खैहरा के घर पर चला 'पीला पंजा': कपूरथला में भारी तनाव, विधायक बोले- "बदले की राजनीति कर रहे सीएम मान"
भुलत्थ विधायक सुखपाल सिंह खैहरा के रामगढ़ स्थित आवास पर अवैध निर्माण हटाने के लिए प्रशासन ने बुलडोजर चलाया। खैहरा ने इसे बदले की राजनीति बताया।
कपूरथला : पंजाब की राजनीति में आज उस वक्त हड़कंप मच गया जब जिला प्रशासन की टीम भारी पुलिस बल के साथ भुलत्थ से कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैहरा के रामगढ़ स्थित आवास पर बुलडोजर लेकर पहुँची। अवैध निर्माण के खिलाफ की गई इस कार्रवाई के दौरान पुलिस ने खैहरा के घर के बाहर गली में लगे गेट के पिलरों को गिरा दिया। इस दौरान विधायक और उनके समर्थकों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की, जिससे इलाके में जबरदस्त तनाव बना हुआ है।
चप्पे-चप्पे पर पुलिस, छावनी में तब्दील हुआ इलाका
प्रशासन ने किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए पहले ही पुख्ता इंतजाम कर रखे थे। एसएसपी गौरव तूरा की अगुवाई में भारी तादाद में पुलिस बल को तैनात किया गया था।
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कार्रवाई का दायरा: प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, बुलडोजर मुख्य कोठी पर नहीं, बल्कि केवल उस हिस्से पर चलाया गया जिसे सरकारी जमीन पर 'अवैध कब्जा' माना गया है।
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सुरक्षा घेरा: विधायक के समर्थकों के भारी जमावड़े को देखते हुए पूरे रामगढ़ गांव को पुलिस छावनी में बदल दिया गया।
"बिना नोटिस की गई कार्रवाई": सुखपाल खैहरा का आरोप
कार्रवाई के दौरान घर पर ही मौजूद विधायक सुखपाल सिंह खैहरा ने पंजाब सरकार और मुख्यमंत्री भगवंत मान पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा:
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बदले की भावना: यह पूरी कार्रवाई राजनीति से प्रेरित है क्योंकि मैं लगातार सरकार की नाकामियों को उजागर कर रहा हूँ।
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नियमों का उल्लंघन: खैहरा का दावा है कि प्रशासन ने न तो कोई कानूनी नोटिस दिया और न ही उन्हें अपना पक्ष रखने का समय दिया।
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सत्ता का दुरुपयोग: उन्होंने इसे लोकतंत्र की हत्या और तानाशाही करार दिया।
सुबह 7 बजे ही डट गए थे समर्थक
प्रशासन की इस योजना की भनक खैहरा को पहले ही लग गई थी, जिसके बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर वीडियो संदेश जारी कर समर्थकों से सुबह 7 बजे घर पहुँचने की अपील की थी। उनकी अपील पर बड़ी संख्या में कांग्रेसी कार्यकर्ता और स्थानीय लोग वहां जमा हो गए, जिन्होंने घंटों तक 'आप' सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया।
अभी आधिकारिक बयान का इंतजार
फिलहाल इस कार्रवाई को लेकर जिला प्रशासन या कपूरथला डीसी की ओर से कोई विस्तृत लिखित बयान नहीं आया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वे केवल ड्यूटी निभा रहे हैं और अवैध निर्माण हटाना एक सामान्य प्रक्रिया है।