Delhi H1N1 Cases: दिल्ली में बढ़ रहे H1N1 के मामले, डॉक्टरों ने बच्चों और बुजुर्गों को लेकर दी खास सलाह
Delhi H1N1 Cases: दिल्ली में H1N1 के बढ़ते मामलों के बीच डॉक्टरों ने बच्चों, बुजुर्गों और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है।
Nitesh Kumar Jha Verified Public Figure • 23 Jul, 2026Editor
Aug 25, 2026 • 8:17 AM | नई दिल्ली Last Edited By:News Tv India हिंदी
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Nitesh Kumar Jha
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Delhi H1N1 Cases: दिल्ली में बढ़ रहे H1N1 के मामले, डॉक्टरों ने बच्चों और बुजुर्गों को लेकर दी खास सलाह
Delhi H1N1 Cases: दिल्ली में H1N1 के बढ़ते मामलों के बीच डॉक्टरों ने बच्चों, बुजुर्गों और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है।
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25 August 2026
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Delhi H1N1 Cases: दिल्ली में बढ़ रहे H1N1 के मामले, डॉक्टरों ने बच्चों और बुजुर्गों को लेकर दी खास सलाह
Delhi H1N1 Cases : दिल्ली में H1N1 के मामलों में बढ़ोतरी के बीच डॉक्टरों ने लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर किसी बच्चे या व्यक्ति में खांसी-जुकाम जैसे लक्षण दिखाई दे रहे हैं तो उसे भीड़भाड़ वाली जगहों से दूर रखना बेहतर है।
डॉक्टरों ने खास तौर पर छोटे बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और पहले से किसी बीमारी से जूझ रहे लोगों को लेकर सतर्क रहने की बात कही है। विशेषज्ञों के मुताबिक ऐसे लोगों में फ्लू के कारण जटिलताएं बढ़ने का जोखिम अधिक हो सकता है।
बच्चों में H1N1 को लेकर डॉक्टरों की खास चिंता
सर गंगा राम अस्पताल के वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ और पीडियाट्रिक पल्मोनोलॉजी के सह-निदेशक डॉ. धीरन गुप्ता ने कहा कि अगर किसी बच्चे को खांसी या जुकाम है तो उसे स्कूल भेजने या समूह में घुलने-मिलने से बचाना चाहिए।
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उन्होंने बताया कि डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, फेफड़ों की पुरानी बीमारी, अस्थमा या न्यूरोलॉजिकल समस्या जैसी स्वास्थ्य स्थितियों वाले लोग अधिक जोखिम में हो सकते हैं।
डॉक्टर के मुताबिक छोटे बच्चों में, खासकर पांच साल से कम उम्र के बच्चों में, मौजूदा संक्रमण ज्यादा परेशानी पैदा कर सकता है। दो साल से कम उम्र के बच्चों में तेज बुखार और खाना-पीना कम करना विशेष रूप से चिंता का विषय हो सकता है।
डॉ. धीरन गुप्ता के अनुसार मौजूदा इन्फ्लुएंजा संक्रमण में तेज बुखार और शरीर में काफी दर्द प्रमुख लक्षणों में शामिल हो सकते हैं। उन्होंने बताया कि कुछ मामलों में बुखार 103 से 104 डिग्री फॉरेनहाइट तक पहुंच सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा स्थिति को 2009 के H1N1 प्रकोप जैसी स्थिति समझना सही नहीं होगा। उनके मुताबिक अभी जिस बदलाव की बात हो रही है, वह एंटीजनिक ड्रिफ्ट है, न कि 2009 जैसा एंटीजनिक शिफ्ट।
किन लोगों को ज्यादा सावधानी की जरूरत?
यथार्थ सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल, मॉडल टाउन, नई दिल्ली के पल्मोनोलॉजी विभाग के वाइस चेयरमैन और एचओडी डॉ. इंदर मोहन चुघ ने कहा कि बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों में फ्लू की जटिलताओं का जोखिम अधिक हो सकता है।
उन्होंने डायबिटीज, हृदय, किडनी या लिवर की बीमारी, कैंसर, अस्थमा और COPD जैसी स्थितियों वाले लोगों को भी हाई रिस्क समूह में बताया।
डॉ. चुघ के अनुसार ज्यादातर इन्फ्लुएंजा के मरीज करीब सात से दस दिनों में ठीक हो जाते हैं, लेकिन हाई रिस्क वाले लोगों में लक्षण गंभीर होने पर समय पर डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है।
H1N1 में एंटीबायोटिक काम करता है?
डॉक्टरों ने साफ किया है कि इन्फ्लुएंजा एक वायरल संक्रमण है। ऐसे में एंटीबायोटिक इसका सीधा इलाज नहीं है।
डॉ. चुघ के मुताबिक डॉक्टर की सलाह पर एंटीवायरल दवाओं का इस्तेमाल किया जा सकता है, खासकर जब उपचार शुरुआती चरण में शुरू किया जाए। किसी भी दवा को खुद से लेने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।
H1N1 से बचने के लिए क्या सावधानी रखें?
विशेषज्ञों ने संक्रमण का जोखिम कम करने के लिए हाथों की स्वच्छता बनाए रखने, लक्षण होने पर भीड़भाड़ वाली जगहों से बचने और जरूरत के मुताबिक मास्क लगाने की सलाह दी है।
अगर किसी बच्चे या परिवार के सदस्य में फ्लू जैसे लक्षण दिखाई देते हैं तो उसे दूसरों के संपर्क में कम रखने से संक्रमण फैलने का खतरा घटाया जा सकता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक हाई रिस्क समूह में शामिल लोगों को लक्षण गंभीर होने का इंतजार नहीं करना चाहिए और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
क्यों महत्वपूर्ण है दिल्ली में H1N1 की स्थिति?
H1N1 इन्फ्लुएंजा के बढ़ते मामलों के बीच सबसे ज्यादा ध्यान उन लोगों पर है जिनमें संक्रमण के गंभीर होने का जोखिम अधिक है। खासकर छोटे बच्चों और पहले से किसी बीमारी से जूझ रहे लोगों में लक्षणों पर नजर रखना महत्वपूर्ण है।
फिलहाल विशेषज्ञों की सलाह का मुख्य फोकस संक्रमण को फैलने से रोकने और गंभीर लक्षणों की स्थिति में समय पर चिकित्सकीय मदद लेने पर है।
पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब 5 वर्षों का अनुभव। अपनी बीट से जुड़ी खबरों और बदलते घटनाक्रम पर गहरी नजर रखते हैं। सटीक, तथ्यात्मक और आसान भाषा में खबरें पाठकों तक पहुंचाने में माहिर हैं।