े बोलते हैं

सरकार के दावों के पीछे ठोस नतीजे हैं।

  • लाभ वितरण का औसत समय 203 दिन से घटकर 73 दिन रह गया है।
  • कल्याण खर्च 2020-21 के 93 करोड़ से बढ़कर 2025-26 की पहली तीन तिमाहियों में 125 करोड़ पहुंच चुका है।
  • इस साल अब तक 81 हजार से ज्यादा निर्माण मजदूरों को लाभ मिला है, जो पहले की तुलना में लगभग तीन गुना है।

इसका असर जमीन पर दिख रहा है—स्कूल फीस समय पर जमा हो रही है, मेडिकल इमरजेंसी में कर्ज नहीं लेना पड़ रहा, शादी के लिए शगन सहायता से सम्मान मिल रहा है और बेटियों के नाम फिक्स्ड डिपॉजिट से भविष्य सुरक्षित हो रहा है।

‘किरत’ कॉन्फ्रेंस और आगे की राह

हाल ही में आयोजित ‘किरत’ कॉन्फ्रेंस और BOCW हैंडबुक का लॉन्च इन सुधारों को जमीनी स्तर तक मजबूत करने की दिशा में अहम कदम है। यह दिखाता है कि सरकार का फोकस सिर्फ घोषणाओं पर नहीं, बल्कि प्रभावी क्रियान्वयन पर है।

श्रम का सम्मान, यही नीति

श्रम मंत्री तरुनप्रीत सिंह सौंद ने कहा ,

“मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में पंजाब सिर्फ विश्वस्तरीय ढांचा नहीं बना रहा, बल्कि उसे बनाने वाले मजदूरों को भी सम्मान दे रहा है।”

आज जब कई जगह मजदूर कल्याण सिर्फ नारे बनकर रह गया है, पंजाब ने यह साबित किया है कि कल्याण कोई एहसान नहीं, बल्कि मेहनतकशों का हक है। यही सोच पंजाब को दूसरों से अलग बनाती है।

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