'कल्याण बनर्जी बचपन से मेरे मार्गदर्शक रहे हैं, घमंडी नहीं हूं': अभिषेक बनर्जी का आरोपों पर बेबाक जवाब
तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने अपने खिलाफ घमंडी होने के आरोपों और जांच एजेंसियों के समन पर खुलकर बात की। उन्होंने कल्याण बनर्जी को बचपन का मार्गदर्शक बताया।
News Tv India हिंदी Official | Verified Expert • 27 Mar, 2026Editor
Jun 13, 2026 • 7:00 AM | कोलकाता
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'कल्याण बनर्जी बचपन से मेरे मार्गदर्शक रहे हैं, घमंडी नहीं हूं': अभिषेक बनर्जी का आरोपों पर बेबाक जवाब
तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने अपने खिलाफ घमंडी होने के आरोपों और जांच एजेंसियों के समन पर खुलकर बात की। उन्होंने कल्याण बनर्जी को बचपन का मार्गदर्शक बताया।
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कोलकाता : तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी ने अपने खिलाफ चल रही जांच और पार्टी के भीतर उठ रही आलोचनाओं पर बुधवार को खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को अपनी राय रखने का पूरा अधिकार है और वह उनके विचारों का सम्मान करते हैं। यह बयान ऐसे समय में आया है जब राजनीतिक गलियारों में उनकी कार्यशैली और जांच एजेंसियों की कार्रवाई को लेकर लगातार चर्चाएं जारी हैं।
कल्याण बनर्जी के 'घमंडी' बयान पर अभिषेक का जवाब
हाल ही में सांसद कल्याण बनर्जी ने अभिषेक बनर्जी को 'बहुत घमंडी' करार दिया था। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए अभिषेक बनर्जी ने कहा, "जो वरिष्ठ नेता मेरे खिलाफ बोल रहे हैं, उन्हें पार्टी के भीतर अपनी बात रखने का पूरा हक है। कल्याण बनर्जी ने मेरे बारे में जो कहा, वह उनका अधिकार है। वह मुझे बचपन से जानते हैं और उन्होंने हमेशा मेरा मार्गदर्शन किया है।" यह बयान पार्टी के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान को भी दर्शाता है, जहां वरिष्ठ और युवा नेताओं के बीच मतभेद सामने आ रहे हैं।
जांच एजेंसियों और भाजपा पर अभिषेक का सीधा हमला
अभिषेक बनर्जी ने भाजपा पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि अब केंद्र में सरकार बदल चुकी है और उन्हें किसी भी मामले में फंसाने की कोशिश की जा सकती है। उन्होंने दृढ़ता से कहा कि वे दबाव के आगे झुकने वाले नहीं हैं। "अब सरकार बदल गई है। वे मुझे हर संभव मामले में जोड़ने की कोशिश करेंगे, लेकिन हम एक इंच भी पीछे नहीं हटेंगे," उन्होंने जोर देकर कहा। यह बयान उनकी राजनीतिक दृढ़ता को दर्शाता है।
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उन्होंने 2011 और 2026 की परिस्थितियों की तुलना करते हुए दावा किया कि राज्य का माहौल पूरी तरह बदल चुका है। बनर्जी ने टिप्पणी की, "2011 और 2026 के बीच का अंतर देखिए। रात 8 बजे के बाद सड़कें सुनसान हो रही हैं और भाजपा अपनी जीत के जुलूस तक नहीं निकाल पा रही है।" उन्होंने भाजपा पर चुनाव से पहले किए गए वादों से पीछे हटने का आरोप भी लगाया, खासकर 'अन्नपूर्णा भंडार योजना' का जिक्र करते हुए। उन्होंने कहा कि चुनाव के बाद राज्य में 'बुलडोजर राजनीति' देखने को मिल रही है।
जांच में सहयोग और समन प्रक्रिया पर सवाल
जांच एजेंसियों के समन को लेकर अभिषेक बनर्जी ने दोहराया कि उन्होंने हमेशा जांच में सहयोग किया है और आगे भी करते रहेंगे। टीएमसी महासचिव ने बताया कि उन्होंने करीब साढ़े पांच घंटे तक अधिकारियों के साथ सहयोग किया और अदालत द्वारा तय समय से पहले ही भवानी भवन पहुंच गए थे। उन्होंने 14 जून को कोलकाता में उपस्थित रहने की बात कही और जरूरत पड़ने पर दोबारा पेश होने का आश्वासन दिया।
उन्होंने समन जारी करने की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि उन्हें फोन पर बुलाया जाता तो वे घर पर ही रुक जाते। बनर्जी ने बताया कि पहला समन 30 तारीख को जारी हुआ था, लेकिन उसी दिन उन पर हमला हुआ था और वे दिल्ली चले गए। फिर 8 तारीख को नोटिस मिला, जिसमें 9 तारीख को पेश होने को कहा गया, लेकिन उस समय भी वे दिल्ली में थे। कोलकाता लौटने के बाद उन्हें हाईकोर्ट के निर्देश की जानकारी मिली और वे तय समय तक जांच एजेंसी के सामने उपस्थित हुए।
चुनावी बयान और केंद्रीय गृह मंत्री पर पलटवार
अपने चुनावी बयान को लेकर दर्ज मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए अभिषेक बनर्जी ने सवाल उठाया कि जब उन्होंने वह टिप्पणी की थी, तब चुनाव चल रहे थे और कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी चुनाव आयोग के पास थी। उन्होंने कहा कि यदि उनके बयान के आधार पर मामला दर्ज किया जा सकता है, तो उसी दौरान दिए गए बयानों के लिए केंद्रीय गृह मंत्री को भी पूछताछ के लिए क्यों नहीं बुलाया जाना चाहिए? यह टिप्पणी उन्होंने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए एक तीखा राजनीतिक पलटवार किया।