स्पेस में माइक्रोग्रैविटी के बीच खुद को कैसे फिट रखते हैं एस्ट्रोनॉट्स, ऐसे करते हैं एक्सरसाइज
अंतरिक्ष में रहना आसान नहीं होता और वहां गुरुत्वाकर्षण न के बराबर होता है, जिसे माइक्रोग्रैविटी कहते हैं। इस वजह से एस्ट्रोनॉट्स की हड्डियां और मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं।
नई दिल्ली : अंतरिक्ष में रहना आसान नहीं होता और वहां गुरुत्वाकर्षण न के बराबर होता है, जिसे माइक्रोग्रैविटी कहते हैं। इस वजह से एस्ट्रोनॉट्स की हड्डियां और मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं। पृथ्वी पर रोजाना चलने-फिरने से हड्डियों और मांसपेशियों पर दबाव पड़ता है, जो उन्हें मजबूत रखता है। वहीं, स्पेस में ऐसा दबाव नहीं मिलता, इसलिए हड्डियां हर महीने 1 प्रतिशत तक कमजोर हो सकती हैं और मांसपेशियां सिकुड़कर कमजोर पड़ जाती हैं।
ऐसे में अगर कोई कदम न उठाया जाए, तो लंबे मिशन में एस्ट्रोनॉट्स की हड्डियां और मांसपेशियां बुजुर्गों जैसी कमजोर हो सकती हैं। इसी समस्या से निपटने के लिए एस्ट्रोनॉट्स इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (आईएसएस) पर रोजाना औसतन दो घंटे एक्सरसाइज करते हैं। यह एक्सरसाइज उनके लिए बहुत जरूरी है, क्योंकि यह हड्डी और मांसपेशियों के नुकसान को काफी हद तक रोकती है। शुरुआती मिशनों में सिर्फ इलास्टिक बैंड से एक्सरसाइज होती थी, लेकिन अब इक्विपमेंट बहुत एडवांस्ड हो गए हैं। अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा मुख्य उपकरणों के बारे में विस्तार से जानकारी देता है-